कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है ?

कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है ? उत्तर⇒पौधों के कुछ भाग जैसे जड़, तना तथा पत्तियाँ उपयुक्त परिस्थितियों म विकसित होकर नया पौधा उत्पन्न करते हैं। अधिकतर जंतुओं के विपरीत, एकल पौधे इस क्षमता का उपयोग जनन की विधि के रूप में करते हैं। परन्तु, कलम अथवा … Read more

डी०एन०ए० प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है ?

डी०एन०ए० प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है ? उत्तर⇒जनन कोशिका में डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियाँ बनती हैं तथा उनका एक-दूसरे से अलग होना आवश्यक है। डी०एन०ए० की एक प्रतिकृति का मूल काशिका में रखकर दूसरी प्रतिकंति को उससे बाहर नहीं निकाला जा सकता क्याक दूसरी प्रतिकृति के पास जैव-प्रक्रमों के अनुरक्षण हेतु संगठीय कोशिकीय … Read more

डॉ०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिये आवश्यक क्यों है ?

डॉ०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिये आवश्यक क्यों है ? उत्तर⇒ डी०एन०ए० की प्रतिकति बनाना जनन के लिये आवश्यक है क्योंकि ये जनन की विशेष सूचना को धारण करने वाली प्रोटीन के निर्माण के लिये उत्तरदायी होते हैं। डी०एन०ए० गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं जो कोशिका के केन्द्रक में उपस्थित होते हैं। प्रत्येक प्रकार की … Read more

परागण किसे कहते हैं ? वर्षा होने पर परागण पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

परागण किसे कहते हैं ? वर्षा होने पर परागण पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उत्तर⇒पुंकेसर के परागकोश से स्त्रीकेसर के वर्तिकान पर परागकणों के स्थानांतरण को परागण कहते हैं। परागकणों का यह स्थानांतरण जब एक ही फूल के अथवा एक ही पौधे के दो फूल के बीच होता है तब इसे स्वपरागण कहते हैं। स्वपरागण करने … Read more

पुष्पी पौधों में निषेचन क्रिया का सचित्र वर्णन करें।

पुष्पी पौधों में निषेचन क्रिया का सचित्र वर्णन करें। उत्तर⇒ पुष्पी पौधों में परागकणों के वर्तिकार तक पहुँचने की क्रिया (परागण) के बाद. निषेचन की क्रिया होती है। नर युग्मक और मादा युग्मक के संगलन को निषेचन कहते हैं। परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचने के बाद वर्तिकाग्र की सतह से पोषक पदार्थ अवशोषित कर परागनलिका विकसित करता … Read more

परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है ?

परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है ? उत्तर⇒परागण में परागकणों के परागकोश से निकलकर उसी पुष्प या उस जाति के दूसरे पुष्पों के वर्तिकान तक पहुँचने की क्रिया होती है। यह दो प्रकार से होता है-स्व-परागण द्वारा तथा पर-परागण द्वारा। स्व-परागण केवल उभयलिंगी (hermaphrodate) पौधों में ही होता है, जैसे—सूर्यमुखी, बालसम, पोर्चुलाका आदि … Read more

एक प्रारूपिक पुष्पी पौधे में परागण से बीज के निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रियाओं को सूचीबद्ध करें।

एक प्रारूपिक पुष्पी पौधे में परागण से बीज के निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रियाओं को सूचीबद्ध करें। उत्तर⇒परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, जहाँ पोषक तत्त्वों का अवशोषण कर वृद्धि करते हैं। परागकण से परागनलिका निकलती है, जो वर्तिका से होते हुए बीजांड में प्रविष्ट हो जाती है। बीजांड में अंडाणु से संयुग्मित … Read more

एक प्ररूपी पुष्प के सहायक अंग एवं आवश्यक अंग में क्या भिन्नता है ?

एक प्ररूपी पुष्प के सहायक अंग एवं आवश्यक अंग में क्या भिन्नता है ? उत्तर⇒ एक प्ररूपी पुष्प (typical flower) में चार प्रकार के पुष्पपत्र होते हैं – (i) बाह्यदलपुंज (Calyx) (ii) दलपुंज (Corolla) (iii) पुमंग (Androecium) (iv) जायांग (Gynoecium) इनमें से दो बाहरी चक्रों यानी बाह्यदलपुंज एवं दलपुंज को सहायक अंग (accessory organs) एवं भीतरी दो चक्रों यानी … Read more

द्विखंडन बहुखंडन से किस प्रकार भिन्न है ?

द्विखंडन बहुखंडन से किस प्रकार भिन्न है ? उत्तर⇒ द्विखंडन विखंडन में एक व्यष्टि से खंडित होकर दो का निर्माण होता है। इस विधि में कोशिका या शरीर वृद्धि कर दो बराबर भागों में विभाजित हो जाता है। पहले केंद्रक समसूत्री विभाजन (mitosis) या असमसूत्री विभाजन (amitosis) द्वारा दो समान संतति केंद्रकों (daughter nuclei) में … Read more

गर्भ निरोध की विधियों का वर्णन करें।

गर्भ निरोध की विधियों का वर्णन करें। उत्तर⇒ गर्भ निरोध के निम्नलिखित उपाय हैं – महिलाओं में – (i) अन्तः गर्भाशय युक्ति, (ii) योनि डायाफ्राम्स, कीम-जैली आदि, (iii) ऑपरेशन विधि, (iv) हॉर्मोन्स से तैयार गर्भ निरोधक गोलियाँ, (v) गर्भाशय में कॉपर-टी के रोपण से भ्रूण का पोषण नहीं हो पाता है। पुरुष में  (i) नसबंदी (ii) कंडोम, इत्यादि का प्रयोग होता है गर्भ … Read more