जयपुर का इतिहास

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

जयपुर का इतिहास कच्छवाह अपने को भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज मानते हैं। इन्हें ‘रघुकुल तिलक’ कहा जाता है। इनका आदर्श वाक्य है यतो धर्मस्ये जयते (जहां धर्म है वही विजय है) कछवाह सूर्यवंशी कहलाते है । कूर्म के कुल के होने के कारण आमेर के कच्छवाह कूर्म भी कहे जाते हैं। ढोला … Read more

राजस्थान में जनजागरण

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

राजस्थान में जनजागरण कांग्रेस की स्थापना ✰ राजस्थान में कांग्रेस की स्थापना 1887 में राजकीय महाविद्यालय अजमेर के छात्रों द्वारा की गई थी। रामगोपाल कायस्थ, फतेहचन्द खूबिया, हरबिलास शारदा इत्यादि इस संस्था के प्रमुख सदस्य थे। ✰ अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1888 में इलाहाबाद अधिवेशन (अध्यक्ष – जॉर्जयूल) में पहली बार अजमेर का प्रतिनिधि मण्डल सम्मिलित … Read more

राजस्थान में 1857 की क्रान्ति

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

राजस्थान में 1857 की क्रान्ति राजपूताना रेजीडेन्सी राजपूताना रेजीडेन्सी की स्थापना 1832 में हुई इसका मुख्यालय अजमेर में बनाया गया। इसका मुख्य अधिकारी ए. जी. जी (एजेन्ट टू गर्वनर जनरल) होता था। प्रथम एजीजी लॉकेट था। राजपूताना रेजीडेन्सी का 1845 में ग्रीष्मकालीन कार्यालय आबू में स्थानान्तरित कर दिया। 1857 की क्रान्ति के समय ए. जी. … Read more

सहायक संधियाँ

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

सहायक संधियाँ राजस्थान में मराठों का प्रवेश एवं उनकी गतिविधियाँ ✰ छत्रपति शिवाजी स्वयं को मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश से सम्बन्धित मानते थे। ‘वीर विनोद’ में श्यामलदास ने शिवाजी के दादा मालूजी का सम्बन्ध मेवाड़ से बताया है। ✰ मई, 1711 ई. में मराठों ने मन्दसौर के पास मेवाड़ राज्य के अधीनस्थ क्षेत्र से प्रथम बार धन … Read more

धौलपुर जाट राज्य

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धौलपुर जाट राज्य धौलपुर राज्य की वंशावली रिकार्ड के अनुसार इस मत की पुष्टि होती है कि इनका जाट गोत्र भस्भरांलिया है जिसकी उत्पत्ति चन्द्रवंशी सम्राट ययाति के पुत्र पुरू के वंशज जाट राजा वीरभद्र के पुत्र चन्द्र के नाम से मानी जाती है । वंश के नरेशों की पदवी राणा थी । जिस प्रकार … Read more

जैसलमेर, करौली, अलवर का इतिहास

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जैसलमेर, करौली, अलवर का इतिहास जैसलमेर का भाटी वंश ✰ जैसलमेर के भाटी चन्द्रवंशीय यादव थे और अपना सम्बन्ध भगवान कृष्ण से जोड़ते थे। भट्टीय – ✰ भट्टीय नामक व्यक्ति ने 285 ई. में भाटी वंश की स्थापना की। इसने भटनेर का किला बनवाकर इसे अपनी राजधानी बनाया । मंगलराव भाटी- ✰ मंगलराव भाटी को गजनी के डुण्डी … Read more

चौहान वंश : राजस्थान

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

चौहान वंश : राजस्थान साम्भर या अजमेर के चौहान वंश अजमेर शाखा प्रारम्भ नैणसी, टॉड तथा सूर्यमल्ल मिश्रण ने चौहानों के अग्निकुण्ड सिद्धांतों को स्वीकार किया है। बिजौलिया शिलालेख में चौहानों को वत्सगोत्रीय ब्राह्मण बताया गया है। टॉड व स्मिथ ने चौहानों को विदेशी माना है। डॉ. भण्डारकर ने चौहानों को खज जाति से उत्पन्न … Read more

जनपद काल में राजस्थान

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

जनपद काल में राजस्थान राजस्थान के प्रमुख जनपद ✰ आर्यों के सतत आगमन और स्थायी बस्तियों की स्थापना के परिणामस्वरूप क्रमशः जन, जनपद और महाजनपदों की स्थापना हुई। ✰ बौद्ध ग्रन्थ अंगुतरनिकाय और जैन ग्रन्थ भगवतीसूत्र में वर्णित सोलह महाजनपदों में से मत्स्य, शूरसेन और अवन्ति महाजनपदों के अन्तर्गत राजस्थान के विभिन्न क्षेत्र आते थे। ✰ उत्तर … Read more

गुर्जर प्रतिहार वंश : राजस्थान

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

गुर्जर प्रतिहार वंश : राजस्थान गुर्जर प्रतिहार अपने आप को राम के भाई लक्ष्मण के वंशज मानते हैं। विदेशी इतिहासकार अलमसूदी (915-18) ने गुर्जरों को अलगूजर / अलगुर्जा कहा है। पुलकेशियन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में सर्वप्रथम गुर्जर जाति का उल्लेख हुआ है। चन्द्रबरदाई के पृथ्वीराज रासों के अनुसार वशिष्ठ मुनि के अग्नि कुण्ड से … Read more

राजपूतों की उत्पत्ति : राजस्थान

राजस्थान के इतिहास के स्रोत : अभिलेख एवं सिक्के

राजपूतों की उत्पत्ति : राजस्थान इतिहास में राजपूत जाति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राजपूत काल 7वीं से 12वीं शताब्दी तक माना जाता है। लगभग 5 सदी तक मुस्लिम आक्रमणों का राजपूत जाति ने मुकाबला किया राजपूत जाति ने धर्म व देश की रक्षा के लिए बलिदान दिया। राजपूत युद्ध के कुशल व वचन के … Read more