भारतीय दर्शनशास्त्रों तथा उनके प्रवर्तकों की चर्चा करें।

भारतीय दर्शनशास्त्रों तथा उनके प्रवर्तकों की चर्चा करें। उत्तर–भारत दर्शनशास्त्र छः हैं । सांख्य-दर्शन के प्रवर्तक कपिल, योग-दर्शन के प्रवर्तक पतञ्चलि. न्याय-दर्शन के प्रवर्तक गौतम. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कणाद मीमांसा-दर्शन के प्रवर्तक जैमिनी तथा वेदांत-दर्शन के प्रवर्तक बदरायण ऋषि हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Facebook पर फॉलो … Read more

वेद के अङ्गों तथा उसके प्रवर्तकों के नाम लिखें।

वेद के अङ्गों तथा उसके प्रवर्तकों के नाम लिखें। उत्तर-वेद के छ: अङ्ग हैं-(i) शिक्षा (ii) कल्प (iii) व्याकरण (iv) निरुक्त (v) छन्द और (vi) ज्योतिष । शिक्षा अङ्ग उच्चारण-प्रक्रिया का बोध कराता है। इसके प्रवर्तक पाणिनी हैं। कल्प अङ्ग में सूत्रात्मक कर्मकांड ग्रंथ है जिसके प्रवर्तक बौधायन, भारद्वाज, गौतम, वशिष्ठ आदि ऋषि हैं । … Read more

वेदरूप शास्त्र और कृत्रिम शास्त्र में क्या अंतर है ?

वेदरूप शास्त्र और कृत्रिम शास्त्र में क्या अंतर है ? उत्तर-जो शास्त्र ईश्वरप्रदत्त है, नित्य है, उस शास्त्र को वेदरूप शास्त्र कहते हैं। कृत्रिम शास्त्र उस शास्त्र को कहते हैं, जो ऋषियों द्वारा लिखे गए हैं, अथवा विद्वानों द्वारा रचे गए हैं । ‘वेद’ वेदरूप शास्त्र का उदाहरण है तथा ‘रामायण’ कृत्रिम शास्त्र का उदाहरण … Read more

‘शास्त्रकाराः’ पाठ के आधार पर शास्त्र की परिभाषा दें।

‘शास्त्रकाराः’ पाठ के आधार पर शास्त्र की परिभाषा दें। उत्तर-सांसारिक विषयों से आसक्ति या विरक्ति, स्थायी, अस्थायी या कृत्रिम उपदेश जो लोगों को देता है उसे शास्त्र कहते हैं । यह मानवों के कर्तव्य और अकर्तव्य का बोध कराता है । यह ज्ञान का शासक है। आजकल अध्ययन विषय को भी शास्त्र कहा जा सकता … Read more

शास्त्रकाराः पाठ का पाँच वाक्यों में परिचय दें।

शास्त्रकाराः पाठ का पाँच वाक्यों में परिचय दें। उत्तर- यह नवनिर्मित संवादात्मक पाठ है जिसमें प्राचीन भारतीय शास्त्रों तथा उनके प्रमुख रचयिताओं का परिचय दिया गया है। इससे भारतीय सांस्कृतिक निधि के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होगी- यही इस पाठ का उद्देश्य है। इस वार्तालाप का उपयोग कक्षा में हो सकता है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे … Read more

वेदांङ्गशास्त्र कितने और कौन-कौन हैं ? इनके क्या उद्देश्य हैं।

वेदांङ्गशास्त्र कितने और कौन-कौन हैं ? इनके क्या उद्देश्य हैं। उत्तर-वेदांङ्गशास्त्र छः हैं। वे शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, छन्द और ज्योतिष हैं। शिक्षा उच्चारण प्रक्रिया का ज्ञान कराती है। कल्प सूत्रात्मक कर्मकाण्ड ग्रंथ है। व्याकरण वर्ण, शब्द, वाक्य आदि का अध्ययन कराता है। निरूक्त का कार्य वेद के अर्थ का बोध कराना है। छन्द सूत्र … Read more

शास्त्र क्या है ? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।

शास्त्र क्या है ? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। उत्तर- शास्त्र का अर्थ ज्ञान का शासक या निर्देशक तन्त्र है। मनुष्यों के कर्तव्य और अकर्तव्य विषयों की वह शिक्षा देता है। शास्त्र को ही आजकल अध्ययन । विषय कहते हैं। पश्चिमी देशों में शास्त्र को अनुशासन कहा जाता है। सांसारिक । विषयों में अनुरक्ति … Read more

‘विश्वशांति’ पाठ के आधार पर भारतीय दर्शन का मूल तत्त्व बतलाएँ।

‘विश्वशांति’ पाठ के आधार पर भारतीय दर्शन का मूल तत्त्व बतलाएँ। उत्तर⇒ भारतीय दर्शन का मूल तत्त्व शांति है। इसमें संदेह नहीं, क्योंकि धर्म का आधार भी शांति ही है। इसी भाव से विश्व की रक्षा तथा कल्याण संभव है इसलिए हमें जन जागरण द्वारा सहिष्णुता, परोपकार और निर्वेर के महत्त्व पर प्रकाश डालना चाहिए। हमसे … Read more

विश्व में शांति कैसे स्थापित हो सकती है ?

विश्व में शांति कैसे स्थापित हो सकती है ? उत्तर⇒ विश्व में शांति का आधार एकमात्र परोपकार है। परोपकार की भावना मानवीय गुण है । संकटकाल में सहयोग की भावना रखना ही लक्ष्य हो तभी हम निर्वेर, सहिष्णुता और परोपकार से शांति स्थापित कर सकते हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे … Read more

विश्व शांति के लिए हमें क्या करना चाहिए ?

विश्व शांति के लिए हमें क्या करना चाहिए ? उत्तर⇒ केवल उपदेश से विश्व शांति नहीं होगी। हमें उपदेशों के अनुसार आचरण करना होगा । हमलोग जानते हैं कि क्रिया के बिना, अर्थात व्यवहार के बिना ज्ञान भार-स्वरूप है । वैर कभी भी वैर से शांत नहीं होता। हमें निर्वैर दया, परोपकार, सहिष्णुता और मित्रता का … Read more