व्याख्या करें:
व्याख्या करें: “सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है; दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश में जनतंत्र की स्थापना की बात कही गयी है। साथ ही, जनता की शक्ति का बोध कराया गया है। कवि रामधारी … Read more