व्याख्या करें:

व्याख्या करें: “सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है; दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश में जनतंत्र की स्थापना की बात कही गयी है। साथ ही, जनता की शक्ति का बोध कराया गया है। कवि रामधारी … Read more

निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट करें

निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट करें ‘हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती साँसों के बल से ताज हवा में उड़ता है, जनता की रोके राह. समय में ताव कहाँ? वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुडता है।’ उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश में कवि रामधारी सिंह दिनकर ने जनता में निहित व्याप शक्ति को उजागर … Read more

दिनकर रचित ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का सारांश लिखें।

दिनकर रचित ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का सारांश लिखें। उत्तर :- ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता आधुनिक भारत में जनतंत्र के उदय की जयघोष है। समय का रथ सिंहासन की ओर बढ़ता आ रहा है। वह सिंहासनासीन अधिनायक से कहता है कि अब तुम सिंहासन का मोह त्याग दो। इसपर केवल जनता का अधिकार … Read more

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ?

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ? उत्तर :- ोक्त पंक्ति के माध्यम से कवि जनतारूपी देवता की बात करते हैं, क्योंकि कवि की दृष्टि में कर्म करता हुआ परिश्रमी व्यक्ति ही देवतास्वरूप है। मंदिरों-मठों में तो केवल मूर्तियाँ रहती हैं वास्तविक … Read more

कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन किस रूप में करता है ?

कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन किस रूप में करता है ? उत्तर :- कविता के आरंभ में कवि ने भारतीय जनता की सरल एवं विनीत छवि का वर्णन किया है। कवि ने कहा है कि जनता सहनशील होती है, जाडा-गर्मी सबको सहती है, दु:ख-सुख में एकसमान रहती है। मिट्टी की मूरत … Read more

कविता का मूल भाव क्या है ? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए ? अथवा, ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का भावार्थ लिखें।

कविता का मूल भाव क्या है ? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए ? अथवा, ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का भावार्थ लिखें। उत्तर :- प्रस्तुत कविता आधुनिक भारत में जनतंत्र के उदय का जयघोष है। सदियों की पराधीनता के बाद स्वतंत्रता-प्राप्ति हुई और भारत में जनतंत्र की प्राण-प्रतिष्ठा हुई । जनतंत्र के ऐतिहासिक और राजनीतिक अभिप्रायों … Read more

कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खींचता है ?

कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खींचता है ? उत्तर :- भारत की जनता सदियों से, युगों-युगों से राजा के अधीनस्थ रही है लेकिन कवि ने कहा है कि चिरकाल से अंधकार में रह रही जनता राजतंत्र को उखाड़ फेंकने के स्वप्न देख रही है। राजतंत्र समाप्त होगा और जनतंत्र कायम होगा। राजा … Read more

कवि के अनुसार किन लोगों की दृष्टि में जनता फूल या दुध मुँही बच्ची की तरह है और क्यों ? कवि क्या कहकर उनका प्रतिवाद करता है ?

कवि के अनुसार किन लोगों की दृष्टि में जनता फूल या दुध मुँही बच्ची की तरह है और क्यों ? कवि क्या कहकर उनका प्रतिवाद करता है ? उत्तर :- अंग्रेजी सरकार भी भारत की जनता को अबोध समझकर कुछ प्रलोभन देकर राजसुख में लिप्त है। वह समझती है कि जनता फूल या दुधमुंही बच्ची … Read more

कवि की दृष्टि में आज के देवता कौन हैं और वे कहाँ मिलेंगे ?

कवि की दृष्टि में आज के देवता कौन हैं और वे कहाँ मिलेंगे ? उत्तर :- कवि ने भारतीय प्रजा, जो खून-पसीना बहाकर देशहित का कार्य करती है, जिसके बल पर देश में सुख-संपदा स्थापित होता है, किसान, मजदूर जो स्वयं आहूत होकर देश को सुखी बनाते हैं, को आज का देवता कहा है। हमसे … Read more

दिनकर की दृष्टि में समय के रथ का घर्घर-नाद क्या है ? स्पष्ट करें।

दिनकर की दृष्टि में समय के रथ का घर्घर-नाद क्या है ? स्पष्ट करें। उत्तर :- कवि ने सदियों से राजतंत्र से शासित जनता की जागृति को उजागर करते हुए समय के चक्र की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। राजसिंहासन पर प्रजा आरूढ़ होने जा रही है। समय की पुकार ही क्रांति की … Read more