“अलसकथा’ का क्या संदेश है ?

“अलसकथा’ का क्या संदेश है ? उत्तर- अलसकथा का संदेश है कि आलस्य एक महान् रोग है। आलसी का सहायक प्रायः कोई भी नहीं होता । जीवन में विकास के लिए व्यक्ति का कर्मठ होना अत्यावश्यक है। आलस्य शरीर में रहनेवाला महान् शत्रु है जिससे अपना, परिवार का और समाज का विनाश अवश्य ही होता है। … Read more

“अलसकथा’ से क्या शिक्षा मिलती है ?

“अलसकथा’ से क्या शिक्षा मिलती है ? उत्तर- मैथिली कवि विद्यापति रचित “अलसकथा” में आलसियों के माध्यम से शिक्षा दी गयी है कि उनका भरण-पोषण करुणाशीलों के बिना संभव नहीं है। आलसी काम नहीं करते, ऐसी स्थिति में कोई दयावान् ही उनकी व्यवस्था कर सकता है। अतएव आत्मनिर्भर न होकर दूसरे पर वे निर्भर हो जाते … Read more

अलसकथा पाठ का पाँच वाक्यों में परिचय दें।

अलसकथा पाठ का पाँच वाक्यों में परिचय दें। उत्तर- यह पाठ विद्यापति द्वारा रचित पुरुषपरीक्षा नामक कथाग्रन्थ से संकलित एक उपदेशात्मक लघु कथा है। विद्यापति ने मैथिली, अवहट्ट तथा संस्कृत तीनों भाषाओं में ग्रन्थ-रचना की थी। पुरुषपरीक्षा में धर्म, अर्थ, काम इत्यादि विषयों से सम्बद्ध अनेक मनोरंजक कथाएँ दी गयी हैं। अलसकथा में आलस्य के निवारण … Read more

किनकी क्या-क्या गतियाँ हैं ? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट करें ।

किनकी क्या-क्या गतियाँ हैं ? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट करें । उत्तर- गति को यहाँ विशेष रूप से विश्लेषित किया गया है । स्त्री, पुरुष एवं बच्चों की गतियाँ अलग-अलग हैं। स्त्रियों की गति पति हैं, बच्चों की गति माँ है तथा आलसियों की गति कारुणिकता (दयालुता) है। अर्थात् स्त्रियों की जीवनभंगिमा उसके पति … Read more

अलसकथा का वर्णय विषय क्या है ?

अलसकथा का वर्णय विषय क्या है ? उत्तर- विद्यापति द्वारा रचित कथाग्रंथ ‘पुरुष परीक्षा’ नामक पुस्तक से लिया गया ‘अलसकथा’ मानव महत्व एवं दोषों के निराकरण की शिक्षा देता है। आलसियों को दान देने की इच्छा रखनेवाले बीरेश्वर ने यह जानने की उत्कंठा प्रकट की थी कि आलसी जीवन जीने की कला का कैसे निर्वहन करते … Read more

लेखक के विचार में प्राचीन काल से आज तक पाटलिपुत्र किस प्रकार का नगर रहा है ?

लेखक के विचार में प्राचीन काल से आज तक पाटलिपुत्र किस प्रकार का नगर रहा है ? उत्तर- लेखक के विचार से पाटलिपुत्र नगर प्राचीन काल से लेकर आज तक राजनैतिक, धार्मिक, औद्योगिक और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में वैभव धारण करता रहा है और यहाँ इनका संकलित रूप से दर्शन किया जा सकता है। यहाँ … Read more

प्राचीन पाटलिपुत्र में शिक्षा के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं ?

प्राचीन पाटलिपुत्र में शिक्षा के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं ? उत्तर- प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बताया है कि दामोदर नामक कवि से हमें जानकारी मिलती है कि सरस्वती के वंशज यहाँ रहते थे । राजशेखर कवि के अनुसार पाणिनी, पिंगल, वररूचि आदि महान विद्वानों की परीक्षा यहाँ ली जाती थी। इससे ज्ञात … Read more

लेखक ‘पाटलिपुत्र वैभवम्’ पाठ से हमें क्या संदेश देना चाहते हैं ?

लेखक ‘पाटलिपुत्र वैभवम्’ पाठ से हमें क्या संदेश देना चाहते हैं ? उत्तर- लेखक का कहना है कि प्राचीन काल में पाटलिपुत्र एक महान नगर था, जहाँ शिक्षा, वैभव और समृद्धि थी। मध्यकाल में इसकी स्थिति ठीक नहीं थी। मुगलकाल में इस नगर का पुनः उद्धार हुआ तथा अंग्रेजी के शासन काल से लेकर वर्तमान में … Read more

सिख संप्रदाय के लोगों के लिए पटना नगर क्यों महत्त्वपूर्ण है ?

सिख संप्रदाय के लोगों के लिए पटना नगर क्यों महत्त्वपूर्ण है ? उत्तर- सिख संप्रदाय के लोगों के लिए प्राचीन पटना नगर में पूजनीय स्थल अवस्थित है। यहाँ उनके दसवें गुरु गोंविद सिंहजी का जन्म-स्थान है। यह स्थल गुरुद्वारा के नाम से जाना जाता है । देश-विदेश से सिख संप्रदाय के अलावा अन्य संप्रदाय के तीर्थयात्री … Read more

पाटलिपुत्र के प्राचीन महोत्सव का वर्णन करें।

पाटलिपुत्र के प्राचीन महोत्सव का वर्णन करें। उत्तर- पाटलिपुत्र से शरतकाल में कौमुदी महोत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता था। सभी नगरवासी आनंदमग्न हो जाते थे। इस समारोह का विशेष प्रचलन गुप्तवंश के शासनकाल में था । आज़कल जिस तरह दुर्गापूजा मनाई जाती है, उसी प्रकार प्राचीनकाल में कौमुदी महोत्सव मनाया जाता था। हमसे जुड़ें, हमें … Read more