शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर कीजिए ।

शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर कीजिए । उत्तर— शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर—शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर  निम्नलिखित हैं— शिक्षण— (1) शिक्षण के द्वारा छात्रों के व्यवहार / आदतों में परिवर्तन लाया जाता है। अर्थात् ज्ञान का प्रसारण एवं विश्वास में परिवर्तन । (2) शिक्षण सैद्धान्तिक पक्षधर होता है। (3) शिक्षण से नवीन जानकारी के … Read more

ज्ञान प्राप्ति के स्रोत क्या हैं ?

ज्ञान प्राप्ति के स्रोत क्या हैं ? उत्तर— ज्ञान प्राप्ति के निम्नलिखित चार स्रोत हैं— (1) इन्द्रिय अनुभव (2) साक्ष्य (3) तर्क बुद्धि (4) अन्तः प्रज्ञा तथा अन्त प्रज्ञावादः । (1) इन्द्रिय अनुभव–मनुष्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ही संसार की वस्तुओं के सम्पर्क में आता है । जब कोई वस्तु हमारे सम्पर्क में आती है तो वह … Read more

ज्ञान क्या है ? ज्ञान की आवश्यक शर्तों को लिखिए।

ज्ञान क्या है ? ज्ञान की आवश्यक शर्तों को लिखिए। उत्तर— ज्ञान का आशय–ज्ञान है बाहरी विषयों का आत्मसात । यह व्यक्ति को स्थूलता से सूक्ष्मता की ओर ले जाता है। अर्थात् जहाँ इस प्रकार की मानसिकता पाई जाती है, उसे ज्ञान कहा जा सकता है और जहाँ यह नहीं है, वहाँ ज्ञान नहीं है। … Read more

ज्ञान और सूचना में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।

ज्ञान और सूचना में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।  उत्तर— ज्ञान और सूचना में अन्तर–ज्ञान और सूचना में निम्नलिखित अन्तर हैं— ज्ञान— (1) ज्ञान एक विस्तृत अवधारणा है । (2) ज्ञान के अन्तर्गत तथ्यों की जानकारी को अर्थपूर्ण स्तर तक जानना आवश्यक है । (3) ज्ञान मात्र आँकड़े या तथ्य नहीं है। (4) ज्ञान प्राप्ति के … Read more

शिक्षण से क्या अभिप्राय है ?

शिक्षण से क्या अभिप्राय है ? उत्तर— शिक्षण–शिक्षण के विषय में सैद्धान्तिक रूप से कहा जा सकता है कि यह किसी भी अध्यापक के लिए महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है। शिक्षण कार्य वास्तव में एक जटिल प्रक्रिया है। शिक्षण से बालक जहाँ कुछ सीखता है, वहीं बालक को आन्तरिक मनोभावनाओं का समझकर उनको शिक्षण कराना एक कठिन … Read more

ज्ञान की प्रकृति को स्पष्ट कीजिए।

ज्ञान की प्रकृति को स्पष्ट कीजिए। उत्तर— ज्ञान की प्रकृति–हमारा सम्पूर्ण ज्ञान अनुभवों से प्राप्त तथा अनुभवों पर ही आधारित है। विचार प्राप्त करने के मुख्य रूप साधन है इन्द्रियानुभव जिसमें इन्द्रियों की सहायता से मन ज्ञान से भरपूर होता है और उसका प्रतिबिम्ब या आन्तरिक इन्द्रियानुभव वह है जो स्वयं की क्रियाओं से विचारों … Read more

ज्ञान के निर्माण में शिक्षक की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

ज्ञान के निर्माण में शिक्षक की भूमिका को स्पष्ट कीजिए। उत्तर— ज्ञान के निर्माण में शिक्षक की भूमिका–औपचारिक अधिगम का सृष्टा अध्यापक है। यह विद्यालय का आधार है उसका आधार उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना बालक का विद्यालय में होना । शिक्षा का उद्देश्य बालक के व्यवहार में संशोधन करना है। उनका इस प्रकार विकास … Read more

पाठ्यक्रम तथा पाठ्यवस्तु में क्या अन्तर है ? विस्तार से समझाइये ।

पाठ्यक्रम तथा पाठ्यवस्तु में क्या अन्तर है ? विस्तार से समझाइये ।  उत्तर— पाठ्यक्रम तथा पाठ्यवस्तु (पाठ्यचर्या ) में अन्तर– वर्तमान समय में शिक्षा जगत् में पाठ्यक्रम के लिए ‘करीकुलम’ के साथ-साथ सिलेबस एवं कोर्स ऑफ स्टडी शब्दों का भी प्रयोग किया जाता है, परन्तु सूक्ष्मता से विवेचन करने पर इन तीनों शब्दों में स्पष्ट … Read more

प्रायोगिक ज्ञान किस प्रकार संकाय निर्माण में सहायक है ? उपयुक्त उदाहरण दीजिए एवं व्याख्या कीजिए।

प्रायोगिक ज्ञान किस प्रकार संकाय निर्माण में सहायक है ? उपयुक्त उदाहरण दीजिए एवं व्याख्या कीजिए। उत्तर— प्रयोगात्मक ज्ञान–विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम में प्रयोग तथा प्रयोगात्मक, ज्ञान का विशेष महत्त्व है। प्रयोगात्मक ज्ञान सदैव ही विषय की प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि इसे नियमों व सिद्धान्तों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाये तो … Read more

पाठ्यक्रम में एक विषय क्षेत्र को शामिल करने के मापदण्ड क्या हैं ?

पाठ्यक्रम में एक विषय क्षेत्र को शामिल करने के मापदण्ड क्या हैं ?  उत्तर— विषय-वस्तु के चयन के मापदंड–विषय वस्तु और उद्देश्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं और पाठ्यक्रम विकास का प्रमुख आयाम है | विषय-वस्तु से तात्पर्य — संकल्पनाओं तथ्यों का सार, अवधारणाएँ, सामान्यीकरण, सिद्धान्त और सिद्धान्तवादों से है । विषय-वस्तु से हमारा अभिप्राय विषय … Read more