चिन्तनशील अभ्यास की सीमाएँ लिखिए।

चिन्तनशील अभ्यास की सीमाएँ लिखिए। उत्तर— चिन्तनशील अभ्यास की सीमाएँ-चिन्तनशील अभ्यास की सीमाएँ निम्नलिखित हैं— (1) समस्त शिक्षक चिन्तनशील अभ्यास की प्रक्रिया को नहीं समझ सकते। (2) कतिपय शिक्षकों को यह क्रिया असहन तथा चुनौतीपूर्ण लग सकती है। (3) इसमें समयावधि अधिक लगती है। (4) असामन्जस्य की स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि किसी को … Read more

चिन्तनशील अभ्यास के लाभों का वर्णन कीजिए ।

चिन्तनशील अभ्यास के लाभों का वर्णन कीजिए ।  उत्तर— चिन्तनशील अभ्यास के लाभ-चिन्तनशील अभ्यास के लाभ निम्नलिखित हैं— (1) स्व अनुभवों और परिस्थितियों से सीखना । (2) सीखने के प्रति गहरी सोच को विकसित करने में सहायक। (3) स्वयं के बल को पहचानना एवं उनका विकास करना । (4) शैक्षिक आवश्यकताओं की पहचान करना। (5) … Read more

नकारात्मक स्वाभिमान के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए।

 नकारात्मक स्वाभिमान के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए। उत्तर- नकारात्मक स्वाभिमान के लक्षण- नकारात्मक स्वाभिमान के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं— (1) जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण (2) पूर्णतावादी प्रकृति (3) दूसरों के प्रति अविश्वास (4) दूसरों पर दोषारोपण (5) जोखिम उठाने का डर (6) दूसरों पर निर्भरता (7) उपहास का डर। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे … Read more

सकारात्मक स्वाभिमान के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए ।

सकारात्मक स्वाभिमान के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए । उत्तर—  सकारात्मक स्वाभिमान के लक्षण–सकारात्मक स्वाभिमान में निम्नलिखित तथ्य मुख्य भूमिका निभाते हैं— (1) विश्वास (2) स्व दिशा (3) व्यक्तिगत शक्ति के बारे में जागरूकता (4) अपनी गलतियों को स्वीकार करने की क्षमता (5)आशावाद (6) समस्याओं को हल करने की क्षमता (7) दूसरों पर भरोसा करने … Read more

स्वयं की पहचान के किन्हीं दो सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए ।

स्वयं की पहचान के किन्हीं दो सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए । उत्तर—  स्वयं की पहचान के सिद्धान्त-स्व- परिचय के निम्नलिखित सिद्धान्त हैं— (1) समाज परिचय सिद्धान्त – समाज हमारे मूल्यांकन एवं हमारे आत्म (स्व) पहचान को पारिभाषित करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम अपने समाज के सन्दर्भ के बिना स्व-पहचान को स्पष्ट नहीं … Read more

अध्यापक के लिए चिन्तनशील अभ्यास की आवश्यकता एवं महत्त्व को समझाइये ।

अध्यापक के लिए चिन्तनशील अभ्यास की आवश्यकता एवं महत्त्व को समझाइये । उत्तर— चिन्तनशील अभ्यास की आवश्यकता एवं महत्त्ववह व्यक्ति है जो छात्र को अन्धकार से ज्ञान के उजाले में ले जाने के लिए मार्गदर्शन करता है। एक शिक्षक अपनी छाप छात्रों पर अपने पढ़ाने के शब्दों से, व्यवहार शिक्षक स्वयं की क्रियाओं से छोड़ता … Read more

सत्यतापूर्ण आकांक्षाएँ एवं असत्यतापूर्ण आकांक्षाओं को समझाइये ।

सत्यतापूर्ण आकांक्षाएँ एवं असत्यतापूर्ण आकांक्षाओं को समझाइये । उत्तर— सत्यतापूर्ण आकांक्षाएँ– सत्यतापूर्ण आकांक्षाओं से तात्पर्य उन आकांक्षाओं से है जो कि हम पूर्ण करते हैं अथवा कर सकते हैं । यह आकांक्षाएँ हमारे जीवन से सम्बन्धित हैं। सत्यतापूर्ण आकांक्षाएँ प्राप्ति हेतु व्यक्ति अनेक प्रकार के प्रयास करते हैं। माना कि आप इंजीनियर बनना चाहते हैं … Read more

सकारात्मक एवं नकारात्मक आकांक्षाओं को समझाइये ।

सकारात्मक एवं नकारात्मक आकांक्षाओं को समझाइये । उत्तर— सकारात्मक विचार ही सफलता के द्योतक होते हैं। इसे ही सफलता की अद्वितीय पूँजी माना है। अतः अपने मस्तिष्क में सकारात्मक विचारों व आकांक्षाओं को जन्म देना अनिवार्य होता है। सकारात्मक आकांक्षाओं से ही व्यक्ति के अन्दर उत्साह का जन्म होता है तथा व्यक्ति की कार्यकुशलता उत्पन्न … Read more

भय की संवेगात्मक स्थिरता एवं अस्थिरता को समझाइए ।

भय की संवेगात्मक स्थिरता एवं अस्थिरता को समझाइए । उत्तर— भय की संवेगात्मक स्थिरता एवं अस्थिरता – ये व्यक्तित्व के कारक भयों को मन में समावेशित करने में अहम भूमिका निभाते हैं इनकी स्थिरता भयों को नियंत्रित करती है जबकि अस्थिरता भयों की स्थिति को बढ़ाती है। भावुकता नियंत्रण के गुण को बहुत कम कर … Read more

आकांक्षा की प्रकृति को लिखिये।

आकांक्षा की प्रकृति को लिखिये। उत्तर— आकांक्षा की प्रकृति-आकांक्षा की प्रकृति को निम्नलिखित प्रकार से वर्णित किया जा सकता है— (1) आकांक्षा को मूल्य की पूर्व अवस्था कहा जा सकता है। (2) कार्यरूप में आने से पूर्व व्यवहार सिद्धान्त रूप में छिपा रहता है। (3) समाज की स्वीकृति प्राप्त होने पर आकांक्षाएँ मूल्यों का स्वरूप … Read more