सूचना का क्या अभिप्राय है ? इसकी विशेषताएँ समझाइये । ज्ञान तथा सूचना के सम्बन्ध का वर्णन कीजिए । अथवा ज्ञान तथा सूचना के संबंध का वर्णन कीजिए।

सूचना का क्या अभिप्राय है ? इसकी विशेषताएँ समझाइये । ज्ञान तथा सूचना के सम्बन्ध का वर्णन कीजिए । अथवा ज्ञान तथा सूचना के संबंध का वर्णन कीजिए। उत्तर – सूचना का अभिप्राय–सूचना से हमारा तात्पर्य एक ऐसे ज्ञान से है जो किसी विशेष तथ्य विषय या घटना से सम्बन्धित हो साथ ही वह सम्प्रेषणीय … Read more

अनुशासनात्मक ज्ञान का अर्थ एवं संकल्पना की स्पष्ट कीजिए |

अनुशासनात्मक ज्ञान का अर्थ एवं संकल्पना की स्पष्ट कीजिए | उत्तर — अनुशासनात्मक ज्ञान शीर्षक का अध्ययन करने से पूर्व, हमें Disciplinary शब्द पर हमारा ध्यान केन्द्रित करना चाहिये। सामान्यतया “Discipline” से तात्पर्य “वह अभ्यास या प्रशिक्षाम है जिससे हम मानवों को नियमों और कानूनों का अनुसरण करना सिखात हैं, इसमें दण्ड भी शामिल है।” … Read more

सकारात्मकता के प्रकार बताइये।

सकारात्मकता के प्रकार बताइये। उत्तर – सकारात्मकता के निम्न चार प्रकार हैं— (1) तार्किक—यह दर्शन की वह पाठशाला है जो सकारात्मकता से उत्पन्न हुआ और परीक्षा एवं अनुभव के साथ होकर इसका वर्णन बुद्धिमतापूर्ण हुआ हो अर्थात् वह ज्ञान जो अवलोकन पर आधारित न होकर घटक पर आधारित होता है। (2) राजनैतिक—इसका नाम व विचार … Read more

चिंतनशील अनुशासन पर टिप्पणी लिखिये |

चिंतनशील अनुशासन पर टिप्पणी लिखिये | उत्तर – चिंतनशील अनुशासन — यह व्यवस्थित रूप से वस्तु के बारे में जानने व उससे सम्बन्धित खोज करने का प्रयत्न करता है। इस अनुशासन का सम्बन्ध वस्तु की वास्तविकता तथा उसकी अमूर्त चिंतनशीलता से होता है। अर्थात् यह अनुशासन पूर्णता, क्रम व अनुभवों के मध्य श्रृंखला को खोजने … Read more

भारतीय समाज की प्रकृति या विशेषताएँ बताइये ।

भारतीय समाज की प्रकृति या विशेषताएँ बताइये । उत्तर- भारतीय समाज की प्रकृति या विशेषताएँ निम्नलिखित है— (1) अमूर्त समाज – जिस तरह जीवन कोई चीज नहीं बल्कि जैविक प्रक्रिया है उसी तरह समाज एक चीज नहीं बल्कि संगति या मेल की एक प्रक्रिया है। (2) समरूप और भिन्न समाज–समाज का हर सदस्य एकसा नहीं … Read more

समाज को परिभाषित कीजिए।

समाज को परिभाषित कीजिए। उत्तर  — समाज की परिभाषा— लेपियर के अनुसार “समाज शब्द लोगों के समूह 1 नहीं बल्कि उनके मध्य और उनमें होने वाली अंतर्क्रियाओं के मिश्रित स्वरूप की व्यवस्थाओं का संदर्भ देता है। “ मोरिस जिन्सबर्ग के अनुसार “समाज संबंधों या व्यवहार के ढंग से एक व्यक्ति का समूह है। यह उन … Read more

ज्ञान के स्रोत के रूप में समाज की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

ज्ञान के स्रोत के रूप में समाज की भूमिका स्पष्ट कीजिए। उत्तर– ज्ञान के स्रोत के रूप में समाज की भूमिका– मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। परिवार के सदस्य होने के अतिरिक्त बाह्य संसार के लोगों के साथ मिलता-जुलता, अपने अनुभव बाँटता है। सभी कानून, दिशा-निर्देश, विधान समाज में रहने वाले उसके सदस्यों के लिए … Read more

वैश्विक ज्ञान के निर्माण की प्रक्रिया को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए ।

वैश्विक ज्ञान के निर्माण की प्रक्रिया को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए । उत्तर – वैश्विक ज्ञान के निर्माण की प्रक्रिया — वैश्विक ज्ञान सार्वभौमिक ज्ञान का आधार है इसलिए इसका प्रयोग प्रत्येक परिस्थिति में किया जा सकता है। इसकी विश्वसनीयता स्थानीय ज्ञान की तुलना में अधिक होती है। इसके निर्माण प्रक्रिया पाँच चरणों में सम्पन्न … Read more

आधुनिक ज्ञान का स्थानीय ज्ञान पर प्रभाव बताइये ।

आधुनिक ज्ञान का स्थानीय ज्ञान पर प्रभाव बताइये ।  उत्तर–आधुनिक ज्ञान का स्थानीय ज्ञान पर प्रभाव– आधुनिक ज्ञान के परिणामस्वरूप, कई स्थानीय ज्ञान लुप्तप्राय हो रहे हैं। आधुनिक शोधों, अन्वेषणों एवं आविष्कारों के कारण कई स्थानीय ज्ञान अपना अस्तित्व खो रहे हैं। आधुनिक ज्ञान का तकनीकी प्रगति, स्थानीय ज्ञान के स्वरूप व महत्त्व पर निम्नलिखित … Read more

विद्यालय में प्रदत्त किए जाने वाले ज्ञान की विशेषताएँ लिखिये ।

विद्यालय में प्रदत्त किए जाने वाले ज्ञान की विशेषताएँ लिखिये ।  उत्तर- विद्यालय में प्रदत्त ज्ञान की विशेषताएँ निम्न हैं (1) ज्ञान व्यक्ति के अवकाश के समय का सदुपयोग करता है। (2) विज्ञान की सम्पूर्ण खोज ज्ञान का ही परिणाम है। इसी से मनुष्य प्रकृति व तकनीकी पर नियंत्रण पा सकता है। (3)ज्ञान से छात्र … Read more