टाना भगत आंदोलन (Tana Bhagat Movement)

टाना भगत आंदोलन (Tana Bhagat Movement) यह आंदोलन बिरसा आंदोलन से ही जनमा था। यह भी एक बहुआयामी आंदोलन था, क्योंकि इसके नायक भी अपनी सामाजिक अस्मिता, धार्मिक परंपरा और मानवीय अधिकारों के मुद्दों को लेकर आगे आए थे। यह आंदोलन सन् 1914 में शुरू हुआ। टाना भगत कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि उराँव जनजाति की एक शाखा थी, जिसने … Read more

बिरसा मुंडा आंदोलन (Birsa Munda Movement)

बिरसा मुंडा आंदोलन (Birsa Munda Movement) यह आंदोलन बिहार के जनजातीय क्षेत्रों में सबसे अधिक संगठित और व्यापक माना जाता रहा है। इस आंदोलन के नायक बिरसा मुंडा को भगवान के अवतार रूप में मान्यता मिली है। मुंडा जनजाति भी अन्य जनजातियों की तरह कृषि और वनों पर निर्भर होकर अपनी परंपराओं-मान्यताओं को सहेज रही थी। यह जनजाति छोटानागपुर … Read more

तिलका आंदोलन : (1784-1785 ई.) : Tilka Rebellion (1784-1785)

तिलका आंदोलन : (1784-1785 ई.) : Tilka Rebellion (1784-1785) Tilka Rebellion (1784-1785) | तिलका आंदोलन : (1784-1785 ई.) विद्रोह  के कारण : वर्ष 1784 ई. में तिलका मांझी ने अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन आरंभ किया, जिसे ‘तिलका आंदोलन’ के नाम से जाना गया। यह आंदोलन अपनी जमीन पर अधिकार के लिए, पड़हियों/पहाड़ियों को अधिक सुविधा … Read more

संथाल विद्रोह (Santhal Rebellion)

संथाल विद्रोह (Santhal Rebellion) वीरभूम, ढालभूम, सिंहभूम, मानभूम और बाकुड़ा के जमींदारों द्वारा सताए गए संथाल 1790 ई. से ही संथाल परगना क्षेत्र, जिसे दामिन-ए-कोह कहा जाता था, में आकर बसने लगे। इन्हीं संथालों द्वारा किया गया यह विद्रोह झारखंड के इतिहास में सबसे अधिक चर्चित हुआ, क्योंकि इसने कंपनी और उसके समर्थित जमींदारों, सेवकों और अधिकारियों … Read more

भूमिज विद्रोह (Bhumij or Land Revolt)

भूमिज विद्रोह (Bhumij or Land Revolt) भूमिज विद्रोह को गंगानारायण हंगामा (Ganga Narayan Hangama) भी कहा जाता है। यह विद्रोह जनजातीय जमींदारों और जनजातीय लोगों का संयुक्त विद्रोह था, जिसकी अगुआई बड़ाभूम के राजा बेलाक नारायण के पोते गंगानारायण ने की थी। भूमिज विद्रोह (1832-33 ई.) विद्रोह  के कारण एवं स्वरुप : ढालभूम, बड़ाभूम और पाटकुम परगना, जो … Read more

कोल विद्रोह (Kol Rebellion)

कोल विद्रोह (Kol Rebellion) कैथबर्ट ने कहा है, “इन जमींदारों ने किसानों पर इतने अत्याचार किए कि गाँव-के-गाँव उजड़ गए। इस सामंती व्यवस्था में जमींदार शायद ही किसानों के हित की कोई बात सोचता हो और प्रशासनिक वर्ग अलग से इनका खून चूस रहा था। फलत: आबादी का हस हो रहा था और लोग बस किसी … Read more

खरवार आंदोलन (Kharvar Movement)

खरवार आंदोलन (Kharvar Movement) खरवार आंदोलन (Kharvar Movement) खरवार आंदोलन, जिसका नेतृत्व भागीरथ माँझी ने किया था, का उद्देश्य प्राचीन मूल्यों और जनजातीय परंपराओं को पुनः स्थापित करना था। इस आंदोलन का प्रभाव क्षेत्र संथाल परगना था। इसके साथ ही वे भूमि संबंधी समस्याओं में सुधार के अलावा सामजिक कर्मों में शुद्धि के प्रवर्तक भी थे। इसीलिए मदिरा … Read more

सरदारी आंदोलन (Sardari Movement)

सरदारी आंदोलन (Sardari Movement) सरदारी आंदोलन (Sardari Movement) 1850 ई. और उसके बाद बिहार क्षेत्र में अनेक आदिवासियों द्वारा ईसाई धर्म अपना लेने से भूमि की समस्या और बदतर हो गई। ईसाई धर्म के व्यापक प्रचार-प्रसार के विरुद्ध जनजातीय सुधारवादी आंदोलन चले। इन्हीं में सरदारी आंदोलन सन् 1859 से 1881 के मध्य चला। इसका उल्लेख एस.सी. राय ने अपनी … Read more

‘हो’ विद्रोह, सरदारी आंदोलन और खरवार आंदोलन

‘हो’ विद्रोह, सरदारी आंदोलन और खरवार आंदोलन ‘हो’ विद्रोह (‘Ho’ Rebellion) यह विद्रोह सन् 1821-22 छोटानागपुर के ‘हो’ लोगों ने सिंहभूम के राजा जगन्नाथ सिंह के विरुद्ध किया। जगन्नाथ सिंह के प्रति ‘हो’ लोग तटस्थ थे और इनका किसी से भी कोई झगड़ा नहीं था। नागवंश के राजा ने इन पर एक-दो बार आक्रमण किया था, … Read more

चेरो विद्रोह (Chero Revolt)

चेरो विद्रोह (Chero Revolt) चेरो विद्रोह (Chero Revolt) यह आंदोलन सन् 1800 में चेरो किसानों ने अपने राजा के विरुद्ध शुरू किया। यह विद्रोह तब अंग्रेजों की पक्षपातपूर्ण नीति के विरोध में हुआ, जब कंपनी ने कूटनीति से जयनाथ सिंह को अपदस्थ कर दिया और उसके स्थान पर गोपाल राय को राजा बना दिया। कुछ समय बाद गोपाल … Read more