छायाएँ दिशाहीन सब ओर क्यों पड़ती हैं ? स्पष्ट करें।

छायाएँ दिशाहीन सब ओर क्यों पड़ती हैं ? स्पष्ट करें। उत्तर :- सूर्य के उगने से जो भी बिम्ब-प्रतिबिम्ब या छाया का निर्माण होता है वे सभी निश्चित दिशा में लेकिन बम-विस्फोट से निकले हुए प्रकाश से जो छायाएँ बनती हैं वे दिशाहीन होती हैं। क्योंकि, आण्विक शक्ति से निकले हुए प्रकाश सम्पूर्ण दिशाओं में … Read more

प्रज्वलित क्षण की दोपहरी से कवि का आशय क्या है ?

प्रज्वलित क्षण की दोपहरी से कवि का आशय क्या है ? उत्तर :- हिरोशिमा में जब बम का प्रहार हुआ तो प्रचण्ड गोलों से तेज प्रकास निकला और वह चतुर्दिक फैल गया । इस अप्रत्याशित प्रहार से हिरोशिमा के लोग हतप्रभ रह गये । उन्हें ऐसा लगा कि धीरे-धीरे आनेवाला दोपहर आज एक क्षण में … Read more

मनुष्य की छायाएँ कहाँ और क्यों पड़ी हुई हैं ?

मनुष्य की छायाएँ कहाँ और क्यों पड़ी हुई हैं ? उत्तर :- मनुष्य की छायाएँ हिरोशिमा की धरती पर सब ओर दिशाहीन होकर पड़ी हुई हैं। जहाँ-तहाँ घर की दीवारों पर मनुष्य छायाएँ मिलती हैं। टूटी-फूटी सड़कों से लेकर पत्थरों पर छायाएँ प्राप्त होती हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे … Read more

कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला सूरज क्या है? वह कैसे निकलता है ?

कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला सूरज क्या है? वह कैसे निकलता है ? उत्तर :- कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला सूरज आण्विक बम का प्रचण्ड गोला है। ऐसा प्रतीत होता है कि वह क्षितिज से न निकलकर धरती फाड़कर निकलता है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे … Read more

हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है ?

हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है ? उत्तर :- आज भी हिरोशिमा में साक्षी के रूप में अर्थात् प्रमाण के रूप में जहाँ-तहाँ जले हुए पत्थर, दीवारें पड़ी हुई हैं। यहाँ तक कि पत्थरों पर, टूटी-फूटी सड़कों पर, घर की दीवारों पर लाश के निशान छाया के रूप में साक्षी हैं। … Read more

व्याख्या करें:

व्याख्या करें: “सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है; दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश में जनतंत्र की स्थापना की बात कही गयी है। साथ ही, जनता की शक्ति का बोध कराया गया है। कवि रामधारी … Read more

निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट करें

निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट करें ‘हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती साँसों के बल से ताज हवा में उड़ता है, जनता की रोके राह. समय में ताव कहाँ? वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुडता है।’ उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश में कवि रामधारी सिंह दिनकर ने जनता में निहित व्याप शक्ति को उजागर … Read more

दिनकर रचित ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का सारांश लिखें।

दिनकर रचित ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का सारांश लिखें। उत्तर :- ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता आधुनिक भारत में जनतंत्र के उदय की जयघोष है। समय का रथ सिंहासन की ओर बढ़ता आ रहा है। वह सिंहासनासीन अधिनायक से कहता है कि अब तुम सिंहासन का मोह त्याग दो। इसपर केवल जनता का अधिकार … Read more

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ?

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ? उत्तर :- ोक्त पंक्ति के माध्यम से कवि जनतारूपी देवता की बात करते हैं, क्योंकि कवि की दृष्टि में कर्म करता हुआ परिश्रमी व्यक्ति ही देवतास्वरूप है। मंदिरों-मठों में तो केवल मूर्तियाँ रहती हैं वास्तविक … Read more

कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन किस रूप में करता है ?

कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन किस रूप में करता है ? उत्तर :- कविता के आरंभ में कवि ने भारतीय जनता की सरल एवं विनीत छवि का वर्णन किया है। कवि ने कहा है कि जनता सहनशील होती है, जाडा-गर्मी सबको सहती है, दु:ख-सुख में एकसमान रहती है। मिट्टी की मूरत … Read more