वन का पर्यावरणीय महत्त्व का वर्णन कीजिए।

वन का पर्यावरणीय महत्त्व का वर्णन कीजिए। उत्तर ⇒ वन प्रकृति का अनुपम उपहार है, जिसके आँचल में मानव आदिकाल से पोषित होता रहा है। वन जलवायु का सच्चा मानक है। एक तरफ वन की भूमि जल का अवशोषण कर बाढ के खतरे को रोकती है तो दूसरी तरफ अच्छा वषा भी कराती है। यह वन्य … Read more

चिपको आंदोलन का वर्णन करें।

चिपको आंदोलन का वर्णन करें। उत्तर ⇒ सुन्दर लाल बहुगुणा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के टेहरी-गढ़वाल पर्वतीय जिलों में अनपढ़ जनजातियों द्वारा सन् 1972 ई० में यह आन्दोलन चलाया गया था। इस आन्दोलन में स्थानीय लोग हरे-भरे पेड़-पौधों को कटने से बचाने के लिए अपने आगोश में घेर कर इसकी रक्षा करते थे।

समोच्च कृषि से आप क्या समझते हैं ?

समोच्च कृषि से आप क्या समझते हैं ? उत्तर ⇒ जब पर्वतीय क्षेत्रों या ढलानों पर वृत्ताकार रूप में खेत की जुताई कर कृषि कार्य किया जाता है तो उसकी आकृति समोच्च रेखा की तरह दिखाई पड़ती है। इस प्रकार से खेतों के पोषणीय तत्त्व जलों के साथ नहीं बहते हैं। मृदा की उर्वरता बनी रहती … Read more

फसल चक्रण मृदा संरक्षण में किस प्रकार सहायक है ?

फसल चक्रण मृदा संरक्षण में किस प्रकार सहायक है ? उत्तर ⇒ फसल चक्रण द्वारा मृदा के पोषण स्तर को बरकरार रखा जा सकता है। गेहूँ, चावल, मक्का, आलू आदि के लगातार उगाने से मृदा के पोषक तत्त्व में कमी हो जाती है। इसे तिलहन एवं दलहन की खेती से पुनः प्राप्त किया जा सकता है। … Read more

मृदा संरक्षण के कोई प्रभावी उपाय बताएँ।

मृदा संरक्षण के कोई प्रभावी उपाय बताएँ। उत्तर ⇒ मृदा संरक्षण के प्रभावी उपाय निम्नलिखित हैं – (i) फसल-चक्रण पद्धति अपनाकर मृदा के पोषनीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है। (ii) रासायनिक उर्वरक की जगह जैविक व कंपोस्ट खाद का उपयोग करके मृदा संरक्षण किया जा सकता है।

खादर और बांगर मिट्टी में अन्तर स्पष्ट करें।

खादर और बांगर मिट्टी में अन्तर स्पष्ट करें। उत्तर ⇒  खादर मिट्टी –     बांगर मिट्टी – (i) नवीन एवं उपजाऊ मिट्टी को खादर कहा जाता है। (i) पुरानी जलोढ़ मिट्टी को बांगर कहा जाता है। (ii) खादर मिट्टी में बाढ़ का प्रभाव होता है (ii) बांगर मिट्टी में बाढ़ का प्रभाव नहीं होता है। (iii) उत्तरी बिहार एवं गंगा का … Read more

मृदा-निर्माण के मुख्य घटक कौन-कौन से हैं ?

मृदा-निर्माण के मुख्य घटक कौन-कौन से हैं ? उत्तर ⇒ मृदा-निर्माण के पाँच मुख्य घटक हैं – (i) स्थानीय जलवायु, (ii) पूर्ववर्ती चट्टानें एवं खनिज कण, (iii) वनस्पति एवं जीव, (iv) भू-आकृतियाँ एवं ऊँचाई तथा (v) मृदा निर्माण में लगा समय।

जलोढ़ मृदा के विस्तार वाले राज्यों का नाम बतावें। इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें लगायी जा सकती हैं ?

जलोढ़ मृदा के विस्तार वाले राज्यों का नाम बतावें। इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें लगायी जा सकती हैं ? उत्तर ⇒ जलोढ़- मृदा के विस्तार वाले राज्य हैं उत्तरप्रदेश, बिहार, पंजाब, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा असम। इस मृदा में गन्ना, चावल, मक्का, दलहन जैसी फसलें उगाई जा सकती हैं।

भू-क्षरण किसे कहते है ?

भू-क्षरण किसे कहते है ? उत्तर ⇒ मृदा का अपने स्थान से विविध क्रियाओं द्वारा स्थानान्तरित होना क्षरण कहलाता है। यह भू-क्षरण कई प्राकृतिक कारकों यथा-गतिशील जल, 147, हिमानी तथा सामद्रिक लहरों द्वारा नियंत्रित तथा प्रभावित होती है।

जलोढ़ मृदा से क्या समझते हैं ? इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें उगाई जा सकती है ?

जलोढ़ मृदा से क्या समझते हैं ? इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें उगाई जा सकती है ? उत्तर ⇒ वैसी मिट्टी जिसका निर्माण नदियों द्वारा लाए गये तलछट के निक्षेप से होता है, जलोढ़ मृदा कहलाती है। इस मिट्टी में पोटाश एवं चूने की अधिकता होती है तथा नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की कमी होती है। … Read more