तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?

तारे क्यों टिमटिमाते हैं ? उत्तर⇒तारों के प्रकाश के वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण ही तारे टिमटिमाते प्रतीत होते हैं। पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के पृष्ठ पर पहुँचने तक तारे का प्रकाश निरन्तर ‘अपवर्तित होता रहता है। वायुमंडलीय अपवर्तन उसी माध्यम में होता है जिसका क्रमिक परिवर्ती अपवर्तनांक हो । क्योंकि वायुमण्डल … Read more

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण से आप क्या समझते हैं? इन्द्रधनुष की व्याख्या करें।

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण से आप क्या समझते हैं? इन्द्रधनुष की व्याख्या करें। उत्तर⇒जब श्वेत प्रकाश को किसी प्रिज्म से होकर गुजारा जाता है तो यह सात रंगों में विभक्त हो जाता है। इसे वर्ण विक्षेपण कहा जाता है। ये सात रंग “बैनीआहपीनाला” से सचित होते हैं। वर्ण विक्षेपण जब आकाश में पानी के लटके … Read more

स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है ?

स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है ? उत्तर⇒ वायुमंडल में वायु के अणु तथा अन्य सूक्ष्म कणों का साइज दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य के प्रकाश की अपेक्षा नीले वर्ण की ओर के कम तरंगदैर्घ्य को प्रकीर्णित करने में अधिक प्रभावी है। लाल वर्ण के प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले प्रकाश की अपेक्षा लगभग 1.8 … Read more

अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त से क्या समझते हैं ?

अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त से क्या समझते हैं ? उत्तर⇒ वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य हमें वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पूर्व दिखाई देने लगता है का वास्तविक सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट पश्चात् तक दिखाई देता रहता है। वास्तविक सूर्योदय से अर्थ है, सूर्य द्वारा वास्तव में क्षितिज को पार करना। सूर्य की … Read more

पानी के अंदर आधी डूबी हुई पेन्सिल या काँच की छड़ टेढ़ी । मालूम पड़ती है। स्वच्छ चित्र द्वारा समझावें।

पानी के अंदर आधी डूबी हुई पेन्सिल या काँच की छड़ टेढ़ी । मालूम पड़ती है। स्वच्छ चित्र द्वारा समझावें। उत्तर⇒ पानी में अंशतः डूबी हई पेन्सिल अथवा काँच की छड़ टेढ़ी प्रतात हाता है। यह परिघटना प्रकाश किरणों के अपवर्तन के कारण होता है। प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर चलती हैं और यह अभिलंब से दूर हट जाती है। दर्शक P बिंदु की स्थिति P‘ पर देखना है। अत: पेन्सिल के नीचे का छोर थोड़ा ऊपर उठा हुआ तथा पेंसिल अपवर्तक सतह पर थोड़ा टेढ़ा दीखता है। 

पानी में रखा सिक्का उठा हुआ मालूम पड़ता है। क्यों ?

पानी में रखा सिक्का उठा हुआ मालूम पड़ता है। क्यों ? उत्तर⇒ पानी के अन्दर रखा हुआ सिक्का कुछ ऊपर उठा हुआ मालूम पड़ता है। यह परिघटना प्रकाश के अपवर्तन के कारण होता है। पानी के अंदर बरतन में सिवका की स्थिति P पर है। PA और PB दो आपतित किरणें निकलती हैं। A और B से ये किरणें ज्योंहि वाय माध्यम में अपवर्तित होती है वे अभिलंब से दूर हट जाती हैं। क्योंकि पानी, वायु की अपेक्षा सधन माध्यम है। ये दोनों झुकी किरणें आँख पर P बिंद का आभासी प्रतिबिंब p‘ पर देखता है। ऐसा प्रतीत होता है कि पानी में सिक्का की वास्तविक स्थिति p‘ पर है लेकिन p‘ पर सिक्का का आभासी स्थिति है जो P से ऊपर है। अतः पानी में रखा गया सिक्का देखने पर कुछ उठा हुआ मालूम पड़ता है।

किरण-आरेख से दिखावें कि पानी की गहराई किसी बाल्टी में वास्तविक गहराई से कम है।

किरण-आरेख से दिखावें कि पानी की गहराई किसी बाल्टी में वास्तविक गहराई से कम है। उत्तर⇒ बाल्टी में पानी लिया जाता है। पेंदे के किसी बिंदु P से निकलने वाले किरण PB और PC क्रमशः वायु में निकलने पर अभिलंब से दूर विचलित हो जाता है। दर्शक प्रकाश की किरणों को P‘ से निकलते हुए देखता है और बाल्टी का पेंदा उठा मालम पड़ता है। यह घटना अपवर्तन के कारण होता है। अतः पानी से भरी बाल्टी की मल–गहराई कम प्रतीत होती है, जिसे बाल्टी को आभासी गहराई के रूप में देख पाते हैं।

अपवर्तनांक से क्या समझते हैं ?

अपवर्तनांक से क्या समझते हैं ? उत्तर⇒ अपवर्तनांक को एक महत्त्वपूर्ण भौतिक राशि, विभिन्न माध्यमों में प्रकाश के संचरण की आपेक्षिक चाल से सम्बद्ध किया जा सकता है। विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल भिन्न–भिन्न होती है। हल्के (विरल) माध्यम में प्रकाश की चाल सघन माध्यम की अपेक्षा अधिक होती है। अगर माध्यम 1 से माध्यम 2 में प्रकाश किरणें प्रवेश कर रही हैं तो मान लिया कि माध्यम 1 में प्रकाश की चाल , तथा माध्यम 2 में प्रकाश की चाल V, है। माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक, माध्यम 1 में प्रकाश की चाल तथा माध्यम 2 में प्रकाश की चाल के अनुपात द्वारा व्यक्त करते हैं।  

आवर्धन से क्या समझते हैं ?

आवर्धन से क्या समझते हैं ? उत्तर⇒ गोलीय दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन वह आपेक्षिक विस्तार है जिससे ज्ञात होता है कि कोई प्रतिबिंब बिम्ब की अपेक्षा कितना गुना आवर्धित है। इसे प्रतिबिंब की ऊँचाई के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है। यदि ॥ बिम्ब की ऊँचाई हो तथा ‘ प्रतिबिंब की ऊँचाई हो तो गोलीय दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन (m) प्राप्त होगा।   इस बात पर ध्यान रखा जाता है कि बिम्ब की ऊँचाई धनात्मक ली जाती है क्योंकि बिम्ब को मुख्य फोकस अक्ष के ऊपर रखा जाता है । आभासी प्रतिबिंबों के लिए प्रतिबिंब की ऊँचाई भी धनात्मक होती है जबकि वास्तविक प्रतिबिंबों के लिए प्रतिबिंब ऊँचाई ऋणात्मक चिह्न से ज्ञात किया जाता है । आवर्धन के मान में ऋणात्मक चिह्न से ज्ञात होता है कि प्रतिबिंब वास्तविक है और आवर्धन के मान में धनात्मक चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब आभासी है।