दही वाली मंगग्मा कहानी का सन्देश अस्पष्ट करें।

दही वाली मंगग्मा कहानी का सन्देश अस्पष्ट करें। उत्तर-यह कहानी आधुनिक बहुओं को सन्देश देती है कि वे आवेश देखकर सभी सदस्यों को मिलाकर रखें। इसके लिए बुद्धि का प्रयोग करना ‘नंजम्मा’ के चरित्र से सीखें। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Facebook पर फॉलो करे – Click Here Facebook ग्रुप ज्वाइन … Read more

कथावाचक ने सास और बहु की उपमा किस-किससे दी ?

कथावाचक ने सास और बहु की उपमा किस-किससे दी ? उत्तर- कथावाचक ने पानी में खड़े बच्चे का पाँव खींचनेवाले मगरमच्छ से बहु को और ऊपर से बाँह पकड़कर बचनेवाला रक्षक की उपमा सास को दी है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Facebook पर फॉलो करे – Click Here Facebook ग्रुप … Read more

रंगप्पा कौन था ? और वह मंगमा से क्या चाहता था ?

रंगप्पा कौन था ? और वह मंगमा से क्या चाहता था ? उत्तर- रंगप्पा गाँव का लंपट और जुआड़ी था । वह मंगग्मा से धन चाहता था । इतना ही नहीं वह मंगग्मा के अनाथ समझकर उसकी इजत भी लूटना  चाहत था ! हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Facebook पर फॉलो … Read more

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए।

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए। उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कहा गया है कि बिना भक्त के भगवान भी एकाकी. और निरुपाय हैं। उनकी भगवत्ता भी भक्त की सत्ता पर ही निर्भर करती है। व्यक्ति और विराट सत्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। भगवान जल हैं तो … Read more

आशय स्पष्ट कीजिए :

आशय स्पष्ट कीजिए : “मैं तुम्हारा वेश हूँ, तुम्हारी वृत्ति हूँ मुझे खोकर तुम अपना अर्थ खो बैठोगे ?” उत्तर :- प्रस्तत पद्यांश में कवि ने भक्त को भगवान की अस्मिता माना है। भगवान का वास्तविक स्वरूप भक्त में है। भक्त भगवान का सबकुछ है। भगवान का रूप, वेश, रंग, कार्य सब भक्त में निहित … Read more

कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।

कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें। उत्तर :- भक्त कवि रिल्के अपने प्रभु से करता है-प्रभु, जब मेरा अस्तित्व ही नहीं रहेगा, तब तुम क्या करोगे? मैं ही तुम्हारा जलपात्र हूँ, मैं ही तुम्हारी मदिरा हूँ। जब जलपात्र टूटकर बिखर जाएगा और मदिरा सूख … Read more

कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है ? आप क्या सोचते हैं ?

कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है ? आप क्या सोचते हैं ? उत्तर :- कविता में कवि भक्त के रूप में भगवान को सम्बोधित करता है । इसमें भक्त अपने को भगवान का आश्रय, गृह स्वीकारता है। अपने में भगवान की छवि को देखता है और कहता है कि हे भगवान ! मैं भी तुम्हारे … Read more

मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए।

मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- इस कविता में कहा गया है कि मानव के अस्तित्व में ही ईश्वर का अस्तित्व है। मानवीय जीवन में ईश्वरीय अंश होता है। परमात्मा की अदृश्यतां को जीवात्मा दृश्य करता है । ईश्वर की झलक … Read more

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए।

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए। उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कहा गया है कि बिना भक्त के भगवान भी एकाकी और निरुपाय हैं। उनकी भगवत्ता भी भक्त की सत्ता पर ही निर्भर करती है। व्यक्ति और विराट सत्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो … Read more

कवि को किस बात की आशंका है ? स्पष्ट कीजिए।

कवि को किस बात की आशंका है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- कवि को आशंका है कि जब ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करानेवाला प्रतीक आधार या भक्त नहीं होगा तब ईश्वर का पहचान किस रूप में होगा? प्राकृतिक छवि, मानव की हृदय का प्रेम, दया, भगवद् स्वरूप है। ये सब नहीं होगा, तब उस परमात्मा … Read more