दानवीर कर्ण ने इन्द्र को दान में क्या दिया ? तीन वाक्यों में उत्तर दें।

दानवीर कर्ण ने इन्द्र को दान में क्या दिया ? तीन वाक्यों में उत्तर दें। उत्तर⇒ दानवीर कर्ण ने इन्द्र को अपना कवच और कुण्डल दान में दिया । कर्ण को ज्ञात था कि यह कवच और कुण्डल उसका प्राण-रक्षक है लेकिन दानी स्वभाव होने के कारण उसने इन्द्ररूपी याचक को खाली लौटने नहीं दिया । … Read more

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ के नाटककार कौन हैं ? कर्ण किनका पत्र था तथा उन्होंने इन्द्र को दान में क्या दिया ?

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ के नाटककार कौन हैं ? कर्ण किनका पत्र था तथा उन्होंने इन्द्र को दान में क्या दिया ? उत्तर⇒ ‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ के नाटककार ‘भास’ हैं। कर्ण कुन्ती का पुत्र था तथा उन्होंने इन्द्र को दान में अपना कवच और कुण्डल दिया। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click … Read more

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? उत्तर⇒ ‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ में कर्ण ने इन्द्र को जन्मजात कवच और कुंडल दान किया। इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दान ही मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है, क्योंकि केवल दान ही स्थिर रहता है। शिक्षा समय-परिवर्तन के साथ समाप्त हो जाती है। … Read more

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ के आधार पर दान की महिमा का वर्णन करें।

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ के आधार पर दान की महिमा का वर्णन करें। उत्तर⇒ कर्ण जब कवच और कुंडल इन्द्र को देने लगते हैं तब शल्य उन्हें रोकते हैं । इसपर कर्ण दान की महिमा बतलाते हुए कहते हैं कि समय के परिवर्तन से शिक्षा नष्ट हो जाता है। बड़े-बड़े वृक्ष उखड़ जाते हैं, जलाशय सूख जाते … Read more

भास के नाटकों की क्या विशेषता है ?

भास के नाटकों की क्या विशेषता है ? उत्तर⇒ भास के तेरह नाटक हैं, जिनमें कर्णभार नाटक सबसे सरल और अभिनय-योग्य है। इनके नाटकों की विशेषता यह है कि साधारण जनता भी उनका अभिनय कर सकती है। इसके नाटकों की कथाएँ विशेष रूप से महाभारत से ली जाती है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram … Read more

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ कहाँ से उद्धत है ? इसके विषय में लिखें।

‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ कहाँ से उद्धत है ? इसके विषय में लिखें। उत्तर⇒ ‘कर्णस्य दानवीरता’ पाठ भास-रचित कर्णभार नामक रूपक से उद्धृत है। इस रूपक का कथानक महाभारत से लिया गया है । महाभारत युद्ध में कुंतीपुत्र कर्ण कौरव पक्ष से युद्ध करता है। कर्ण के शरीर में स्थित जन्मजात कवच और कुंडल उसकी रक्षा करते … Read more

कर्ण के प्रणाम करने पर इन्द्र ने उसे दीर्घाय होने का आशीर्वाद क्यों नहीं दिया ?

कर्ण के प्रणाम करने पर इन्द्र ने उसे दीर्घाय होने का आशीर्वाद क्यों नहीं दिया ? उत्तर⇒ इन्द्र जानते थे कि कर्ण को युद्ध में मरना अवश्यंभावी है । कर्ण को द दीर्घायु होने का आशीर्वाद दे देते, तो कर्ण की मृत्यु युद्ध में संभव नहीं थी। वह दीर्घायु हो जाता । कुछ नहीं बोलने पर … Read more

कर्ण की दानवीरता क्यों प्रसिद्ध है ?

कर्ण की दानवीरता क्यों प्रसिद्ध है ? उत्तर⇒ कर्ण महान दानवीर के रूप में प्रसिद्ध है, क्योंकि उसने अभेद्य कवच और कुंडल भी इन्द्र को दे दिया । कर्ण जानता था कि जब तक उसके पास कवच और कुंडल विद्यमान है, तब तक उसका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता । कर्ण को यह आभास हो … Read more

कर्ण ने कवच और कंडल देने के पूर्व इन्द्र से किन-किन चीजों को दानस्वरूप लेने के लिए आग्रह किया ?

कर्ण ने कवच और कंडल देने के पूर्व इन्द्र से किन-किन चीजों को दानस्वरूप लेने के लिए आग्रह किया ? उत्तर⇒ इन्द्र कर्ण से बड़ी भिक्षा चाहते थे। कर्ण समझ नहीं सका कि इन्द्र भिक्षा के रूप में उनका कवच और कंडल चाहते हैं। इसलिए कवच और कुंडल देने से पर्व कर्ण ने इन्द्र से अनरोध … Read more

इन्द्र ने कर्ण से कौन-सी बड़ी भिक्षा माँगी, और क्यों ?

इन्द्र ने कर्ण से कौन-सी बड़ी भिक्षा माँगी, और क्यों ? उत्तर⇒ इन्द्र ने कर्ण से बड़ी भिक्षा के रूप में कवच और कुंडल माँगी । अर्जुन की सहायता करने के लिए इन्द्र ने कर्ण से छलपूर्वक कवच और कुंडल माँगे, क्योंकि जब तक कवच और कुंडल उसके शरीर पर विद्यमान रहता, तब तक कर्ण की … Read more