हिन्दी साहित्य में नाटकों का प्रारम्भ और प्रगति

हिन्दी साहित्य में नाटकों का प्रारम्भ और प्रगति भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से पूर्व हिन्दी में नाटक साहित्य नहीं के बराबर था। जो कुछ था भी वह  नाममात्र के लिए था। उन नाटकों में न नाटकीय लक्षण थे, न मौलिकता । अधिकांश नाटक संस्कृत के नाटकों के आधार पर लिखे हुए पद्यबद्ध नाटकीय काव्य थे। इस प्रकार … Read more