नेताओं के बारे में कविवर ‘प्रेमघन’ की क्या राय है?

नेताओं के बारे में कविवर ‘प्रेमघन’ की क्या राय है?

उत्तर :- आज देश के नेता, देश के मार्गदर्शक भी स्वदेशी वेश-भूषा, बोल-चाल से परहेज करने लगे हैं। अपने देश की सभ्यता-संस्कृति को बढ़ावा देने के बजाय । पाश्चात्य सभ्यता से स्वयं प्रभावित दिखते हैं।

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