कवि ने “डफाली’ किसे कहा है और क्यों ?

कवि ने “डफाली’ किसे कहा है और क्यों ? उत्तर :- जिन लोगों में दास-वृत्ति बढ़ रही है, जो लोग पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति की दासता के बंधन में बँधकर विदेशी रीति-रिवाज के बने हुए हैं उनको कवि डफाली की संज्ञा देते हैं. क्योंकि वे विदेश की पाश्चात्य संस्कृतिक की, विदेशी वस्तुओं की, अंग्रेजी की झूठी … Read more

सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

सप्रसंग व्याख्या कीजिए: अति सनेह को ………………. बाँक नहीं, तहाँ साँचे चलें…………… निसाँक नहीं। उत्तर :- प्रस्तुत सवैया में रीतिकालीन काव्यधारा के प्रमुख कवि घनानंद-रचित ‘अति सधो को मारग है’, से उद्धृत है इसमें कवि प्रेम की पीड़ा एवं प्रेम की भावना के सरल और स्वाभाविक मार्ग का विवेचन करते हैं। कवि कहते हैं कि … Read more

‘कछ मेरियौ पीर हि परसौ’ की व्याख्या करें।

‘कछ मेरियौ पीर हि परसौ’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पक्ति हिन्दी साहित्य की पाठय-पस्तक से कवि घनानंद-रचित “मो अँसुवानिहिं लै बरसौ” पाठ से उद्धत है। प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि परोपकारी बादल से निवेदन किये हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में कवि कहते हैं कि हे घन ! तुम जीवनदायक हो, परोपकारी हो, … Read more

‘यहाँ एक तैं दसरौ औंक नहीं की व्याख्या करें।

‘यहाँ एक तैं दसरौ औंक नहीं की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पक्ति हिन्दी साहित्य की पाठय-पस्तक के कवि घनानंद द्वारा राचत आत सूधी सनेह को मारग है” पाठ से उद्धत है। इसके माध्यम से कवि प्रमा आर प्रयों का एकाकार करते हुए कहते हैं कि प्रेम में दो का पह अलग-अलग नहीं रहती, बल्कि … Read more

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ? उत्तर :- कवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं ‘मधुर बताते हैं। ये कहते हैं कि प्रेममार्ग पर चलना सरल है । इसपर चलने के लिए बहुत अधिक , छल-कपट की आवश्यकता नहीं है। प्रेमपथ पर … Read more

‘अति सूथो सनेह को मारग है, मो अँसवानिहि लै बरसौ कविता का सारांश लिखें।

‘अति सूथो सनेह को मारग है, मो अँसवानिहि लै बरसौ कविता का सारांश लिखें। उत्तर :- पाठयपुस्तक में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद मार्ग पर चलने वाले महान प्रेमी धनानंद (धन आनंद) के दो सवैये पाठयपुस्तक में संकलित है। प्रथमा. सवैया में प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की बात कही गई है और दूसरे … Read more

घनानन्द के द्वितीय छंद किसे संबोधित है, और क्यों ?

घनानन्द के द्वितीय छंद किसे संबोधित है, और क्यों ? उत्तर :- द्वितीय छंद बादल को संबोधित है । इसमें मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना की अभिव्यक्ति है। मेघ का वर्णन इसलिए किया गया है कि मेघ विरह-वेदना में अश्रुधारा प्रवाहित करने का जीवंत उदाहरण है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram … Read more

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ? उत्तर :- कवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं मधुर बताते हैं । ये कहते हैं कि प्रेममार्ग पर चलना सरल है। इसपर चलने के लिए बहुत अधिक छल-कपट की आवश्यकता नहीं है। हमसे जुड़ें, हमें … Read more

घनानंद के अनुसार पर-हित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए।

घनानंद के अनुसार पर-हित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- परहित के लिए ही देह, बादल धारण करता है। बादल जल की वर्षा करके सभी प्राणियों को जीवन देता है, प्राणियों में सुख-चैन स्थापित करता है। उसके विरह के आँसू, अमृत की वर्षा कर जीवनदाता हो जाता है। … Read more

कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुंचाना चाहता है, और क्यों ?

कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुंचाना चाहता है, और क्यों ? उत्तर :- कवि अपनी प्रेयषी सजान के लिए विरह-वेदना को प्रकट करते हए बादल से अपने प्रेमाश्रुओं को पहुँचाने के लिए कहता है। वह अपने आँसुओं को सुजान के आँगन में पहुँचाना चाहता है, क्योंकि वह उसकी याद में व्यथित है और अपनी व्यथा … Read more