‘पाँच सौ रुपये देकर मैंने गण्डा बँधवाया’ की व्याख्या कीजिए।

‘पाँच सौ रुपये देकर मैंने गण्डा बँधवाया’ की व्याख्या कीजिए। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के जित-जित मैं निरखत हूँ शीर्षक से उद्धृत है । यह शीर्षक हिन्दी साहित्य की साक्षात्कार विधा है । इस पंक्ति से बिरजू महाराज अपने गुरुस्वरूप पिता की कर्तव्यनिष्ठा एवं उदारशीलता का यथार्थ चित्रण किया है। इस प्रक्ति से पता … Read more

‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ का सारांश लिखें।

‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ का सारांश लिखें। उत्तर :- बिरजू महाराज कथक नृत्य के महान कलाकार हैं। उनका जन्म लखनऊ के जफरीन अस्पताल में 4 फरवरी, 1938 को हुआ। वे घर में आखिरी संतान थे। तीन बहनों के बाद उनका जन्म हुआ था। बिरजू महाराज के पिताजी भी नृत्यकला विशारद थे। वे रामगढ़, पटियाला और … Read more

पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं ?

पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं ? उत्तर :- पुराने नर्तक कला प्रदर्शन करते थे। कला प्रदर्शन शौक था । साधन के अभाव में भी उत्साह होता था। कम जगह में गलीचे पर गड्ढा, खाँचा इत्यादि होने के बावजूद बेपरवाह होकर कला प्रदर्शन करते थे। लेकिन आज के … Read more

बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुःखद समय कब आया ? उससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए।

बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुःखद समय कब आया ? उससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए। उत्तर :- जब महाराज जी के बाबूजी की मृत्यु हुई तब उनके लिए बहुत दुखदायी समय व्यतीत हुआ । घर में इतना भी पैसा नहीं था कि दसवाँ किया जा सके । इन्होंने दस दिन के अन्दर दो … Read more

बिरजू महाराज की अपने शार्गिदों के बारे में क्या राय है ?

बिरजू महाराज की अपने शार्गिदों के बारे में क्या राय है ? उत्तर :- बिरजू महाराज अपने शिष्या रश्मि वाजपेयी को भी अपना शार्गिद बताते हैं। वे उन्हें शाश्वती कहते हैं। इसके साथ ही वैरोनिक, फिलिप, मेक्लीन, टॉक, तीरथ प्रताप प्रदीप, दुर्गा इत्यादि को प्रमुख शार्गिद बताये हैं। वे लोग तरक्की कर रहे हैं, प्रगतिशील … Read more

रामपुर के नवाब की नौकरी छूटने पर हनुमान जी को प्रसाद क्यों चढ़ाया ?

रामपुर के नवाब की नौकरी छूटने पर हनुमान जी को प्रसाद क्यों चढ़ाया ? उत्तर :- रामपुर के नवाब की नौकरी छूटने पर हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाया क्योंकि महाराज जी छह साल की उम्र में नवाब साहब के यहाँ नाचते थे। अम्मा परेशान थी। बाबूजी नौकरी छूटने के लिए हनुमान जी का प्रसाद माँगते … Read more

शम्भू महाराज के साथ बिरजू महाराज के संबंध पर प्रकाश डालिए।

शम्भू महाराज के साथ बिरजू महाराज के संबंध पर प्रकाश डालिए। उत्तर :- शंभू महाराज के साथ बिरजू महाराज बचपन में नाचा करते थे। आगे भारतीय कला केन्द्र में उनका सान्निध्य मिला । शम्भू महाराज के साथ सहायक रहकर कला के क्षेत्र में विकास किया । शम्भू महाराज उनके चांचा थे। बचपन से महाराज को उनका … Read more

बिरजू महाराज के गुरु कौन थे ? उनका संक्षिप्त परिचय दें।

बिरजू महाराज के गुरु कौन थे ? उनका संक्षिप्त परिचय दें। उत्तर :- बिरजू महाराज के गुरु उनके बाबूजी थे । वे अच्छे स्वभाव के थे । वे अपने दु:ख को व्यक्त नहीं करते थे। उन्हें कला से बेहद प्रेम था । जब बिरजू. महाराज साढ़े नौ साल के थे, उसी समय बाबूजी की मृत्यु … Read more

अपने विवाह के बारे में बिरजू महाराज क्या बताते हैं ?

अपने विवाह के बारे में बिरजू महाराज क्या बताते हैं ? उत्तर :- बिरजू महाराज की शादी 18 साल की उम्र में हुई थी। उस समय विवाह करना महाराज अपनी गलती मानते हैं । लेकिन बाबूजी की मृत्यु के बाद माँ घबराकर जल्दी में शादी कर दी । शादी को नुकसानदेह मानते हैं। विवाह की … Read more

संगीत भारती में बिरजू महाराज की दिनचर्या क्या थी ?

संगीत भारती में बिरजू महाराज की दिनचर्या क्या थी ? उत्तर :- संगीत भारती में प्रारंभ में 250 रु० मिलते थे। उस समय दरियागंज में रहते थे । वहाँ से प्रत्येक दिन पाँच या नौ नंबर का बस पकड़कर संगीत भारती पहुँचते थे। संगीत भारती में इन्हें प्रदर्शन का अवसर कम मिलता था। अंततः दुःखी … Read more