कृष्ण को चोर क्यों कहा गया है ? कवि का अभिप्राय स्पष्ट करें ?

कृष्ण को चोर क्यों कहा गया है ? कवि का अभिप्राय स्पष्ट करें ? उत्तर :- कवि कृष्ण और राधा के प्रेम में मनमुग्ध हो गये हैं। उनकी मनमोहक छवि को देखकर मन पूर्णत: उस युगल में रम जाता है। इसलिए इन्हें लगता है कि इस देह से मनरूपी मणि को कृष्ण ने चुरा लिया … Read more

रसखान के द्वितीय दोहे का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें ?

रसखान के द्वितीय दोहे का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें ? उत्तर :- प्रस्तुत दोहे में सवैया छन्द में भाव के अनुसार भाषा का प्रयोग अत्यन्त मार्मिक है। सम्पूर्ण छन्द में ब्रजभाषा की सरलता, सहजता और मोहकता देखी जा सकती है। कहीं-कहीं तद्भव और तत्सम के सामासिक रूप भी मिल रहे हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे … Read more

रसखान ने माली-मलिन किन्हें और क्यों कहा है ?

रसखान ने माली-मलिन किन्हें और क्यों कहा है ? उत्तर :- कवि ने माली-मालिन कृष्ण और राधा को कहा है। क्योंकि, कवि राधा-कृष्ण के प्रेममय युगल को प्रेम-भरे नेत्र से देखा है । यहाँ प्रेम को वाटिका मानते हैं और उस प्रेम-वाटिका के माली-मालिन कृष्ण-राधा को मानते हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram … Read more

रसखान रचित सवैये का भावार्थ अपने शब्दों में लिखें।

रसखान रचित सवैये का भावार्थ अपने शब्दों में लिखें। उत्तर :- रसखान रचित सवैये में ब्रजभूमि के प्रति उनका हार्दिक प्रेम प्रकट होता है। सवैये में उन्होंने कहा है कि ब्रजभूमि की एक-एक वस्तु, स्थान, सरोवर, कँटीली झाड़ियाँ सुखदायक हैं क्योंकि यहाँ ब्रह्म के अवतार श्रीकृष्ण अवतरित हुए। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram … Read more

‘कंचन माटी जानै’ की व्याख्या करें।

‘कंचन माटी जानै’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के “जो नर दुःख में दुख नहिं मानै’ शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत गद्यांश में निर्गुण निराकार ईश्वर के उपासक गुरुनानक सुख-दुख में एकसमान उदासीन रहते हुए लोभ और मोह से दूर रहने की सलाह देते हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में … Read more

‘नानक लीन भयो गोविंद सो, ज्यों पानी संग पानी की व्याख्या करें।

‘नानक लीन भयो गोविंद सो, ज्यों पानी संग पानी की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक के महान संत कषि गुरुनानक के द्वारा रचित “जो नर दु:ख में दुःख नहिं मान” पाठ से उद्धत हैं। इसमें कवि ब्रह्म की सत्ता की महत्ता को बताते हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति के माध्यम से कवि कहना … Read more

‘हरष शोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना’ की व्याख्या करें।

‘हरष शोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के संत कवि गुरुनानक द्वारा रचित “जो नर दु:ख में दु:ख नहिं मान” शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत पंक्ति में संत गुरुनानक उपदेश देते हैं कि ब्रह्म के उपासक प्राणी को हर्ष-शोक, सुख-दुख, निंदा-प्रशंसा, मान-अपमान से … Read more

‘राम नाम बिनु अरूझि मरै’ की व्याख्या करें ।

‘राम नाम बिनु अरूझि मरै’ की व्याख्या करें । उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के महान संत कवि गुरुनानक के द्वारा लिखित “राम नाम बिनु निर्गुण जगि जनमा” शीर्षक से उद्धृत है । गुरुनानक निर्गुण, निराकार ईश्वर के उपासक तथा हिंदी की निर्गुण भक्तिधारा के प्रमुख कवि हैं। यहाँ राम नाम की … Read more

निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें :

निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें : “आसा मनसा सकल त्यागि के जग ते रहै निरासा। काम क्रोध जेहि परसे नाहिन तेहि घट ब्रह्म निवासा।।” उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश कवि गुरुनानक देव द्वारा रचित राम नाम बिनु विरुथे जगी जनमा पाठ से उद्धृत है। उपर्युक्त पंक्तियों में संत कवि नानक कहते हैं कि जिसने आशा-आकांक्षा … Read more

“जो नर दुःख में दुःख नहीं मानै’ कविता का भावार्थ लिखें।

“जो नर दुःख में दुःख नहीं मानै’ कविता का भावार्थ लिखें। उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कवि ईश्वर की निर्गुणवादी सत्ता को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य दु:ख को दुःख नहीं समझता है अर्थात् दुःखमय जीवन में भी समानरूप में रहता है उसी का जीवन सार्थक होता है। जिसके जीवन में सुख, … Read more