‘अति सूथो सनेह को मारग है, मो अँसवानिहि लै बरसौ कविता का सारांश लिखें।

‘अति सूथो सनेह को मारग है, मो अँसवानिहि लै बरसौ कविता का सारांश लिखें। उत्तर :- पाठयपुस्तक में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद मार्ग पर चलने वाले महान प्रेमी धनानंद (धन आनंद) के दो सवैये पाठयपुस्तक में संकलित है। प्रथमा. सवैया में प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की बात कही गई है और दूसरे … Read more

घनानन्द के द्वितीय छंद किसे संबोधित है, और क्यों ?

घनानन्द के द्वितीय छंद किसे संबोधित है, और क्यों ? उत्तर :- द्वितीय छंद बादल को संबोधित है । इसमें मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना की अभिव्यक्ति है। मेघ का वर्णन इसलिए किया गया है कि मेघ विरह-वेदना में अश्रुधारा प्रवाहित करने का जीवंत उदाहरण है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram … Read more

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ? उत्तर :- कवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं मधुर बताते हैं । ये कहते हैं कि प्रेममार्ग पर चलना सरल है। इसपर चलने के लिए बहुत अधिक छल-कपट की आवश्यकता नहीं है। हमसे जुड़ें, हमें … Read more

घनानंद के अनुसार पर-हित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए।

घनानंद के अनुसार पर-हित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- परहित के लिए ही देह, बादल धारण करता है। बादल जल की वर्षा करके सभी प्राणियों को जीवन देता है, प्राणियों में सुख-चैन स्थापित करता है। उसके विरह के आँसू, अमृत की वर्षा कर जीवनदाता हो जाता है। … Read more

कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुंचाना चाहता है, और क्यों ?

कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुंचाना चाहता है, और क्यों ? उत्तर :- कवि अपनी प्रेयषी सजान के लिए विरह-वेदना को प्रकट करते हए बादल से अपने प्रेमाश्रुओं को पहुँचाने के लिए कहता है। वह अपने आँसुओं को सुजान के आँगन में पहुँचाना चाहता है, क्योंकि वह उसकी याद में व्यथित है और अपनी व्यथा … Read more

“मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं” से कवि का क्या अभिप्राय है ?

“मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं” से कवि का क्या अभिप्राय है ? उत्तर :- कवि कहते हैं कि प्रेमी में देने की भावना होती है लेने की नहीं। प्रेम में प्रेमी अपने इष्ट को सर्वस्व न्योछावर करके अपने को धन्य मानते हैं। इसमें संपूर्ण समर्पण की भावना उजागर किया गया है। हमसे जुड़ें, हमें … Read more

‘रसखानि कबौं इन आँखिन सौं ब्रज के बनबाग तड़ाग निहारौं’ की व्याख्या करें।

‘रसखानि कबौं इन आँखिन सौं ब्रज के बनबाग तड़ाग निहारौं’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य की पाठ्य-पुस्तक के रसखान-रचित करोल के कुंजन ऊपर वारों’ पाठ से उद्धत है । प्रस्तुत पंक्ति में कवि ब्रज पर अपना जावन सर्वस्व न्योछावर कर देने की भावमयी विदग्धता मुखरित करते हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति के … Read more

“मन पावन चितचोर, पलक ओट नहिं करि सकौं’ की व्याख्या करें।

“मन पावन चितचोर, पलक ओट नहिं करि सकौं’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति कृष्णभक्त कवि रसखान द्वारा रचित हिंदी पाठ्य-पुस्तक के ‘प्रेम-अयनि श्रीराधिका’ पाठ से उद्धृत है। इसमें कवि ने कृष्ण की मनोहर छवि के प्रति अपने हृदय की रीझ को व्यक्त किया है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहते हैं कि नन्दकिशोर में … Read more

सवैये में कवि की कैसी आकांक्षा प्रकट होती है ? भावार्थ बताते हुए स्पष्ट करें ?

सवैये में कवि की कैसी आकांक्षा प्रकट होती है ? भावार्थ बताते हुए स्पष्ट करें ? उत्तर :- प्रेम-रसिक कवि रसखान द्वारा रचित सवैये में कवि की आकांक्षा प्रकट हुई है। इसके माध्यम से कवि कहते हैं कि कृष्णलीला की छवि के सामने अन्यान्य दृश्य बेकार हैं। कवि कृष्ण की लकुटी और कामरिया पर तीनों … Read more

‘प्रेम-अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं’ कविता का सारांश लिखें।

‘प्रेम-अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं’ कविता का सारांश लिखें। उत्तर :- पाठयपुस्तक में ‘प्रेम-अयनि श्री राधिका’ शीर्षक के अंतर्गत चार दोहे संकलित हैं तथा ‘करील के कुंजन ऊपर वारौं’ शीर्षक कविता के अंतर्गत एक सवैया संकलित है। रसखान कवि कहते हैं कि श्री राधिका प्रेम की खान हैं और श्रीकृष्ण का सारा व्यक्तित्व … Read more