नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को क्या अनुभव होता है ?

नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को क्या अनुभव होता है ? उत्तर :- नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को लगता है कि जल स्थिर है और तट ही बह रहा है। उन्हें अनुभव हो रहा है कि वे नदी के साथ बह रहे हैं। नदी के पास रहने से लगता है … Read more

नदी तट पर लेखक को किसकी याद आती है और क्यों ?

नदी तट पर लेखक को किसकी याद आती है और क्यों ? अथवा, आविन्यो पाठ के लेखक को नदी तट पर किसकी याद आती है और क्यों ?  उत्तर :- नदी तट पर लेखक को विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता याद आती है। क्योंकि लेखक नदी तट पर बैठकर अनुभव करते हैं कि वे … Read more

आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ? हर बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है ?

आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ? हर बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है ? अथवा, आविन्यों में प्रत्येक बर्ष आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है ?  उत्तर :- आविन्यों मध्ययुगीन ईसाई मठ है। यह दक्षिणी फ्रांस में अवस्थित है। आविन्यों फ्रांस का एक प्रमुख कलाकेंद्र … Read more

“मैं कोई चीज चुराता नहीं हूँ कि अपने बेटे के लिए ये रखना है, उसको सिखाना है’ की व्याख्या कीजिए।

“मैं कोई चीज चुराता नहीं हूँ कि अपने बेटे के लिए ये रखना है, उसको सिखाना है’ की व्याख्या कीजिए। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य पाठ्यपुस्तक के ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ से ली गई है। यह शीर्षक हिन्दी साहित्य की साक्षात्कार विधा है। यहाँ स्वयं साक्षात्कार के दरम्यान अपने शिष्य के प्रति निष्ठा, वात्सल्यता … Read more

‘मैं तो बेचारा उसका असिस्टेंट हूँ। उस नाचने वाले का’, व्याख्या कीजिए।

‘मैं तो बेचारा उसका असिस्टेंट हूँ। उस नाचने वाले का’, व्याख्या कीजिए। उत्तर :-प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति हिन्दी पाठ्यपुस्तक के ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ शीर्षक से ली गई है। यह शीर्षक हिन्दी साहित्य की साक्षात्कार विधा है। इसमें भारतीय कत्थक के महानतम नायक बिरजू महाराज स्वयं अपने मुखारविन्द से कत्थक के प्रति अपनी समर्पण भावना का … Read more

‘पाँच सौ रुपये देकर मैंने गण्डा बँधवाया’ की व्याख्या कीजिए।

‘पाँच सौ रुपये देकर मैंने गण्डा बँधवाया’ की व्याख्या कीजिए। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के जित-जित मैं निरखत हूँ शीर्षक से उद्धृत है । यह शीर्षक हिन्दी साहित्य की साक्षात्कार विधा है । इस पंक्ति से बिरजू महाराज अपने गुरुस्वरूप पिता की कर्तव्यनिष्ठा एवं उदारशीलता का यथार्थ चित्रण किया है। इस प्रक्ति से पता … Read more

‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ का सारांश लिखें।

‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ का सारांश लिखें। उत्तर :- बिरजू महाराज कथक नृत्य के महान कलाकार हैं। उनका जन्म लखनऊ के जफरीन अस्पताल में 4 फरवरी, 1938 को हुआ। वे घर में आखिरी संतान थे। तीन बहनों के बाद उनका जन्म हुआ था। बिरजू महाराज के पिताजी भी नृत्यकला विशारद थे। वे रामगढ़, पटियाला और … Read more

पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं ?

पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं ? उत्तर :- पुराने नर्तक कला प्रदर्शन करते थे। कला प्रदर्शन शौक था । साधन के अभाव में भी उत्साह होता था। कम जगह में गलीचे पर गड्ढा, खाँचा इत्यादि होने के बावजूद बेपरवाह होकर कला प्रदर्शन करते थे। लेकिन आज के … Read more

बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुःखद समय कब आया ? उससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए।

बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुःखद समय कब आया ? उससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए। उत्तर :- जब महाराज जी के बाबूजी की मृत्यु हुई तब उनके लिए बहुत दुखदायी समय व्यतीत हुआ । घर में इतना भी पैसा नहीं था कि दसवाँ किया जा सके । इन्होंने दस दिन के अन्दर दो … Read more

बिरजू महाराज की अपने शार्गिदों के बारे में क्या राय है ?

बिरजू महाराज की अपने शार्गिदों के बारे में क्या राय है ? उत्तर :- बिरजू महाराज अपने शिष्या रश्मि वाजपेयी को भी अपना शार्गिद बताते हैं। वे उन्हें शाश्वती कहते हैं। इसके साथ ही वैरोनिक, फिलिप, मेक्लीन, टॉक, तीरथ प्रताप प्रदीप, दुर्गा इत्यादि को प्रमुख शार्गिद बताये हैं। वे लोग तरक्की कर रहे हैं, प्रगतिशील … Read more