साहित्य का कौन-सा पक्ष अपेक्षाकृत स्थायी होता है ? इस संबंध में लेखक की राय स्पष्ट करें।

साहित्य का कौन-सा पक्ष अपेक्षाकृत स्थायी होता है ? इस संबंध में लेखक की राय स्पष्ट करें। उत्तर :- साहित्य मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन से संबद्ध है। आर्थिक जीवन के अलावा मनुष्य एक प्राणी के रूप में भी अपना जीवन बिताता है । साहित्य में उसकी बहुत-सी आदिम भावनाएँ प्रतिफलित होती हैं जो उसे प्राणी … Read more

साहित्य के निर्माण में प्रतिभा की भूमिका स्वीकार करते हुए लेखक किन खतरों से आगाह करता है ?

साहित्य के निर्माण में प्रतिभा की भूमिका स्वीकार करते हुए लेखक किन खतरों से आगाह करता है ? उत्तर :- लखक साहित्य के निर्माण में प्रतिभाशाली मनुष्यों की भूमिका निर्णायक मानत हैं। लेकिन उन्होंने इस संबंध में सावधान किया है कि ये मनुष्य जो करते ह वह स्व अच्छा ही होता है, यह आवश्यक नहीं। … Read more

परंपरा के मूल्यांकन में साहित्य के वर्गीय आधार का विवेक लेखक क्यों महत्वपूर्ण मानता है ?

परंपरा के मूल्यांकन में साहित्य के वर्गीय आधार का विवेक लेखक क्यों महत्वपूर्ण मानता है ? उत्तर :- लेखक के अनुसार परंपरा के मूल्यांकन में साहित्य के वर्गीय आधार का ज्ञान महत्वपूर्ण है । इसका मूल्यांकन करते हुए सबसे पहले हम उस साहित्य का मूल्य निर्धारित करते हैं जो शोषक वर्गों के विरुद्ध जनता के … Read more

किस तरह समाजवाद हमारी राष्ट्रीय आवश्यकता है ? इस प्रसंग में लेखक के विचारों पर प्रकाश डालें।

किस तरह समाजवाद हमारी राष्ट्रीय आवश्यकता है ? इस प्रसंग में लेखक के विचारों पर प्रकाश डालें। उत्तर :- लेखक के अनुसार पूँजीवादी व्यवस्था में शक्ति का अपव्यय होता है । देश के साधनों का सबसे अच्छा उपयोग समाजवादी व्यवस्था में ही सम्भव है। अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र समाजवादी व्यवस्था कायम करने के बाद पहले की … Read more

जातीय अस्मिता का लेखक किस प्रसंग में उल्लेख करता है और उसका क्या महत्व बताता है ?

जातीय अस्मिता का लेखक किस प्रसंग में उल्लेख करता है और उसका क्या महत्व बताता है ? उत्तर :- साहित्य के विकास में जातियों की भूमिका विशेष होती है। जन समुदाय जब एक व्यवस्था से दूसरी व्यवस्था में प्रवेश करते हैं, तब उनकी अस्मिता नष्ट नहीं हो जाती । मानव समाज बदलता है और अपनी … Read more

परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है और क्यों ?

परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है और क्यों ? उत्तर :- जो लोग साहित्य में युग-परिवर्तन करना चाहते हैं, क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं, उनके लिए साहित्य की परंपरा का ज्ञान आवश्यक है। क्योंकि साहित्य की परंपरा से प्रगतिशील आलोचना का ज्ञान होता है जिससे साहित्य की धारा को मोड़कर नए प्रगतिशील … Read more

अगर वह कुछ चुराकर ले गया होता तो संतोष हो जाता। व्याख्या कीजिए।

अगर वह कुछ चुराकर ले गया होता तो संतोष हो जाता। व्याख्या कीजिए। उत्तर : – प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य जगत के सुप्रसिद्ध कथाकार अमरकांत के द्वारा लिखित बहादुर नामक शीर्षक से उद्धृत है। इस गद्यांश में लेखक ने निर्मला के माध्यम से भीतर और बाहर के यथार्थ एवं सहजता को चित्रित किया है। बहादुर … Read more

पर अब बहादुर से भूल-गलतियाँ अधिक होने लगी थीं । व्याख्या कीजिए।

पर अब बहादुर से भूल-गलतियाँ अधिक होने लगी थीं । व्याख्या कीजिए। उत्तर :- प्रस्तत गद्याश हिन्दा कथा जगत के प्रकांड पंडित भो लिखित ‘बहादुर’ नामक शीर्षक से अवतरित है । इस गद्यांश में बहादा की भल और गलतियों के स्वरूप को एक रेखाचित्र के रूप में दर्शाया गया है। प्रस्तुत अंश के माध्यम से … Read more

उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों। व्याख्या कीजिए।

उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों। व्याख्या कीजिए। उत्तर :- प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकार अमरकांत द्वारा लिखित ‘बहादुर’ शीर्षक से अवतरित है। प्रस्तुत अंश में कथा के प्रमुख नायक बहादुर की स्वाभाविक, निश्छल और निष्कपट हँसी का वर्णन किया गया है। प्रस्तुत व्याख्यांश में … Read more

‘यदि मैं न मारता, तो शायद वह न जाता’ की व्याख्या कीजिए।

‘यदि मैं न मारता, तो शायद वह न जाता’ की व्याख्या कीजिए। उत्तर :- प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के सशक्त कथाकार अमरकांत के द्वारा रचित ‘बहादुर’ नामक शीर्षक से उद्धृत है। यहाँ बहादुर के भागने पर लेखक के पश्चात्ताप में एक अजीब सी लघुता का अनुभव कराया गया है। – इस गद्यांश से पता चलता … Read more