चाय उत्पादन के प्रमुख भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत में चाय उत्पादक तीन राज्यों के नाम लिखें।

चाय उत्पादन के प्रमुख भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत में चाय उत्पादक तीन राज्यों के नाम लिखें। उत्तर-चाय एक महत्त्वपूर्ण पेय फसलें है। यह झाड़ियों की कोमल पत्तियों को संसाधित करके प्राप्त की जाती है। चाय की कृषि के लिए निम्न भौगोलिक दशाएँ आवश्यक होती है – (i) तापमान–चाय एक उष्ण एवं उपोष्ण फसल … Read more

चाय उत्पादन के प्रमुख भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत के चाय उत्पादक देशों का उल्लेख करें।

चाय उत्पादन के प्रमुख भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत के चाय उत्पादक देशों का उल्लेख करें। उत्तर- चाय मानसूनी जलवायु को चिरहरित झाड़ी है जो 3 मीटर तक ऊँची होती है। इसकी खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ हैं – (i) ग्रीष्म ऋतु के दौरान 24.30°C तापमान। (ii) जड़ों में पानी नहीं जमने देने … Read more

गेहँ उत्पादन हेतु मुख्य भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हए भारत के गेहूँ उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।

गेहँ उत्पादन हेतु मुख्य भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हए भारत के गेहूँ उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें। उत्तर – गेहूं भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्य फसल है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। इसके उत्पादन हेतु मुख्य भौगोलिक दशाएँ इस प्रकार से हैं – तापमान – बोते समय 10° … Read more

चावल की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।

चावल की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें। उत्तर- चावल के उत्पादन की उपयुक्त दशाएँ- धान से चावल बनाया जाता है। धान मानसूनी जलवायु का फसल है जिसके लिए निम्नांकित दशाएँ उपयुक्त होती हैं – (i) उच्च तापमान (20°C से 30°C के बीच), (ii) पर्याप्त वर्षा (200 cm वार्षिक वर्षा) कम वर्षा … Read more

शुष्क भूमि कृषि की विशेषताओं का वर्णन कर।

शुष्क भूमि कृषि की विशेषताओं का वर्णन कर। उत्तर- शुष्क भूमि कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं- (i) इन क्षेत्रों में प्राय: गरीब किसान रहते हैं जो पंजी के अभाव में उन्नत बीज, उर्वरक इत्यादि नहीं खरीद सकते हैं। यही कारण है कि यहा उत्पादन भी कम होता है। (ii) यहाँ पर शुष्क समय में उपयोग … Read more

भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभावों का वर्णन करें।

भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभावों का वर्णन करें। उत्तर- वैश्वीकरण का अर्थ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था से जुड़ना है। भारतीय कृषि भी 1991 के बाद से इस वैश्वीकरण की नीति से प्रभावित हुई है। विश्व बाजार की मांग के अनुरूप भारतीय किसान फसलों की खता कर विश्व बाजार में प्रवेश करने में … Read more

भारतीय कृषि पर भूमंडलीकरण के प्रभाव की व्याख्या करें।

भारतीय कृषि पर भूमंडलीकरण के प्रभाव की व्याख्या करें। उत्तर- भूमंडलीकरण का उद्देश्य है हमारे राष्ट्रीय अर्थतंत्र का विश्व अर्थतंत्र से जुड़ना। विश्व का बाजार सबके लिए मुक्त हो। इससे अच्छे किस्म का सामान उचित मूल्य पर कहीं भी पहुँचाया जा सकेगा। भारतीय कृषि के विकास के लिए उपयुक्त जलवायु मिट्टी और श्रमिकों का । … Read more

भारतीय कृषि में उत्पादन को बढ़ाने के उपायों को सुझावें।

भारतीय कृषि में उत्पादन को बढ़ाने के उपायों को सुझावें। उत्तर –भारत में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या का वास हैं। तेजी से बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के कारण कृषि योग्य भूमि को लगातार कमी हो रही है। मानसून की अनिश्चितता से भी कृषि उत्पादन की कमी हो रही है। उत्पादन … Read more

भारत में कृषि के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें।

भारत में कृषि के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें। उत्तर- कृषि आदिकाल से किया जानेवाला आर्थिक क्रियाकलाप है। भारत में पायी जानेवाली विविध भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिवेश ने कृषि तंत्र को समय के अनुरूप प्रभावित किया है। भारतीय कृषि के प्रकार निम्नलिखित हैं – (i) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि- यह अति प्राचीन काल से की जानेवाली … Read more

भारतीय अर्थतंत्र में कषि का क्या महत्त्व है ? कषि की विशेषताओं पर प्रकाश डालें।

भारतीय अर्थतंत्र में कषि का क्या महत्त्व है ? कषि की विशेषताओं पर प्रकाश डालें। उत्तर –भारतीय अर्थतंत्र में कृषि का निम्नलिखित महत्त्व हैं – (i) भारत की 70% आबादी रोजगार और आजीविका के लिए कृषि पर आश्रित है। (ii) देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि का योगदान 22% ही है। फिर भी, बहुत … Read more