दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ क्यों जरूरी है ?

दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ क्यों जरूरी है ? उत्तर :- दूसरी संस्कृतियों की समझ और कद्र स्वयं अपनी संस्कृति की कद्र होने और उसे हजम कर लेने के बाद होनी चाहिए, पहले हरगिज नहीं। कोई संस्कृति इतने रत्न-भण्डार से भरी हुई नहीं है जितनी हमारी अपनी संस्कृति है। सर्वप्रथम हमें … Read more

गाँधीजी देशी भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद-कार्य क्यों आवश्यक मानते थे ?

गाँधीजी देशी भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद-कार्य क्यों आवश्यक मानते थे ? उतर :- गाँधीजी का मानना था कि देशी भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से किसी भी भाषा के विचारों को तथा ज्ञान को आसानी से ग्रहण किया जा सकता है। अंग्रेजी या संसार के अन्य भाषाओं में जो ज्ञान-भंडार पड़ा है, उसे … Read more

सुरक्षा और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए ।

सुरक्षा और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए । उत्तर— स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पर्यावरण (HSE) की अवधारणा (Concept of Health, Safety and Environment) — बढ़ते हुए औद्योगिक प्रदूषण एवं औद्योगिक दुर्घटनाओं ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के प्रति स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान गया है। निरन्तर औद्योगिक … Read more

गाँधीजी किस तरह के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं और क्यों ?

गाँधीजी किस तरह के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं और क्यों ? उतर :- गाँधीजी भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं, क्योंकि भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य भारतीय जीवन को प्रभावित किया है और स्वयं भी भारतीय जीवन से प्रभावित हुई है। यह सामंजस्य कुदरती तौर पर स्वदेशी … Read more

शिक्षा का ध्येय गाँधीजी क्या मानते थे और क्यों ?

शिक्षा का ध्येय गाँधीजी क्या मानते थे और क्यों ? उत्तर :- शिक्षा का ध्येय गाँधीजी चरित्र-निर्माण करना मानते थे। उनके विचार से शिक्षा के माध्यम से मनुष्य में साहस, बल, सदाचार जैसे गुणों का विकास होना -चाहिए, क्योंकि चरित्र-निर्माण होने से सामाजिक उत्थान स्वयं होगा । साहसी और सदाचारी व्यक्ति के हाथों में समाज … Read more

मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास कैसे संभव है ?

मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास कैसे संभव है ? उत्तर :- शिक्षा का प्रारंभ इस तरह किया जाए कि बच्चे उपयोगी दस्तकारी सीखें और जिस क्षण से वह अपनी तालीम शुरु करें उसी क्षण उन्हें उत्पादन का काम करने योग्य बना दिया जाए। इस प्रकार की शिक्षा-पद्धति में मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास … Read more

शहरों में अपशिष्ट पदार्थों के प्रबन्धन के बारे में बताइये ।

शहरों में अपशिष्ट पदार्थों के प्रबन्धन के बारे में बताइये । उत्तर— शहरों में अपशिष्ट पदार्थों का प्रबन्धन – किसी भी प्रक्रम के अन्त में बनने वाले अनुपयोगी पदार्थ या उत्पाद अपशिष्ट कहलाते हैं। ऐसे अपशिष्ट पदार्थों के समुचित निस्तारण या निपटान के प्रबन्धन को अपशिष्ट प्रबन्धन कहते हैं। इसके अन्तर्गत अपशिष्ट के प्रकार आधार … Read more

इंद्रियों का बुद्धिपूर्वक, उपयोग सीखना क्यों जरूरी है ?

इंद्रियों का बुद्धिपूर्वक, उपयोग सीखना क्यों जरूरी है ? उत्तर :- इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग उसकी बुद्धि के विकास का जल्द-से-जल्द और उत्तम तरीका है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Facebook पर फॉलो करे – Click Here Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Google News ज्वाइन करे – Click Here

अपशिष्ट के पुनर्चक्रण की व्याख्या कीजिए ।

अपशिष्ट के पुनर्चक्रण की व्याख्या कीजिए । उत्तर— अपशिष्ट के पुनर्चक्रण – अपशिष्ट से संसाधनों की या किसी भी मूल्य की चीज को निकालना पुनर्चक्रण के नाम से जाना जाता है। जिसका अर्थ है पुनः मिलना, जिससे अपशिष्ट पदार्थों का पुनर्नवीकरण होता है। इनसे कच्चा माल निकालकर पुनः प्रक्रम किया जाता है या अपशिष्ट को … Read more

गाँधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं ?

गाँधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं ? उत्तर :- आहिसक प्रतिरोध का गाधाजी बढ़िया शिक्षा कहते हैं। यह शिक्षा अक्षर-ज्ञान से पूर्व मिलना चाहिए। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Facebook पर फॉलो करे – Click Here Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here Google News ज्वाइन करे – Click Here