पल्लवन अथवा भाव-विस्तारण
पल्लवन अथवा भाव-विस्तारण किसी संक्षिप्त कथन का विस्तारपूर्वक सही अर्थ लिखना ही विस्तारण या पल्लवन है। बेइन के अनुसार किसी विचार को ‘अनुच्छेद में पल्लवित करने का एक विशिष्ट उद्देश्य होता है तथा कार्य में अप्रासंगिकता एवं विषयांतरण का अभाव होना चाहिए। विस्तारण को पल्लवन भी कहते हैं। किसी लोकोक्ति, भावपूर्ण वाक्य, नीति-वचन अथवा सूक्ति … Read more