अनुवाद परिभाषा एवं अर्थ

अनुवाद परिभाषा एवं अर्थ अनुवाद का व्युत्पत्तिपरक अर्थ होता है – अनु + वाद । अनु का अर्थ होता है ‘ पीछे’ और वाद का अर्थ होता है ‘कहना’। इस प्रकार अनुवाद का अर्थ हुआ किसी बात के कहने के बाद कोई बात कहना अर्थात् पुनर्कथन। दूसरे शब्दों में, किसी भाषा के कथ्य को दूसरी … Read more

प्रारूपण : अर्थ एवं परिभाषा

प्रारूपण : अर्थ एवं परिभाषा कार्यालयी हिंदी में प्रारूपण को ‘पत्राचार / मसौदा – लेखन / आलेखन / प्रलेखन नाम से भी जाना जाता है। प्रारूपण कार्यालयी हिंदी का दूसरा महत्त्वपूर्ण अंग है। ‘प्रारूपण’ का अर्थ है- — पत्र का कच्चा अथवा अंतिम रूप । किसी पत्र का प्रारूप तैयार करना ही प्रारूपण कहलाता है। … Read more

टिप्पण: अर्थ | कार्यालय टिप्पण के प्रमुख भेद

टिप्पण: अर्थ | कार्यालय टिप्पण के प्रमुख भेद कार्यालय में बाहर से आनेवाले पत्र आदि अथवा कार्यालय के ही कर्मचारियों द्वारा दिए गए विविध प्रकार के प्रार्थना पत्रादि पर सक्षम अधिकारी को उस पर यथावश्यक निर्णय लेने में सहायता देने के उद्देश्य से उस विषय से संबंधित कार्यालय को नीति, कार्य की स्थिति तथा रीति … Read more

पल्लवन अथवा भाव-विस्तारण

पल्लवन अथवा भाव-विस्तारण किसी संक्षिप्त कथन का विस्तारपूर्वक सही अर्थ लिखना ही विस्तारण या पल्लवन है। बेइन के अनुसार किसी विचार को ‘अनुच्छेद में पल्लवित करने का एक विशिष्ट उद्देश्य होता है तथा कार्य में अप्रासंगिकता एवं विषयांतरण का अभाव होना चाहिए। विस्तारण को पल्लवन भी कहते हैं। किसी लोकोक्ति, भावपूर्ण वाक्य, नीति-वचन अथवा सूक्ति … Read more

संक्षेपण का अर्थ एवं परिभाषा

संक्षेपण का अर्थ एवं परिभाषा किसी विस्तृत विवरण, विस्तृत आख्या, वक्तव्य, प्रतिवेदन पत्र व्यवहार तथा लेख आदि के तथ्यों एवं निर्देशों का सुनियोजित सुरूचिपूर्ण संयोजन और समस्त अनिवार्य, उपयोगी तथा मूल तथ्यों का प्रभावपूर्ण संक्षिप्त संकलन संक्षेपण कहलाता है। इसे संक्षिप्त- लेखन, सारांश । सार-लेखन, संक्षिप्तीकरण भी कहा जाता है। संक्षेपण में अप्रासंगिक, असम्बद्ध, पुनरावृत्ति … Read more

भवानी प्रसाद मिश्र

भवानी प्रसाद मिश्र 1. है गीत बेचना वैसे बिल्कुल पाप  क्या करूँ, मगर लाचार हारकर गीत बेचता हूँ। जी हाँ, हुजूर मैं गीत बेचता हूँ।  भवानी प्रसाद मिश्र हिंदी के वरिष्ठ और गंभीर कवि के रूप में जाने जाते हैं। गीत-फरोश उनकी अत्यंत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण कविता है। । इस कविता में दीनता के कारण … Read more

हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन 1. लाल सुरा की धार लपट-सी कह न इसे देना ज्वाला,  फेनिल मदिरा है मत इसको कह देना उर का छाला,  दर्द नशा है इस मदिरा का विगत स्मृतियाँ साकी हैं ?  पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला ।। हिंदी साहित्य में जो चंद रचनाएं अत्यंत लोकप्रिय हुई हैं उनमें … Read more

महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा 1. विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात !  वेदना में जन्म करुणा में मिला आवास, अश्रु चुनता दिवस इसका अश्रु गिनती रात ! जीवन विरह का जलजात ! छायावादी कवयित्री शीर्षक गीत से गृहीत है। यहाँ महादेवी की कविता करुणा की महागाथा है। व्याख्येय काव्यांश महादेवी वर्मा रचित ‘विरह का जलजात जीवन’ … Read more

सुमित्रानन्दन पंत

सुमित्रानन्दन पंत  प्रथम रश्मि का आना रंगिणी, तूने कैसे पहचाना ?  कहाँ, कहाँ है बाल-विहंगिनी। पाया तूने यह गाना ? सुमित्रानन्दन पंत छायावाद के सर्वाधिक सुकमार कवि के रूप में जाने जाते हैं। प्रकृति की गोद में पले-बढ़े पंत की कविताओं में प्रकृति अपने विविध रंगों के साथ रच-पच कर आती है। पंत का काव्य … Read more

धर्मवीर भारती : एक परिचय

धर्मवीर भारती : एक परिचय  धर्मवीर भारती का बचपन बहुत ही दारूण गरीबी में बीता। उनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। सन् 1942 के आंदोलन में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। फलस्वरूप एक वर्ष तक पढ़ाई रूक गई। — एम.ए. की पढ़ाई करते समय भारती ‘अभ्युदय’ पत्रिका से जुड़ गए। सन् 1948 में ‘संगक’ नाम … Read more