राष्ट्र-निर्माण में साहित्य का महत्व और प्राण से नहीं कर शरीर के महत्व
राष्ट्र-निर्माण में साहित्य का महत्व और प्राण से नहीं कर शरीर के महत्व जिस प्रकार शब्द से अर्थ को और अर्थ से शब्द को तथा शरीर से प्राण को शरीर को पृथक् नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार हम राष्ट्र को भी साहित्य से पृथक् सकते और न साहित्य को राष्ट्र से । जिस प्रकार … Read more