वेदना और कल्पना : भाव-सौंदर्य एवं शिल्प-सौंदर्य

वेदना और कल्पना : भाव-सौंदर्य एवं शिल्प-सौंदर्य प्रगतिवाद और नयी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर गजानन माधव मुक्तिबोध की आरंभिक कविताओं में छायावाद का प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित होता है। वैसे बाद में मुक्तिबोध छायावादी भावुकता के विरूद्ध ठोस यथार्थ की कविताएं लिखने लगे। लेकिन ‘वेदना और कल्पना’ में छायावादी रूझान से इंकार नहीं किया जा सकता … Read more