हिन्दी साहित्य में गीतिकाव्य परम्परा-उद्भव और विकास

हिन्दी साहित्य में गीतिकाव्य परम्परा-उद्भव और विकास जब मानव के व्यक्तिगत अनुभव, भावावेश में संगीतमय होकर कोमलकांत पदावली के  माध्यम से अभिव्यक्त होते हैं, उन्हें गीत कहते हैं। भारतीय समस्त साहित्य ही गेय होता था, इसीलिए  गीतिकाव्य का भारतीय साहित्य में कोई पृथक् अस्तित्व नहीं रहा । जैसा कि अंग्रेजी में गीति को ‘लिरिक’ कहते … Read more