नारीवाद की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

नारीवाद की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। उत्तर – नारीवाद-20वीं शताब्दी में नारीवाद का आरम्भ 1960 में साइमन डी. बुईस (Simon D. Buois) की पुस्तक सेकण्ड सेक्स (Second Sex) के विचारों से हुई। नारीवाद, नारी मुक्ति पर आधारित है। नारीवाद का प्रमुख दर्शन है”यदि नारी मुक्त नहीं होगी तो वह अपनी सहभागिता कैसे निश्चित करेगी।” नारीवाद … Read more

रूढ़िवद्धता तथा लिंगीय पहचान के प्रकार बताइये।

रूढ़िवद्धता तथा लिंगीय पहचान के प्रकार बताइये। उत्तर–रुदिबद्धता तथा लिंगीय पहचान को हम निम्नलिखित प्रकार देख सकते हैं (1) जीवित पुत्र का मुख देखने से नरक से मुक्ति तथा पितृऋण से छुटकारा पाने की मान्यता (2) पूर्वजों को पिण्डदान इत्यादि का सम्पादन पुरुष के द्वारा ही होना। (3) अन्तिम संस्कार इत्यादि का सम्पादन पुरुष के … Read more

वर्तमान समय में जेण्डर के पाठ्यचर्या को कैसे तैयार किया जाना चाहिए ?

वर्तमान समय में जेण्डर के पाठ्यचर्या को कैसे तैयार किया जाना चाहिए ? उत्तर – वर्तमान समय में जेण्डर के पाठ्यचर्या को तैयार करना— पाठ्य पुस्तकों एवं उसकी विषय-वस्तु में भी लिंग का प्रभाव पड़ता है। पाठ्य-पुस्तक की विषय-वस्तु का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव अधिगमकर्त्ता पर पड़ता है एवं उसी के अनुसार आने वाले समाज … Read more

भारत में जेण्डर विभेद क्या है ?

भारत में जेण्डर विभेद क्या है ? उत्तर  – भारत में जेण्डर (लिंग) विभेद भारत में लिंग भेद निम्नलिखित प्रकार से होता है (1) पुरुष लिंग–पुरुष जाति का बोध उनकी शारीरिक बनावट, रहन-सहन, विचार तथा भावों से प्रकट होता है। पुरुष स्त्रियों की अपेक्षा कठोर तथा आध्यात्मिक विचार के होते हैं। पुरुषों के रहन-सहन एवं … Read more

विद्यालय जेण्डर विभेदक को समझाइये।

विद्यालय जेण्डर विभेदक को समझाइये। उत्तर-विद्यालय जेण्डर विभेदक–निम्नलिखित हैं (1) क्षेत्र–व्यवहार में परिवार–पुरुषमहत्त्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान, महिलाएँ- पर्दा व्रत उपवास समाज – पुरुष स्वतंत्रता/गतिशीलता, महिलाएँ- रक्षिता, अगतिशील, आचार संहिता व पहनावा, समाज द्वारा निर्धारित अर्थव्यवस्था–पुरुष- रोजगार ओवर टाइम आगे बढ़ना, महिलाएँआंशिक रोजगार पहले छँटनी वैवाहिक/प्रसूति लाभों से वंचित राजव्यवस्था पुरुष हितरक्षक नीति निर्माता, महिलाएँ-समर्थक गतिशील नहीं। … Read more

भारत में जाति व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।

भारत में जाति व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए। उत्तर—भारत में जाति व्यवस्था—भारत में जाति व्यवस्था लोगों को चार अलग-अलग श्रेणियों—–—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बाँटती है। जाति में एक वंशानुगत समूह होता है जो अपनी अपनी सामाजिक स्थिति को परिभाषित करते हैं। पहले भारत में हर व्यक्ति की जाति अपने व्यवसाय में रहना होता था। … Read more

जेण्डर का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए।

जेण्डर का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए। उत्तर- जेण्डर का अर्थ लिंग मुख्यतः किसी भी समाज का सबसे महत्त्वपूर्ण सैद्धान्तिक संगठन है। मानव का जन्म दो रूपों में होता है–स्त्री एवं पुरुष। इन्हें प्रारम्भिक अवस्था में बालक एवं बालिका अथवा लड़का तथा लड़की कहा जाता है। बालक एवं बालिकाओं की शारीरिक संरचना में विभेद पाया जाता … Read more

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले आधारों व कारकों का वर्णन कीजिए।

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले आधारों व कारकों का वर्णन कीजिए। उत्तर  – पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक  – पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं (1) शिक्षा व्यवस्था प्रणाली–शिक्षा के इतिहास से यह विदित होता है कि अतीत काल से ही शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम को प्राय: लीचला तथा परिवर्तनशील कहा है। … Read more

पाठ्यक्रम विकास एवं क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका और समर्थन का वर्णन कीजिए।

पाठ्यक्रम विकास एवं क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका और समर्थन का वर्णन कीजिए। उत्तर–पाठ्यचर्या निर्माण प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिकाजॉन ई केर ने पाठ्यचर्या के चार प्रमुख अंग बताये हैं, जो परस्पर पूर्ण रूप से संबंधित हैं (1) पाठ्यचर्या के उद्देश्य,  (2) ज्ञान,  (3) सीखने के अनुभव, (4) मूल्यांकन । इन सभी अंगों पर ध्यान … Read more

अनुशासनिक ज्ञान पर एक लेख लिखिए।

अनुशासनिक ज्ञान पर एक लेख लिखिए। उत्तर- अनुशासनिक ज्ञान–शीर्षक का अध्ययन करने से पूर्व, हमें Disciplinary शब्द पर हमारा ध्यान केन्द्रित करना चाहिये। सामान्यतया “Discipline” से तात्पर्य “वह अभ्यास या प्रशिक्षण है जिससे हम मानवों को नियमों और कानूनों का अनुसरण करना सिखाते हैं, इसमें दण्ड भी शामिल है।” इसमें व्यवहार और स्थिति को नियंत्रित … Read more