‘आंसू’ का कला पक्ष

‘आंसू’ का कला पक्ष  ‘आंसू’ का कला पक्ष कला की दृष्टि से ‘आंसू’ एक श्रेष्ठ गीतिकाव्य है। इसमें एक और यदि भावनाओं की तीव्रता, आत्मपरकता, दार्शनिकता तथा उदात्त कल्पना वैभव है तो दूसरी ओर चारू उपमान योजना, विलक्षण प्रतीक विधान तथा उक्ति वैचित्र्य भी स्पष्ट है। छायावादी कलापक्ष का प्रौढ़ एवं परिष्कृत रूप ‘आंसू’ काव्य … Read more

‘आँसू’ : विषय-वस्तु एवं भाव पक्ष

‘आँसू’ : विषय-वस्तु एवं भाव पक्ष  ‘आँसू’ : विषय-वस्तु एवं भाव पक्ष ‘आँसू’ हिन्दी साहित्य का एक श्रेष्ठ प्रणय-मूलक विरह काव्य है। इसमें कवि ने अपने व्यक्तिगत जीवन के वेदनामय क्षणों को मूर्त रूप दिया है। वेदना से पूर्ण होने पर भी इसमें एक आशावादी संदेश दिया गया है, भावनाओं का उदात्रीकरण किया गया है। … Read more

जयशंकर प्रसाद : संक्षिप्त जीवनी | जयशंकर प्रसाद : साहित्यिक जीवन

जयशंकर प्रसाद : संक्षिप्त जीवनी | जयशंकर प्रसाद : साहित्यिक जीवन जयशंकर प्रसाद : संक्षिप्त जीवनी आप छायावाद के बारे में थोड़ा बहुत जान गए हैं। थोड़ी और रोचक जानकारी दूसरे छायावादी कवि सुमित्रानन्दन पंत को पढ़ते हुए मिलेगी। यहाँ आप जयशंकर प्रसाद की जिंदगी के उतार चढ़ाव को देखेंगे। इस उतार-चढ़ाव में आपको यह … Read more

छायावाद क्या है? | छायावाद : उद्भव और विकास

छायावाद क्या है? | छायावाद : उद्भव और विकास  छायावाद : उद्भव और विकास छायावाद के जन्म के संबंध में कई मत प्रचलित हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का मंतव्य है, “हिन्दी कविता की नयी धारा (छायावाद) का प्रवर्तक इन्हीं को विशेषत: मैथिलीशरण गुप्त और मुकुटधर पाण्डेय को समझना चाहिए।” शुक्लजी के अनुसार छायावाद का जन्म-काल … Read more