‘दीन’ कविता का भव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य

‘दीन’ कविता का भव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य ‘दीन’ कविता का भव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य परदुखकातरता निराला की कविता का मुख्य स्वर है। उनकी अनेक रचनाओं में संसार के दुखों को अपने भीतर समेट लेने की आतुरता दिखायी देती है। निराला की दृष्टि में कविता का महत्व सामाजिकता का निर्वाह करने में है। मानव … Read more

निराला की लंबी कविताओं का वैशिष्ट्य

निराला की लंबी कविताओं का वैशिष्ट्य अंग्रेजी कवि डब्लू. बी. वीट्स ने लिखा है, “जब हम अपने से बाहर संघर्ष करते हैं तो कथा साहित्य की सृष् िहोती है और अपने आप से लड़ते हैं तो गीतिकाव्य की। लेकिन एक तीसरी स्थिति भी होती है जब हम अपने आप से लड़ते हुए बाहरी स्थिति से … Read more

प्रिय छोड़कर बंधनमय छंदों की छोटी राह : निराला की काव्यगत विशेषताएं

प्रिय छोड़कर बंधनमय छंदों की छोटी राह : निराला की काव्यगत विशेषताएं प्रिय छोड़कर बंधनमय छंदों की छोटी राह : निराला की काव्यगत विशेषताएं निराला आधुनिक हिंदी कविता के इतिहास में स्वतंत्र काव्य-मार्ग की खोज करनेवाले एक ऐसे महत्वपूर्ण कवि हैं, जिनमें परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व का मार्मिक साक्ष्य मौजूद है। स्वच्छंदतावाद और यथार्थवाद … Read more

दुख ही जीवन की कथा रही (जीवन वृत्त )

दुख ही जीवन की कथा रही (जीवन वृत्त ) दुख ही जीवन की कथा रही (जीवन वृत्त ) माघ शुक्ल ।।, संवत् 1955, तद्नुसार 29 फरवरी, 1899 को महिषादल बंगाल में एक ऐसे महाकवि का जन्म हुआ जिसने हिंदी कविता को एक नयी दिशा दी। भव्य. गौर और गठीले शरीर के धनी इस महाकवि का … Read more

पारिभाषिक शब्दावली :

पारिभाषिक शब्दावली : पारिभाषिक शब्दावली : 1. पूँजीवाद उत्पादन के साधनों पर वैयक्तिक अधिक के सिद्धांत पर आधारित एवं सामन्तशाही के ध्वंस पर प्रतिष्ठित अर्थ-व्यवस्था पूँजीवाद के नाम से प्रसिद्ध है। पूँजीवाद शब्द की उद्भावना 19वीं सदी के पूर्वाद्ध में इस अर्थव्यवस्था के समाजवादी आलोचकों ने की थी। यूरोप में प्रायः औद्योगिक क्रांति (18वीं-19वीं सदी) … Read more

चिंता : कथावस्तु एवं रूप

चिंता : कथावस्तु एवं रूप चिंता : कथावस्तु एवं रूप ‘चिंता’ कामायनी महाकाव्य का प्रथम सर्ग है। ‘कामायनी’ के अन्य सर्गों की तरह इस सर्ग का नामकरण भी मानवीय भावना के आधार पर किया गया है। कामायनी महाकाव्य में मानव सृष्टि के उदय और विकास की जो कथा प्रस्तुत हुई है, उस कथा का आरंभिक … Read more

कामायनी : परिचय एवं महत्व

कामायनी : परिचय एवं महत्व कामायनी : परिचय एवं महत्व ‘चिन्ता’ कामायनी महाकाव्य का पहला सर्ग है। चिन्ता सर्ग को ठीक-ठीक समझने के लिए कामायनी को समझना आवश्यक है। ‘कामायनी’ जयशंकर प्रसाद की ही नहीं कदाचित छायावाद युग की सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है। प्रौढता के विन्दु पर पहुँचे हुए कवि की यह अन्यतम रचना … Read more

मधुमय देश : भाव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य

मधुमय देश : भाव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य मधुमय देश : भाव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य ‘चंद्रगुप्त’ जयशंकर प्रसाद रचित प्रसिद्ध नाटकों में एक है। प्रसाद के कई प्रसिद्ध गीत उनके नाटकों में प्रयुक्त हुए हैं। ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ चंद्रगुप्त नाटक के द्वितीय अंक के प्रथम दृश्य में ग्रीक राजकुमारी का लिया गाती … Read more

शेरसिंह का शस्त्र समर्पण : कथावस्तु

शेरसिंह का शस्त्र समर्पण : कथावस्तु शेरसिंह का शस्त्र समर्पण : कथावस्तु शेरसिंह का शस्त्र समर्पण जयशंकर प्रसाद की अत्यंत महत्वपूर्ण रचना है जो उनको प्रसिद्ध संकलन ‘लहर’ में संकलित है। यह एक ऐतिहासिक प्रगति है। पंजाब केसरी महाराजा रणजीत सिंह के शासन काल में उनके पास सैन्य शक्ति पर्याप्त थी। उनके कुशल नेतृत्व में … Read more

लहर : एक परिचय

लहर : एक परिचय लहर : एक परिचय लहर में जयशंकर प्रसाद की प्रौदता के दर्शन होते हैं। इसका प्रकाशन 1933 ई0 में हुआ। ‘लहर’ की समस्त कविताओं को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। एक तो स्फुट कविताएं हैं, जिनकी मुख्य भूमिका गीतात्मक है। संग्रह के अंत में अशोक की चिंता, शेरसिंह … Read more