विद्यालय जेण्डर विभेदक को समझाइये।

विद्यालय जेण्डर विभेदक को समझाइये। उत्तर-विद्यालय जेण्डर विभेदक–निम्नलिखित हैं (1) क्षेत्र–व्यवहार में परिवार–पुरुषमहत्त्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान, महिलाएँ- पर्दा व्रत उपवास समाज – पुरुष स्वतंत्रता/गतिशीलता, महिलाएँ- रक्षिता, अगतिशील, आचार संहिता व पहनावा, समाज द्वारा निर्धारित अर्थव्यवस्था–पुरुष- रोजगार ओवर टाइम आगे बढ़ना, महिलाएँआंशिक रोजगार पहले छँटनी वैवाहिक/प्रसूति लाभों से वंचित राजव्यवस्था पुरुष हितरक्षक नीति निर्माता, महिलाएँ-समर्थक गतिशील नहीं। … Read more

भारत में जाति व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।

भारत में जाति व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए। उत्तर—भारत में जाति व्यवस्था—भारत में जाति व्यवस्था लोगों को चार अलग-अलग श्रेणियों—–—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बाँटती है। जाति में एक वंशानुगत समूह होता है जो अपनी अपनी सामाजिक स्थिति को परिभाषित करते हैं। पहले भारत में हर व्यक्ति की जाति अपने व्यवसाय में रहना होता था। … Read more

जेण्डर का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए।

जेण्डर का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए। उत्तर- जेण्डर का अर्थ लिंग मुख्यतः किसी भी समाज का सबसे महत्त्वपूर्ण सैद्धान्तिक संगठन है। मानव का जन्म दो रूपों में होता है–स्त्री एवं पुरुष। इन्हें प्रारम्भिक अवस्था में बालक एवं बालिका अथवा लड़का तथा लड़की कहा जाता है। बालक एवं बालिकाओं की शारीरिक संरचना में विभेद पाया जाता … Read more

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले आधारों व कारकों का वर्णन कीजिए।

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले आधारों व कारकों का वर्णन कीजिए। उत्तर  – पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक  – पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं (1) शिक्षा व्यवस्था प्रणाली–शिक्षा के इतिहास से यह विदित होता है कि अतीत काल से ही शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम को प्राय: लीचला तथा परिवर्तनशील कहा है। … Read more

पाठ्यक्रम विकास एवं क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका और समर्थन का वर्णन कीजिए।

पाठ्यक्रम विकास एवं क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका और समर्थन का वर्णन कीजिए। उत्तर–पाठ्यचर्या निर्माण प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिकाजॉन ई केर ने पाठ्यचर्या के चार प्रमुख अंग बताये हैं, जो परस्पर पूर्ण रूप से संबंधित हैं (1) पाठ्यचर्या के उद्देश्य,  (2) ज्ञान,  (3) सीखने के अनुभव, (4) मूल्यांकन । इन सभी अंगों पर ध्यान … Read more

अनुशासनिक ज्ञान पर एक लेख लिखिए।

अनुशासनिक ज्ञान पर एक लेख लिखिए। उत्तर- अनुशासनिक ज्ञान–शीर्षक का अध्ययन करने से पूर्व, हमें Disciplinary शब्द पर हमारा ध्यान केन्द्रित करना चाहिये। सामान्यतया “Discipline” से तात्पर्य “वह अभ्यास या प्रशिक्षण है जिससे हम मानवों को नियमों और कानूनों का अनुसरण करना सिखाते हैं, इसमें दण्ड भी शामिल है।” इसमें व्यवहार और स्थिति को नियंत्रित … Read more

फ्रैंकलिन बॉबिट के पाठ्यक्रम विकास प्रतिमान का वर्णन कीजिए।

फ्रैंकलिन बॉबिट के पाठ्यक्रम विकास प्रतिमान का वर्णन कीजिए। उत्तर- फ्रैंकलिन बॉबिट के पाठ्यक्रम विकास प्रतिमानशिकागो विश्वविद्यालय में शैक्षिक प्रशासन के प्रोफेसर फ्रैंकलिन बॉबिट ने 20वीं शताब्दी के प्रथम तीन दशकों में पाठ्यचर्या का विशिष्टीकरण कर शिक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। बॉबिट का विचार था कि अधिगम उद्देश्यों के साथ अन्य क्रियाओं को भी सामूहिक … Read more

शिक्षण अधिगम वृद्धि में प्रयोगशाला की भूमिका की विवेचना कीजिए।

शिक्षण अधिगम वृद्धि में प्रयोगशाला की भूमिका की विवेचना कीजिए। उत्तर- शिक्षण अधिगम वृद्धि में प्रयोगशाला की भूमिकाप्रयोगशालाएँ केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, अपितु शिक्षकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी होती हैं। प्रयोगशालाएँ शिक्षण एवं अधिगम में निम्न प्रकार सहायक हो सकती हैं (1) इनमें विद्यार्थियों को स्वयं करके सीखने का मौका … Read more

ज्ञान और बोध (समझ) पर एक लेख लिखिए।

ज्ञान और बोध (समझ) पर एक लेख लिखिए। उत्तर- ज्ञान और समझ (बोध) ज्ञान वह माध्यम है जिसमें किसी तथ्य, वस्तु एवं अवधारणा को उसी रूप में समझा जा सकता है जिस रूप में वह है इसका आशय ‘जानने’ से है। समझ या बोध प्राप्त ज्ञान की प्रति लचीले ढंग से प्रदर्शन करने की योग्यता … Read more

ज्ञान के स्रोतों के नाम लिखिए। किसी एक की व्याख्या कीजिए।

ज्ञान के स्रोतों के नाम लिखिए। किसी एक की व्याख्या कीजिए। उत्तर-ज्ञान के स्रोत ज्ञान के स्रोत निम्नलिखित हैं (1) प्राथमिक स्रोत (2) द्वितीयक स्रोत–(i) सत्तात्मक स्रोत, (ii) अप्रमाणिक स्रोत(a) अनुभवजन्य ज्ञान (b) इन्टरनेट से प्राप्त सामग्री। (3) सामाजिक अन्तःक्रिया (4) परम्पराओं एवं कक्षाओं से प्राप्त ज्ञान (5) अन्तर्राष्ट्रीय अन्तःक्रिया (6) अन्तः प्रज्ञा अथवा अन्तर्दृष्टि … Read more