स्वदेशी कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

स्वदेशी कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- प्रस्तुत पद में स्वदेशी भावना को जागृत करने का पूर्ण प्रयास किया गया है। इसमें मृतप्राय स्वदेशी भाव के प्रति रुझान उत्पन्न करने हेतु प्रेरित किया गया । है। अतः स्वदेशी शीर्षक पूर्णतः सार्थक है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे … Read more

कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती ?

कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती ? उत्तर :- कवि को भारत में स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि यहाँ के लोग विदेशी रंग में रंगे हैं। खान-पान, बोल-चाल, हाट-बाजार अर्थात् सम्पूर्ण मानवीय क्रिया-कलाप में अंग्रेजियत ही अंग्रेजियत है। अत: कवि कहते हैं कि भारत में भारतीयता दिखाई नहीं पड़ती है। हमसे जुड़ें, … Read more

नेताओं के बारे में कविवर ‘प्रेमघन’ की क्या राय है?

नेताओं के बारे में कविवर ‘प्रेमघन’ की क्या राय है? उत्तर :- आज देश के नेता, देश के मार्गदर्शक भी स्वदेशी वेश-भूषा, बोल-चाल से परहेज करने लगे हैं। अपने देश की सभ्यता-संस्कृति को बढ़ावा देने के बजाय । पाश्चात्य सभ्यता से स्वयं प्रभावित दिखते हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे … Read more

कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खींचता है ?

कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खींचता है ? उत्तर :- भारत की जनता सदियों से, युगों-युगों से राजा के अधीनस्थ रही है लेकिन कवि ने कहा है कि चिरकाल से अंधकार में रह रही जनता राजतंत्र को उखाड़ फेंकने के स्वप्न देख रही है। राजतंत्र समाप्त होगा और जनतंत्र कायम होगा। राजा … Read more

कवि समाज के किस वर्ग की आलोचना करता है, और क्यों ?

कवि समाज के किस वर्ग की आलोचना करता है, और क्यों ? उत्तर :- उत्तर भारत में एक ऐसा समाज स्थापित हो गया है जो अंग्रेजी बोलने में शान की बात समझता है। अंग्रेजी रहन-सहन, विदेशी ठाट-बाट, विदेशी बोलचाल को अपनाना विकास मानते हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click … Read more

कवि ने “डफाली’ किसे कहा है और क्यों ?

कवि ने “डफाली’ किसे कहा है और क्यों ? उत्तर :- जिन लोगों में दास-वृत्ति बढ़ रही है, जो लोग पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति की दासता के बंधन में बँधकर विदेशी रीति-रिवाज के बने हुए हैं उनको कवि डफाली की संज्ञा देते हैं. क्योंकि वे विदेश की पाश्चात्य संस्कृतिक की, विदेशी वस्तुओं की, अंग्रेजी की झूठी … Read more

सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

सप्रसंग व्याख्या कीजिए: अति सनेह को ………………. बाँक नहीं, तहाँ साँचे चलें…………… निसाँक नहीं। उत्तर :- प्रस्तुत सवैया में रीतिकालीन काव्यधारा के प्रमुख कवि घनानंद-रचित ‘अति सधो को मारग है’, से उद्धृत है इसमें कवि प्रेम की पीड़ा एवं प्रेम की भावना के सरल और स्वाभाविक मार्ग का विवेचन करते हैं। कवि कहते हैं कि … Read more

‘कछ मेरियौ पीर हि परसौ’ की व्याख्या करें।

‘कछ मेरियौ पीर हि परसौ’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पक्ति हिन्दी साहित्य की पाठय-पस्तक से कवि घनानंद-रचित “मो अँसुवानिहिं लै बरसौ” पाठ से उद्धत है। प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि परोपकारी बादल से निवेदन किये हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में कवि कहते हैं कि हे घन ! तुम जीवनदायक हो, परोपकारी हो, … Read more

‘यहाँ एक तैं दसरौ औंक नहीं की व्याख्या करें।

‘यहाँ एक तैं दसरौ औंक नहीं की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पक्ति हिन्दी साहित्य की पाठय-पस्तक के कवि घनानंद द्वारा राचत आत सूधी सनेह को मारग है” पाठ से उद्धत है। इसके माध्यम से कवि प्रमा आर प्रयों का एकाकार करते हुए कहते हैं कि प्रेम में दो का पह अलग-अलग नहीं रहती, बल्कि … Read more

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?

कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ? उत्तर :- कवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं ‘मधुर बताते हैं। ये कहते हैं कि प्रेममार्ग पर चलना सरल है । इसपर चलने के लिए बहुत अधिक , छल-कपट की आवश्यकता नहीं है। प्रेमपथ पर … Read more