सामाजिक विभेदों का लोकतांत्रिक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

सामाजिक विभेदों का लोकतांत्रिक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है ? उत्तर- सामाजिक विभेदों का लोकतांत्रिक राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अंगरेजों ने ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति का सहारा लेकर भारत में सामाजिक विभेद को बढ़ाया और लगभग दो सौ वर्षों तक यहाँ शासन किया। वर्तमान समय में भी राजनीतिज्ञों के लिए … Read more

लोकतांत्रिक व्यवस्था में नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था से आप क्या समझते हैं ?

लोकतांत्रिक व्यवस्था में नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था से आप क्या समझते हैं ? उत्तर- सरकार के कई महत्त्वपूर्ण अंग होते हैं, जो सत्ता के भिन्न-भिन्न रूपों का प्रयोग करते हैं। जैसे न्याय संबंधी कार्य न्यायपालिका, कानूनों के निर्माण संबंधी कार्य विधायिका और कानून का पालन संबंधी कार्य कार्यपालिका। ये त्रिअंगी बँटवारा सरकार के अंगों की … Read more

लोकतंत्र विविधताओं में सामंजस्य कैसे स्थापित करता है ?

लोकतंत्र विविधताओं में सामंजस्य कैसे स्थापित करता है ? उत्तर- लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का सबसे बड़ा गुण है कि इसमें विविधताओं में सामंजस्य स्थापित करने की अभूतपूर्व क्षमता होती है। लोकतांत्रिक समाज में विभिन्न समूहों और वर्गों के लोग निवास करते हैं और उनमें टकराव होता. रहता है। इन टकरावों में सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता … Read more

भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधारों को पुस्तकों एवं पत्रिकाओं ने – किस प्रकार बढ़ावा दिया?

भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधारों को पुस्तकों एवं पत्रिकाओं ने – किस प्रकार बढ़ावा दिया? उत्तर ⇒ 18वीं तथा 19वीं शताब्दी में प्रेस ज्वलंत राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक प्रश्नों को उठानेवाला एक सशक्त माध्यम बन गया। 19वीं सदी में बंगाल में “भारतीय पुनर्जागरण” हुआ। इससे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ। परंपरावादी और नई विचारधारा रखनेवालों … Read more

औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय प्रेस को प्रतिबंधित करने के लिए क्या किया ?

औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय प्रेस को प्रतिबंधित करने के लिए क्या किया ? उत्तर ⇒ औपनिवेशिक काल में प्रकाशन के विकास के साथ-साथ इसे नियंत्रित करने का भी प्रयास किया। ऐसा करने के पीछे दो कारण थे—पहला, सरकार वैसी कोई पत्र-पत्रिका अथवा समाचार पत्र मुक्त रूप से प्रकाशित नहीं होने देना चाहती थी जिसमें सरकारी व्यवस्था … Read more

फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में मुद्रण की भूमिका की विवेचना करें।

फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में मुद्रण की भूमिका की विवेचना करें। उत्तर ⇒ फ्रांस की क्रांति में बौद्धिक कारणों का भी काफी महत्त्वपूर्ण योगदान था। फ्रांस के लेखकों और दार्शनिकों ने अपने लेखों और पुस्तकों द्वारा लोगों में नई चेतना जगाकर क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार कर दी। मुद्रण ने निम्नलिखित प्रकारों से फ्रांसीसी क्रांति … Read more

राष्ट्रवादी आंदोलन में उर्दू प्रेस या उर्दू पत्रकारिता की भूमिका की चर्चा करें।

राष्ट्रवादी आंदोलन में उर्दू प्रेस या उर्दू पत्रकारिता की भूमिका की चर्चा करें। उत्तर ⇒ भारत में 1910-1920 के बीच उर्दू पत्रकारिता का विकास हुआ। मौलाना आजाद के संपादन में 1912 में अल हिलाल तथा 1913 में अल बिलाग का कलकत्ता से प्रकाशन प्रारंभ हुआ। मो० अली ने अंग्रेजी में कामरेड तथा उर्दू में हमदर्द का … Read more

मुद्रण यंत्र की विकास यात्रा को रेखांकित करें। यह आधुनिक स्वरूप में कैसे पहुँचा?

मुद्रण यंत्र की विकास यात्रा को रेखांकित करें। यह आधुनिक स्वरूप में कैसे पहुँचा? उत्तर ⇒ मुद्रण कला के आविष्कार और विकास का श्रेय चीन को जाता है। 1041 ई० में एक चीनी व्यक्ति पि-शेंग ने मिट्टी के मुद्रा बनाए। इन अक्षर मुद्रों को साजन कर छाप लिया जा सकता था। इस पद्धति ने ब्लॉक प्रिंटिंग … Read more

19वीं शताब्दी में भारत में प्रेस के विकास को रेखांकित करें।

19वीं शताब्दी में भारत में प्रेस के विकास को रेखांकित करें। उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी में प्रेस ज्वलंत राजनीतिक एवं सामाजिक प्रश्नों को उठानेवाला एक सशक्त माध्यम बन गया । आधुनिक भारतीय प्रेस का आरंभ 1766 में विलियम बोल्टस द्वारा प्रकाशित समाचार-पत्र से माना जाता है। 1780 में जेम्स आगस्टस हिक्की ने अंग्रेजी भाषा में ‘बंगाल … Read more

मद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया।

मद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया। उत्तर ⇒ मुद्रण क्रांति ने आम लोगों को जिन्दगी ही बदल दी मुद्रण क्रांति के करण छापाखानों की संख्या में भारी वृद्धि हुई। जिसके परिणामस्वरूप पर निर्माण में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप किताबें समाज के हर तबकों के बीच पहुँच पायी। किताबों की पहुंच … Read more