हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती। कैसे ?

हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती। कैसे ? उत्तर- यह कोई जरूरी नहीं कि हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप ले ले। सामाजिक विभिन्नता के कारण लोगों में विभेद की विचारधारा अवश्य बनती है, परंतु यही विभिन्नता कहीं-कहीं पर समान उद्देश्य के कारण मूल का काम भी करती है। सामाजिक विभाजन एवं … Read more

परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करता है ?

परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करता है ? उत्तर- अधिकांश राजनीतिक दल एवं उनके नेता अपने परिवार एवं सगे-संबंधियों को राजनीति में लाने का प्रयास करती है। यही राजनीति में परिवारवाद है। वास्तव म यह लोकतंत्र को प्रभावित करता है। सामान्यतः प्रत्येक चुनाव में विशेष कर टिकट बटवारे के समय ऐसी … Read more

जातिवाद क्या है ? क्या बिहार की राजनीति में जातिवाद हावी है ?

जातिवाद क्या है ? क्या बिहार की राजनीति में जातिवाद हावी है ? उत्तर- जातिवाद भारत की एक मुख्य सामाजिक समस्या माना जाता रहा है। जाति- व्यवस्था से ही समाज में ऊँच-नीच की भावना पैदा हुई। कर्म के आधार पर . विकसित जाति-व्यवस्था जन्म के आधार को गले लगा ली जिसका समाज पर बुरा । प्रभाव … Read more

जातिवाद के किन्हीं चार कुप्रभावों का उल्लेख करें।

जातिवाद के किन्हीं चार कुप्रभावों का उल्लेख करें। उत्तर- जातिवाद के निम्नांकित चार कुप्रभाव हैं – (i) समाज में रूढ़िवाद और सामाजिक कुरीतियों का विकास (ii) विभिन्न जातियों के लोगों द्वारा एक-दूसरे को अश्रद्धा एवं घृणा की दृष्टि से देखने के कारण लोगों के बीच असमानता एवं फूट की भावना में वृद्धि ।। (iii) जातिवाद के कारण राष्ट्र का … Read more

“सिर्फ जाति के आधार पर राजनीति करके चुनाव जीतना संभव नहीं”। स्पष्ट करें।

“सिर्फ जाति के आधार पर राजनीति करके चुनाव जीतना संभव नहीं”। स्पष्ट करें। उत्तर- लोकतंत्र विभिन्नता से भरा है, कभी भी जनता के बीच एक पार्टी या विचारधारा के ऊपर एक मत होना संभव नहीं हो पाता। ठीक उसी तरह किसी भी क्षेत्र में सिर्फ जाति के आधार पर राजनीति करके कोई चुनाव नहीं जीत सकता। … Read more

साम्प्रदायिकता के किन्हीं चार कारणों को लिखें।

साम्प्रदायिकता के किन्हीं चार कारणों को लिखें। उत्तर- साम्प्रदायवाद भारतीय समाज की एक बहुत बड़ी समस्या है जिसन समाज को न केवल कमजोर किया है, बल्कि अनेक समस्याओं को भी जन्म दिया है। इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं – (i) जिन-जिन स्थानों पर विभिन्न समुदायों के आवासीय क्षेत्र एक दूसरे स अलग है, वहाँ सामूहिक तनाव … Read more

सत्तर के दशक से आधुनिक दशक के बीच भारतीय लोकतंत्र का सफर (सामाजिक न्याय के संदर्भ में) का संक्षिप्त वर्णन करें।

सत्तर के दशक से आधुनिक दशक के बीच भारतीय लोकतंत्र का सफर (सामाजिक न्याय के संदर्भ में) का संक्षिप्त वर्णन करें। उत्तर- भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 1970 का दशक कई दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है। सन् 1971 में ,श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में काँग्रेस सत्ता में आई। उसके बाद श्रीमती गाँधी ने संविधान के बुनियादी … Read more

“भविष्य में लोकतंत्र के ऊपर जिम्मेवारियाँ और बढ़ती जाएगी स्पष्ट करें।

“भविष्य में लोकतंत्र के ऊपर जिम्मेवारियाँ और बढ़ती जाएगी स्पष्ट करें। उत्तर- लोकतंत्र विभिन्नताओं से भरा है। यहाँ पर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी नाम रखने का अधिकार है। परिणामस्वरूप यहाँ पर एक मत नहीं हो पाता और समस्या और भी जटिल हो जाती हैं। जातिवाद, धार्मिक भेदभाव, क्षेत्रवाद इत्यादि धीरे-धीरे और विकराल रूपले रहे हैं। लोकतंत्र … Read more

क्या भारतीय समाज के सामाजिक विभेद समाज में संघर्ष ‘कारण है? व्याख्या करें।

क्या भारतीय समाज के सामाजिक विभेद समाज में संघर्ष ‘कारण है? व्याख्या करें। उत्तर- भारत जैसे विशाल देश में विविधता स्वभाविक है। एक क्षेत्र में वाले विभिन्न जाति, धर्म, भाषा, संप्रदाय के लोगों के बीच विभिन्नताएँ होती सामाजिक विभेद कहलाती है। विभेद, को राष्ट्र की जीवन शक्ति बनाने के विविधता में एकता, सामंजस्य, सहिष्णुता और सहयोग … Read more

सामाजिक विभेदों का लोकतंत्र पर पड़नेवाले प्रभावों का सोदाहरण वर्णन करें।

सामाजिक विभेदों का लोकतंत्र पर पड़नेवाले प्रभावों का सोदाहरण वर्णन करें। उत्तर- सामाजिक विभेदों का प्रभाव लोकतंत्र पर अवश्य पड़ता है। यह प्रभाव प्रायः खतरनाक ही सिद्ध होता है। सामाजिक विभेदों का लोकतंत्र पर दुर्भाग्यपूर्ण प्रभाव यह है कि किसी-किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक विभेद व्यवस्था को इतना प्रभावित कर देता है कि वहाँ सामाजिक विभेदों … Read more