अशक्तता सम्बन्धी रूढ़िबद्धता पूर्वाग्रह क्या है और इसे समाप्त करने हेतु क्या प्रयास करने चाहिए ?

अशक्तता सम्बन्धी रूढ़िबद्धता पूर्वाग्रह क्या है और इसे समाप्त करने हेतु क्या प्रयास करने चाहिए ?  उत्तर— अशक्तता सम्बन्धी रूढ़िबद्धता एवं पूर्वाग्रह–समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो प्राकृतिक, जन्मजात या मानवकृत कारणों से समाज की मुख्य धारा से कट गया है। इन बालकों को समाज को मुख्य धारा में मिलाने के उद्देश्य से … Read more

आशय स्पष्ट कीजिए :

आशय स्पष्ट कीजिए : “मैं तुम्हारा वेश हूँ, तुम्हारी वृत्ति हूँ मुझे खोकर तुम अपना अर्थ खो बैठोगे ?” उत्तर :- प्रस्तत पद्यांश में कवि ने भक्त को भगवान की अस्मिता माना है। भगवान का वास्तविक स्वरूप भक्त में है। भक्त भगवान का सबकुछ है। भगवान का रूप, वेश, रंग, कार्य सब भक्त में निहित … Read more

कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।

कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें। उत्तर :- भक्त कवि रिल्के अपने प्रभु से करता है-प्रभु, जब मेरा अस्तित्व ही नहीं रहेगा, तब तुम क्या करोगे? मैं ही तुम्हारा जलपात्र हूँ, मैं ही तुम्हारी मदिरा हूँ। जब जलपात्र टूटकर बिखर जाएगा और मदिरा सूख … Read more

जातिवाद से आप क्या समझते हैं ? भारत के सम्बन्ध में जातिवाद के दोष विवेचित कीजिए।

जातिवाद से आप क्या समझते हैं ? भारत के सम्बन्ध में जातिवाद के दोष विवेचित कीजिए। उत्तर— हमारा समाज पूर्णरूप से जातियों में विभाजित है। जाति व्यक्तियों का वह समूह है, जिसके अन्तर्गत व्यक्ति को उसके जन्म के आधार पर सदस्यता दी जाती है, जिसके परिणामस्वरूप उसके अधिकार तथा कर्त्तव्य निर्धारित होते हैं। प्रत्येक जाति … Read more

कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है ? आप क्या सोचते हैं ?

कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है ? आप क्या सोचते हैं ? उत्तर :- कविता में कवि भक्त के रूप में भगवान को सम्बोधित करता है । इसमें भक्त अपने को भगवान का आश्रय, गृह स्वीकारता है। अपने में भगवान की छवि को देखता है और कहता है कि हे भगवान ! मैं भी तुम्हारे … Read more

मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए।

मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- इस कविता में कहा गया है कि मानव के अस्तित्व में ही ईश्वर का अस्तित्व है। मानवीय जीवन में ईश्वरीय अंश होता है। परमात्मा की अदृश्यतां को जीवात्मा दृश्य करता है । ईश्वर की झलक … Read more

रूढ़िवादिता किसे कहते हैं ? कक्षा-कक्ष में भाषा द्वारा रूढ़िवादिता की चुनौती को कैसे कम किया जा सकता है ?

रूढ़िवादिता किसे कहते हैं ? कक्षा-कक्ष में भाषा द्वारा रूढ़िवादिता की चुनौती को कैसे कम किया जा सकता है ?  उत्तर— रूढ़िवादिता – प्रत्येक समाज में विभिन्न प्रकार की परम्पराओं का प्रचलन होता है। ये परम्पराएँ समाज की भलाई के लिए बनाई जाती हैं। जब इन परम्पराओं के माध्यम से समाज का अहित होने लगता … Read more

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए।

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए। उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कहा गया है कि बिना भक्त के भगवान भी एकाकी और निरुपाय हैं। उनकी भगवत्ता भी भक्त की सत्ता पर ही निर्भर करती है। व्यक्ति और विराट सत्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो … Read more

कवि को किस बात की आशंका है ? स्पष्ट कीजिए।

कवि को किस बात की आशंका है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- कवि को आशंका है कि जब ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करानेवाला प्रतीक आधार या भक्त नहीं होगा तब ईश्वर का पहचान किस रूप में होगा? प्राकृतिक छवि, मानव की हृदय का प्रेम, दया, भगवद् स्वरूप है। ये सब नहीं होगा, तब उस परमात्मा … Read more

कविरेनर मारिया रिल्के ने अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है ?

कविरेनर मारिया रिल्के ने अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है ? उत्तर :- कवि अपने को भगवान का भक्त मानता है। भक्त की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कवि ने भक्त को जलपात्र और मदिरा कहा है क्योंकि जलपात्र में संग्रहित होकर भगवान अपनी अस्मिता प्राप्त करता है । इसी तरह भक्ति-रस के … Read more