कवि किसको कैसा सुख देता था ?

कवि किसको कैसा सुख देता था ? उत्तर :- कवि भगवान की कृपादृष्टि की शय्या है । कविः के नरम कपोलों पर जब भगवान की कृपादृष्टि विश्राम लेती है, तब भगवान को सुख मिलता है, आनंद मिलता है । अर्थात् भक्त भगवान का कृपापात्र होता है और भक्तरूपी पात्र से भगवान भी सुखी होते हैं। … Read more

परिवार को परिभाषित कीजिए। स्व को आकार देने में परिवार की भूमिका की विस्तृत व्याख्या कीजिए ।

परिवार को परिभाषित कीजिए। स्व को आकार देने में परिवार की भूमिका की विस्तृत व्याख्या कीजिए । उत्तर— परिवार का अर्थ एवं परिभाषाएँ–परिवार शब्द Family लैटिन शब्द ‘Famulas’ से बना है तथा यह ‘Famulas’ शब्द ‘एल्मर’ ने अपनी पुस्तक ‘Sociology of Family’ में प्रतिपादित किया । Family शब्द रोमन भाषा से निकलता है। Family शब्द … Read more

शानदार लबादा किसका गिर जाएगा, और क्यों ?

शानदार लबादा किसका गिर जाएगा, और क्यों ? उत्तर :- कवि के अनुसार भगवत्-महिमा भक्त की आस्था में निहित होता है। भक्त, भगवान का दृढाधार होता है लेकिन जब भक्तरूपी आधार नहीं होगा तो स्वाभाविक है कि भगवान की पहचान भी मिट जाएगी । भगवान का लबादा अथवा चोगा गिर जाएगा। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो … Read more

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ?

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ? उत्तर :-प्रश्नोक्त पंक्ति के माध्यम से कवि जनतारूपी देवता की बात करते हैं, क्योंकि कवि की दृष्टि में कर्म करता हुआ परिश्रमी व्यक्ति ही देवतास्वरूप है। मंदिरों-मठों में तो केवल मूर्तियाँ रहती हैं वास्तविक देवता वे … Read more

विद्यार्थी के ‘स्व के विकास’ में प्रमुख संचार माध्यमों का दायित्व बताइये।

विद्यार्थी के ‘स्व के विकास’ में प्रमुख संचार माध्यमों का दायित्व बताइये।  उत्तर— विद्यार्थी के ‘स्व के विकास’ में प्रमुख संचार माध्यमों का दायित्व – संचार माध्यमों को दो भागों में वर्गीकृत करके हम इनके दायित्वों का वर्णन कर रहे हैं— (1) प्रिन्ट मीडिया — प्रिन्ट मीडिया का महत्त्व बहुत है । विभिन्न पत्र-पत्रिकाएँ, समाचार … Read more

व्याख्या करें –

व्याख्या करें – “बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का; धुंधरू लाल पैरों में; तैरता रहूँगा बस दिन-दिन भर पानी में गंध जहाँ होगी ही भरी, घास की।” उत्तर :- प्रस्तुत अवतरण बांग्ला माहित्य के प्रख्यात कवि जीवनानंद दास द्वारा रचित “लौटकर आऊँगा फिर” कविता । से उद्धृत है। इस अंश में कवि बंगाल की … Read more

व्याख्या करें–

व्याख्या करें– “खेत हैं जहाँ धान के, बहती नदी के किनारे फिर आऊँगा लौट कर एक दिन – बंगाल में;” उत्तर :- प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के ‘लौटकर आऊँगा फिर’ शीर्षक से उद्धत हैं। इस अंश से पता चलता है कि कवि अगले जन्म में भी अपनी मातृभूमि बंगाल में ही जन्म लेना … Read more

रूढ़ियुक्तियों से क्या तात्पर्य है ? सामाजिक जीवन में इनके कार्य एवं महत्त्व को लिखिए।

रूढ़ियुक्तियों से क्या तात्पर्य है ? सामाजिक जीवन में इनके कार्य एवं महत्त्व को लिखिए।  उत्तर—  रूढ़ियुक्तियों से तात्पर्य – रूढ़ियुक्तियों का अंग्रेजी रूपान्तर ‘ Stereotype ‘ है जिसका प्रयोग सबसे पहले वाल्टर लिपमैन ने अपनी पुस्तक ‘Public Opinion’ में किया जिसका शाब्दिक अर्थ है “एक तख्ती जो साँचे का कार्य करती है ।” इससे … Read more

‘जीवनानंद दास द्वारा रचित “लौटकर आऊँगा फिर’ शीर्षक कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।

‘जीवनानंद दास द्वारा रचित “लौटकर आऊँगा फिर’ शीर्षक कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें। उत्तर :- ‘लौटक र आऊँगा फिर’ शीर्षक कविता राष्ट्रीय चेतना की कविता है जिसमें कवि का अपनी मातृभूमि तथा अपने देश की प्रकृति के प्रति उत्कट-प्रेम अभिव्यक्त हुआ है। कवि अपने नश्वर जीवन के बाद पुन: अपनी मातृभूमि बंगाल में … Read more

‘लौटकर आऊँगा फिर’ कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

‘लौटकर आऊँगा फिर’ कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- यहाँ उद्देश्य के आधार पर शीर्षक रखा गया है। कवि की उत्कट इच्छा मातृभूमि पर पुनर्जन्म की है। इससे कवि के हृदय में मातृभूमि के प्रति प्रेम दिखाई पड़ता है। शीर्षक कविता के चतुर्दिक घूमती है। शीर्षक को केन्द्र में रखकर ही … … Read more