बिहार में सेन वंश (Sen Dynasty in Bihar)

बिहार में सेन वंश (Sen Dynasty in Bihar) सेन राजवंश भारत का एक राजवंश का नाम था, जिसने १२वीं शताब्दी के मध्य से बंगाल पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। सेन राजवंश ने बंगाल पर १६० वर्ष राज किया। अपने चरमोत्कर्ष के समय भारतीय महाद्वीप का पूर्वोत्तर क्षेत्र इस साम्राज्य के अन्तर्गत आता था। इस वंश का मूलस्थान कर्णाटक था। इस … Read more

बिहार में पाल वंश (Pal Dynasty in Bihar)

बिहार में पाल वंश (Pal Dynasty in Bihar) पाल वंश (Pal/Pala Dynasty) संस्थापक – गोपाल सर्वश्रेष्ठ शासक – धर्मपाल, देवपाल पाल वंश का द्वितीय संस्थापक – महिपाल प्रथम अंतिम शासक – रामपाल उत्तर भारत में हर्षवर्धन के पतन और बंगाल क्षेत्र में शशांक के पतन के बाद बिहार-बंगाल क्षेत्र में एक शक्तिशाली वंश के रूप में पाल वंश का … Read more

बिहार में हर्यक वंश (Haryanka Dynasty in Bihar)

बिहार में हर्यक वंश (Haryanka Dynasty in Bihar) मगध एवं बिहार शब्द का प्रथम उल्लेख अथर्ववेद में हुआ है। भारत का प्रथम साम्राज्य मगध साम्राज्य को माना जाता है, जिसका संस्थापक हर्यक वंश का बिंबिसार या श्रेणिक है। बिंबिसार (544-492 ई.पू.) [Bimbisar] बौद्ध ग्रंथ महावंश के अनुसार हर्यक वंश का संस्थापक बिंबिसार 15 वर्ष की … Read more

मगध साम्राज्य के समकालीन बिहार के प्रमुख राजवंश

मगध साम्राज्य के समकालीन बिहार के प्रमुख राजवंश बिहार एक प्राकृतिक संसाधनों के परिपूर्ण राज्य रहा है, यहाँ पर आदिकाल से ही कई समुदायों, राजवंशों ने अपना राज किया। इनमें से कुछ प्रमुख राजवंश इस प्रकार है – वृहद्रथ-वंश (बृहद्रथ वंश) (Brihadratha Dynasty) संस्थापक – वृहद्रथ प्रसिद्ध राजा – जरासंध अंतिम शासक – रिपुंजय यद्यपि मगध का प्रथम … Read more

पूर्व मध्यकालीन बिहार – पालकालीन बिहार

पूर्व मध्यकालीन बिहार – पालकालीन बिहार हर्ष के साम्राज्य के विघटन के बाद आठवीं शताब्दी के मध्य में पूर्वी भारत में पाल वंश का अभ्युदय हुआ. पाल वंश का संस्थापक गोपाल (750- 770 ई.) था, जिसने इस वर्ष का अधिकार से जल्दी ही बिहार के क्षेत्र में विस्तृत कर दिया. कुछ समय के लिए पाल … Read more

परवर्ती गुप्त सम्राट और गुप्त राजवंश का अवसान (Later Gupta Emperors and the End of the Gupta Dynasty)

परवर्ती गुप्त सम्राट और गुप्त राजवंश का अवसान (Later Gupta Emperors and the End of the Gupta Dynasty) गुप्त राजवंश प्राचीन भारत के प्रमुख राजवंशों में से एक था। इतिहासकारों द्वारा इस अवधि को भारत का स्वर्ण युग माना जाता है। मौर्य वंश के पतन के बाद दीर्घकाल में हर्ष तक भारत में राजनीतिक एकता स्थापित नहीं रही। कुषाण एवं सातवाहनों ने राजनीतिक एकता लाने का … Read more

बिहार इतिहास के स्रोत (Sources of Bihar history)

बिहार इतिहास के स्रोत (Sources of Bihar history) बिहार के इतिहास के विविध स्त्रोत # बिहार के मध्यकालीन इतिहास की जानकारी हेतु अभिलेख, स्मारक, सिक्केक, चित्र और अनेक प्राचीन ऐतिहासिक वस्तुएँ उपलब्ध हैं । विविध स्त्रोतों में जिला गजेटियर, लैण्ड सर्वे एवं सेटलमेण्ट रिपोर्ट आदि प्रमुख हैं । # प्रशासनिक महत्व के पत्रों के संकलन … Read more

छायावाद किसे कहते हैं? छायावादी काव्य की मुख्य विशेषताएं

छायावाद किसे कहते हैं? छायावादी काव्य की मुख्य विशेषताएं हिन्दी साहित्य के आधुनिक चरण मे द्विवेदी युग के पश्चात हिन्दी काव्य की जो धारा विषय वस्तु की दृष्टि से स्वच्छंद प्रेमभावना, पकृति मे मानवीय क्रिया कलापों तथा भाव-व्यापारों के आरोपण और कला की दृष्टि से लाक्षणिकता प्रधान नवीन अभिव्यंजना-पद्धति को लेकर चली, उसे छायावाद कहा … Read more

प्रगतिवाद किसे कहते हैं? प्रगतिवाद की विशेषताएं

प्रगतिवाद किसे कहते हैं? प्रगतिवाद की विशेषताएं प्रगतिवाद किसे कहते हैं? (pragativad kise kahte  hai) प्रगतिवाद क्या हैं प्रगतिवाद भौतिक जीवन से उदासीन आत्मनिर्भर, सूक्ष्म, अन्तर्मुखी प्रवृति के विरूद्ध प्रतिक्रिया के रूप मे, लोक विरूद्ध जगत की तार्किक प्रतिक्रिया है। प्रगतिवाद का प्रेरणा स्रोत कार्ल मार्क्स का द्वंद्वात्मक भौतिकवादी है। सामाजिक चेतना और भावबोध काव्य … Read more

प्रयोगवाद किसे कहते हैं? प्रयोगवाद की विशेषताएं

प्रयोगवाद किसे कहते हैं? प्रयोगवाद की विशेषताएं हिन्दी मे प्रयोगवाद का प्रारंभ सन् 1943 मे अज्ञेय के सम्पादन मे प्रकाशित तारसप्तक से माना जा सकता है। इसकी भूमिका मे अज्ञेय ने लिखा है-कि कवि नवीन राहों के अन्वेषी हैं।” स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात अज्ञेय के सम्पादक मे प्रतीक पत्रिका प्रकाशन हुआ। उसमे प्रयोगवाद का स्वरूप … Read more