कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।

कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें। उत्तर :- भक्त कवि रिल्के अपने प्रभु से करता है-प्रभु, जब मेरा अस्तित्व ही नहीं रहेगा, तब तुम क्या करोगे? मैं ही तुम्हारा जलपात्र हूँ, मैं ही तुम्हारी मदिरा हूँ। जब जलपात्र टूटकर बिखर जाएगा और मदिरा सूख … Read more

कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है ? आप क्या सोचते हैं ?

कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है ? आप क्या सोचते हैं ? उत्तर :- कविता में कवि भक्त के रूप में भगवान को सम्बोधित करता है । इसमें भक्त अपने को भगवान का आश्रय, गृह स्वीकारता है। अपने में भगवान की छवि को देखता है और कहता है कि हे भगवान ! मैं भी तुम्हारे … Read more

मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए।

मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- इस कविता में कहा गया है कि मानव के अस्तित्व में ही ईश्वर का अस्तित्व है। मानवीय जीवन में ईश्वरीय अंश होता है। परमात्मा की अदृश्यतां को जीवात्मा दृश्य करता है । ईश्वर की झलक … Read more

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए।

कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच के संबंध पर प्रकाश डालिए। उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कहा गया है कि बिना भक्त के भगवान भी एकाकी और निरुपाय हैं। उनकी भगवत्ता भी भक्त की सत्ता पर ही निर्भर करती है। व्यक्ति और विराट सत्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो … Read more

कवि को किस बात की आशंका है ? स्पष्ट कीजिए।

कवि को किस बात की आशंका है ? स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- कवि को आशंका है कि जब ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करानेवाला प्रतीक आधार या भक्त नहीं होगा तब ईश्वर का पहचान किस रूप में होगा? प्राकृतिक छवि, मानव की हृदय का प्रेम, दया, भगवद् स्वरूप है। ये सब नहीं होगा, तब उस परमात्मा … Read more

कविरेनर मारिया रिल्के ने अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है ?

कविरेनर मारिया रिल्के ने अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है ? उत्तर :- कवि अपने को भगवान का भक्त मानता है। भक्त की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कवि ने भक्त को जलपात्र और मदिरा कहा है क्योंकि जलपात्र में संग्रहित होकर भगवान अपनी अस्मिता प्राप्त करता है । इसी तरह भक्ति-रस के … Read more

कवि किसको कैसा सुख देता था ?

कवि किसको कैसा सुख देता था ? उत्तर :- कवि भगवान की कृपादृष्टि की शय्या है । कविः के नरम कपोलों पर जब भगवान की कृपादृष्टि विश्राम लेती है, तब भगवान को सुख मिलता है, आनंद मिलता है । अर्थात् भक्त भगवान का कृपापात्र होता है और भक्तरूपी पात्र से भगवान भी सुखी होते हैं। … Read more

शानदार लबादा किसका गिर जाएगा, और क्यों ?

शानदार लबादा किसका गिर जाएगा, और क्यों ? उत्तर :- कवि के अनुसार भगवत्-महिमा भक्त की आस्था में निहित होता है। भक्त, भगवान का दृढाधार होता है लेकिन जब भक्तरूपी आधार नहीं होगा तो स्वाभाविक है कि भगवान की पहचान भी मिट जाएगी । भगवान का लबादा अथवा चोगा गिर जाएगा। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो … Read more

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ?

“देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करते हैं और क्यों ? उत्तर :-प्रश्नोक्त पंक्ति के माध्यम से कवि जनतारूपी देवता की बात करते हैं, क्योंकि कवि की दृष्टि में कर्म करता हुआ परिश्रमी व्यक्ति ही देवतास्वरूप है। मंदिरों-मठों में तो केवल मूर्तियाँ रहती हैं वास्तविक देवता वे … Read more

व्याख्या करें –

व्याख्या करें – “बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का; धुंधरू लाल पैरों में; तैरता रहूँगा बस दिन-दिन भर पानी में गंध जहाँ होगी ही भरी, घास की।” उत्तर :- प्रस्तुत अवतरण बांग्ला माहित्य के प्रख्यात कवि जीवनानंद दास द्वारा रचित “लौटकर आऊँगा फिर” कविता । से उद्धृत है। इस अंश में कवि बंगाल की … Read more