‘नानक लीन भयो गोविंद सो, ज्यों पानी संग पानी की व्याख्या करें।

‘नानक लीन भयो गोविंद सो, ज्यों पानी संग पानी की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक के महान संत कषि गुरुनानक के द्वारा रचित “जो नर दु:ख में दुःख नहिं मान” पाठ से उद्धत हैं। इसमें कवि ब्रह्म की सत्ता की महत्ता को बताते हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति के माध्यम से कवि कहना … Read more

‘हरष शोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना’ की व्याख्या करें।

‘हरष शोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना’ की व्याख्या करें। उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के संत कवि गुरुनानक द्वारा रचित “जो नर दु:ख में दु:ख नहिं मान” शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत पंक्ति में संत गुरुनानक उपदेश देते हैं कि ब्रह्म के उपासक प्राणी को हर्ष-शोक, सुख-दुख, निंदा-प्रशंसा, मान-अपमान से … Read more

‘राम नाम बिनु अरूझि मरै’ की व्याख्या करें ।

‘राम नाम बिनु अरूझि मरै’ की व्याख्या करें । उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के महान संत कवि गुरुनानक के द्वारा लिखित “राम नाम बिनु निर्गुण जगि जनमा” शीर्षक से उद्धृत है । गुरुनानक निर्गुण, निराकार ईश्वर के उपासक तथा हिंदी की निर्गुण भक्तिधारा के प्रमुख कवि हैं। यहाँ राम नाम की … Read more

निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें :

निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें : “आसा मनसा सकल त्यागि के जग ते रहै निरासा। काम क्रोध जेहि परसे नाहिन तेहि घट ब्रह्म निवासा।।” उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश कवि गुरुनानक देव द्वारा रचित राम नाम बिनु विरुथे जगी जनमा पाठ से उद्धृत है। उपर्युक्त पंक्तियों में संत कवि नानक कहते हैं कि जिसने आशा-आकांक्षा … Read more

“जो नर दुःख में दुःख नहीं मानै’ कविता का भावार्थ लिखें।

“जो नर दुःख में दुःख नहीं मानै’ कविता का भावार्थ लिखें। उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कवि ईश्वर की निर्गुणवादी सत्ता को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य दु:ख को दुःख नहीं समझता है अर्थात् दुःखमय जीवन में भी समानरूप में रहता है उसी का जीवन सार्थक होता है। जिसके जीवन में सुख, … Read more

‘राम नाम बिनु बिस्थे जगि जनमा’ और ‘जो नर दुख में दुख नहि मानै।” कविता का सारांश लिखें।

‘राम नाम बिनु बिस्थे जगि जनमा’ और ‘जो नर दुख में दुख नहि मानै।” कविता का सारांश लिखें। उत्तर :- पाठयपुस्तक में गुरुनानक के दो पद संगृहित हैं : ‘राम नाम बिन बिरथे जगि जनमा’ और ‘जो नर दुख में दुख नहिं माने।” प्रथम पद में गुरु नानक ने बाहरी वेश-भूषा , पूजा-पाठ और कर्मकांड … Read more

आधुनिक जीवन में उपासना के प्रचलित रूपों को देखते हुए नानक के इन पदों की क्या प्रासंगिकता है ? अपने शब्दों में विचार करें।

आधुनिक जीवन में उपासना के प्रचलित रूपों को देखते हुए नानक के इन पदों की क्या प्रासंगिकता है ? अपने शब्दों में विचार करें। उत्तर :- नानक के पद में वर्णित राम-नाम की महिमा आधुनिक जीवन में प्रासंगिक है। हरि-कीर्तन सरल मार्ग है जिसमें न अत्यधिक धन की आवश्यकता है, न ही कोई बाह्याडम्बर की। … Read more

प्रथम पद के आधार पर बताएँ कि कवि ने अपने युग में धर्म साधना के कैसे-कैसे रूप देखे थे ?

प्रथम पद के आधार पर बताएँ कि कवि ने अपने युग में धर्म साधना के कैसे-कैसे रूप देखे थे ? उत्तर :- प्रथम पद में कवि के अनुसार शिखा बढ़ाना, ग्रंथों का पाठ करना, व्याकरण वाचना भस्म रमाकर साधुवेश धारण करना, तीर्थ करना, दंड कमण्डलधारी होना, वस्त्र त्याग करके नग्नरूप में घूमना कवि के युग … Read more

हरि रस से कवि का अभिप्राय क्या है ?

हरि रस से कवि का अभिप्राय क्या है ? उत्तर :- कवि राम नाम की महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि भगवान के नाम से बढ़कर अन्य कोई धर्मसाधना नहीं है। भगवत् कीर्तन से प्राप्त परमानंद को हरि रस कहा गया है। हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे .. Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click … Read more

कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ? अथवा, गुरुनानक की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ?

कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ? अथवा, गुरुनानक की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ? उत्तर :- जो प्राणी सांसारिक विषयों की आसक्ति से रहित है, जो मान-अपमान से परे है, हर्ष-शोक दोनों से जो दूर है, उन प्राणियों में ही ब्रह्म का निवास बताया गया है। काम, क्रोध, … Read more