नाट्य शिक्षण की प्रमुख प्रणालियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।

नाट्य शिक्षण की प्रमुख प्रणालियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।  उत्तर— नाट्य शिक्षण की प्रमुख प्रणालियाँ–नाट्य शिक्षण की प्रमुख प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं— (1) अर्थबोध प्रणाली–इस प्रणाली का प्रयोग प्राय: स्कूलों में किया जाता है। इस प्रणाली में शिक्षक अपेक्षित नाटक का वाचन करता है तथा पठित अंश का अर्थ भी कहता चलता है। कतिपय शिक्षक … Read more

एकाभिनय एवं मूकाभिनय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

एकाभिनय एवं मूकाभिनय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।                 अथवा मुकाभिनय की विशेषताएँ बताइए। उत्तर— एकाभिनय–अभिनय का एक अन्य स्वरूप है— एकाभिनय । इस विधा के अन्तर्गत मैच पर एक ही पात्र विभिन्न पात्रों के रूप में कार्य करता है। वह अकेला ही अन्य पात्रों की भूमिका निभाता है। एक … Read more

शिल्प मेले व कला उत्सव सौन्दर्यात्मक व कलात्मक बोध को बढ़ाने में किस प्रकार सार्थक भूमिका निभाते है ?

शिल्प मेले व कला उत्सव सौन्दर्यात्मक व कलात्मक बोध को बढ़ाने में किस प्रकार सार्थक भूमिका निभाते है ?  उत्तर— किसी भी व्यक्ति में सौन्दर्यात्मकता एवं कलात्मक संवेदना की वृद्धि में कला उत्सवों, शिल्प मेलों एवं प्रदर्शिनयों की विशिष्ट भूमिका होती है। इससे व्यक्ति में रचनात्मक शक्ति के साथ-साथ कल्पनात्मक शक्ति का भी विकास होता … Read more

‘स्वांग’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए ।

‘स्वांग’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए । उत्तर— स्वांग लोकनाट्य का एक महत्त्वपूर्ण स्वरूप है, जिसमें किसी प्रमुख पौराणिक, ऐतिहासिक या किसी प्रसिद्ध लोक चरित्र या देवी-देवताओं की नकल कर उनके अनुरूप स्वांग किया जाता है। इनके स्वांगों में चाचा- बोहरा, सेठ- सेठाणी, मियाँ – बीबी, अर्धनारीश्वर, जोगी-जोगन, कालबेलिया, मैना- गुजरी और बीकाजी के स्वांग प्रमुख … Read more

नाटक प्रदर्शन की शैक्षिक प्रासंगिकता क्या है ?

नाटक प्रदर्शन की शैक्षिक प्रासंगिकता क्या है ? उत्तर— नाटक प्रदर्शन की शैक्षिक प्रासंगिकता–नाटक बच्चों में विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक मूल्यों का विकास कर सकता है, जिसमें प्रमुख का विवरण निम्न प्रकार हैं— (1) सहानुभूति–नाटक करते समय हम अलग-अलग समय की संस्कृति के अलग-अलग लोगों की जिन्दगियों को जी रहे होते हैं, उसे करीब से … Read more

शास्त्रीय नृत्य एवं लोक नृत्य के मध्य दो मुख्य अन्तर लिखिये ।

शास्त्रीय नृत्य एवं लोक नृत्य के मध्य दो मुख्य अन्तर लिखिये ।  उत्तर— शास्त्रीय नृत्य कला और लोकनृत्य कला का तुलनात्मक अध्ययन निम्न है— (i) शास्त्रीय नृत्य शास्त्रों में वर्णित नियमों से बँधे होते हैं जबकि लोक नृत्य में इस प्रकार के नियम नहीं होते हैं। (ii) शास्त्रीय नृत्य किसी क्षेत्र विशेष की सीमा से … Read more

गवरी लोक नृत्य के उल्लेखनीय पक्षों को स्पष्ट कीजिए ।

गवरी लोक नृत्य के उल्लेखनीय पक्षों को स्पष्ट कीजिए । उत्तर— गवरी लोक नृत्य–इसमें कई तरह की नृत्य नाटिकाएँ होती हैं। जो पौराणिक कथाओं, लोक गाथाओं और लोक जीवन की विभिन्न झांकियों पर आधारित होती है। ऐसी मान्यता है कि भस्मासुर ने अपनी तपस्या से शिवजी को प्रसन्न कर भस्म करने की शक्ति प्राप्त कर … Read more

भारत के शास्त्रीय नृत्य ‘कथक’ को समझाइए ।

भारत के शास्त्रीय नृत्य ‘कथक’ को समझाइए । उत्तर— कत्थक–भारत की कत्थक नृत्य शैली भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में सबसे नवीन है। 15वीं सोलहवीं शताब्दी के बीच इसका प्रचलन हुआ, यह तथ्य मूर्तिकला के प्रमाण से तो नहीं मगर हिन्दी एवं ब्रज भाषा के साहित्य से और मिनिएचर पेन्टिंग के सशक्त प्रमाणों से अवश्य सिद्ध … Read more

‘कला प्रदर्शनी’ क्यों महत्त्वपूर्ण है? संक्षेप में लिखिये।

‘कला प्रदर्शनी’ क्यों महत्त्वपूर्ण है? संक्षेप में लिखिये। उत्तर— मेलों और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित विभिन्न हस्तनिर्मित वस्तुएँ, दस्तकारी मानव की सौन्दर्य व कलाभिरुचि का प्रकटीकरण होता है। मनुष्य में सुन्दर वस्तु के दर्शन की इच्छा अथवा सौन्दर्य के आस्वादन की प्रवृत्ति जन्मजात होती है। इसी सन्दर्भ में सौन्दर्यात्मक और कलात्मक संवेदनाओं की वृद्धि और विकास … Read more

शास्त्रीय नृत्य की किन्हीं दो विधाओं का सामान्य परिचय दीजिए।

शास्त्रीय नृत्य की किन्हीं दो विधाओं का सामान्य परिचय दीजिए।  उत्तर— (1) मोहिनीअट्टम–मोहिनीअट्टम् केरल की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अर्थशास्त्रीय नृत्य है जो कथकली से अधिक पुराना माना जाता है। साहित्यिक रूप से नृत्य के बीच मुख्य माना जाने वाला मोहिनीअट्टम केरल के मंदिरों में प्रमुखतः किया जाता था। यह देवदासी नृत्य विरासत का … Read more