दृश्य-कला का शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में क्या महत्त्व है?

दृश्य-कला का शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में क्या महत्त्व है?  उत्तर— दृश्य-कला का शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में महत्त्व– दृश्य-कलाओं का प्रयोग शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सरल एवं बोधगम्य रूप में प्रस्तुत करने में किया जाता है। इसका महत्त्व निम्न प्रकार से है— (1) छात्रों की क्रियाशीलता–शिक्षण में दृश्य भिन कलाओं के प्रयोग से छात्रों में क्रियाशीलता … Read more

भारतीय नाट्यकला का सविस्तार विवेचन कीजिए ।

भारतीय नाट्यकला का सविस्तार विवेचन कीजिए । उत्तर— भारत में नाट्यकला का इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है। ऐसा माना जाता है कि संवादमयीगीतों के रूप में नाट्यकला ऋग्वेद काल में भी अस्तित्व में थी । विश्वभर में प्राचीनतम मानी जाने वाली भरतमुनि द्वारा रखी गई नाट्य की व्याकरण, नाट्यशास्त्र (जो कि लगभग 200 ई.पू. … Read more

राजस्थान के विशेष सन्दर्भ में भारत के प्रमुख सांस्कृतिक, कला उत्सव, प्रदर्शनी एवं शिल्प मेलों का विवरण प्रस्तुत कीजिए ।

राजस्थान के विशेष सन्दर्भ में भारत के प्रमुख सांस्कृतिक, कला उत्सव, प्रदर्शनी एवं शिल्प मेलों का विवरण प्रस्तुत कीजिए ।  उत्तर— राजस्थान के विशेष सन्दर्भ में भारत के वृहद् स्तरीय सांस्कृतिक, कला-उत्सव, प्रदर्शनी, शिल्प मेले—किसी भी कला का महत्त्व उस स्थिति में प्रकट होता है, जब उसे लोगों के सामने प्रदर्शित किया जाए। इसको प्रदर्शित … Read more

विद्यालय में नृत्य व नाटक प्रशिक्षण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये ।

विद्यालय में नृत्य व नाटक प्रशिक्षण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये ।  उत्तर— उच्च प्राथमिक स्तर पर नृत्यकला की गतिविधियाँ— (1) टेप – रिकॉर्डर व सीडी द्वारा छोटे बाल गीतों पर बच्चों को अपने तरह से नृत्य मुद्राओं एवं पद संचालन के लिए स्वतंत्र छोड़ना। (2) बच्चों के उम्र स्तरानुसार स्थानीय परिचित खेलों को सरल ताल … Read more

नाटक बच्चों में किन विकास करता है?

नाटक बच्चों में किन विकास करता है?  उत्तर— जब भी किसी ऐसे माध्यम को तलाशते हैं जो जीवन को कक्षाकक्ष में उतार सके, तो एक ही माध्यम नजर आता है— नाटक । नाटक ही वह जरिया है जो जिंदगी को हूबहू कक्षा में थोड़ी देर के लिए सृजित कर सकता है। इसके अतिरिक्त नाटक ही … Read more

राजस्थान के लोक नाट्यों (नाटकों) का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए ।

राजस्थान के लोक नाट्यों (नाटकों) का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए ।  उत्तर— राजस्थान में लोक नाट्य–नाट्य की परम्परा बड़ी प्राचीन है जिसको हम ख्याल, स्वांग और लीला के रूप में प्रचलित पाते हैं। विशेष प्रकार के आयोजन तथा धुनों से सम्बद्ध ख्यात, लीलाएँ और स्वांग सार्वजनिक रूप में आयोजित किये जाते हैं जिनसे पात्र और … Read more

भारतीय नृत्यकला के बारे में विस्तार से लिखिये ।

भारतीय नृत्यकला के बारे में विस्तार से लिखिये ।  उत्तर— नृत्यकला का परिचय–प्रकृति की विभिन्न क्रियाओं में लय, संगीत व नृत्य तीनों ही दिखाई देते हैं । नदी की कलकल, कोयल की कूक, मीन (मछली) की थिरकन, मयूर (मोर) की चाल, मेघों की घड़घड़ाहट, वर्षा की बूँदें, झरनों का गिरना, हवा के साथ पेड़ों का … Read more

सात शास्त्रीय नृत्य शैलियों का सामान्य परिचय प्रस्तुत कीजिए ।

सात शास्त्रीय नृत्य शैलियों का सामान्य परिचय प्रस्तुत कीजिए ।  उत्तर— सात शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ— (1) भरतनाट्यम–इस नृत्य का उदय दक्षिण भारत के मन्दिरों तथा राजदरबारों में हुआ। 19वीं शताब्दी में इसे प्रदर्शनकारी कला का दर्जा प्राप्त हुआ। देवदासी प्रथा में यह नृत्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती थी । देवदासियाँ मन्दिरों में धार्मिक अनुष्ठान के समय यह … Read more

‘नाटक’ का विस्तृत परिचय दीजिए। इसका अर्थ एवं परिभाषा देते हुए इसके विभिन्न प्रकारों को समझाइए ।

‘नाटक’ का विस्तृत परिचय दीजिए। इसका अर्थ एवं परिभाषा देते हुए इसके विभिन्न प्रकारों को समझाइए ।                               अथवा नाटक के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं? समझाइए । उत्तर— नाटक दृश्य काव्य हैं जिसका प्रदर्शन अभिनय द्वारा होता है। इसलिए इसका … Read more

राजस्थान की हस्तकला पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये ।

राजस्थान की हस्तकला पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये ।  उत्तर— राजस्थान की हस्तकला–प्राचीन काल से ही राजस्थानी हस्तशिल्प के उत्कृष्ट नमूने यहाँ के जनमानस की कलात्मक अभिरुचि को प्रदर्शित कर रहे हैं। राजस्थानी हस्तशिल्पों में जयपुर के मीनाकारी व नक्काशी की वस्तुएँ, बाड़मेरी लाख की चूड़ियाँ, प्रस्तर प्रतिमाएँ, मूल्यवान व अर्द्धमूल्यवान रत्न, मिट्टी के खिलौने, ब्ल्यू … Read more