किशोरों की कुछ सांवेगिक समस्याओं का वर्णन कीजिए ।

किशोरों की कुछ सांवेगिक समस्याओं का वर्णन कीजिए ।  उत्तर— किशोरावस्था की समस्यायें (Problems of Adolescence)– किशोरों के मन में काम- प्रवृत्ति के प्रति जिज्ञासा की भावना होती है। जब उनकी इस कौतूहल की भावना को घर में शान्त नहीं किया जाता तो परिणाम यह निकलता है कि काम-सम्बन्धी बातों की जानकारी अन्य साधनों द्वारा … Read more

व्यक्तित्व से आपका क्या अभिप्राय है? अच्छे व्यक्तित्व की पाँच विशेषताएँ लिखिए।

व्यक्तित्व से आपका क्या अभिप्राय है? अच्छे व्यक्तित्व की पाँच विशेषताएँ लिखिए।  उत्तर— व्यक्तित्व (Personality)–व्यक्तित्व शब्द अंग्रेजी के Personality शब्द का पर्याय है। Personality शब्द लैटिन शब्द परसोना (Persona) से बना है जिसका अर्थ ‘नकाब’ होता है। जिसे ग्रीक नायक नाटक करते समय पहनते थे। प्रारम्भ में व्यक्तित्व का अर्थ व्यक्ति के बाह्य रूपरंग से … Read more

कोलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए।

कोलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए।                                                     अथवा कोलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त को समझाइये । उत्तर— कोलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धान्त (Kohlberg’s Moral Development)— लॉरेंस … Read more

मानव अभिवृद्धि एवं विकास के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिये ।

मानव अभिवृद्धि एवं विकास के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिये । उत्तर— मानव अभिवृद्धि एवं विकास के सिद्धान्त (Principles of Human Growth and Development) — विकास एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। गैरिसन के अनुसार, “विकास अपने क्रम में कुछ नियमों का पालन करता है जिनको विकास के सिद्धान्तों के रूप में जाना जाता है। ” … Read more

फ्रायड का मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त की विकास अवस्थाओं की विस्तृत व्याख्या कीजिये |

फ्रायड का मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त की विकास अवस्थाओं की विस्तृत व्याख्या कीजिये | उत्तर— फ्रायड का मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त ( Freud’s Psycho-sexual Development)– मानव विकास के संदर्भ में सिगमण्ड फ्रायड के सिद्धान्त की मूलभूत अवधारणा यह है कि किसी “व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास पर उसके भीतर पायी जाने वाली काम शक्ति का व्यापक प्रभाव पड़ता … Read more

पियाजे के ज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त की आधारभूत धारणाओं की व्याख्या कीजिये । उसके द्वारा प्रतिपादित ज्ञानात्मक विकास की अवधारणाओं की चर्चा कीजिए।

पियाजे के ज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त की आधारभूत धारणाओं की व्याख्या कीजिये । उसके द्वारा प्रतिपादित ज्ञानात्मक विकास की अवधारणाओं की चर्चा कीजिए।  उत्तर— पियाजे का संज्ञान विकास सिद्धान्त (Congnitive Development Theory of Piaget)— संज्ञान-विकास (Cognitive Development)– सिद्धान्त स्विटजरलैण्ड के प्रसिद्ध जीवविज्ञानी, दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे (Jean Piaget) ने संज्ञानात्मक विकास की अति विस्तृत … Read more

एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धान्त की विकास अवस्थाओं का विस्तृत विवरण दीजिए।

एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धान्त की विकास अवस्थाओं का विस्तृत विवरण दीजिए।                                                                       अथवा एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धान्त का … Read more

बन्दुरा के सामाजिक शिक्षण सिद्धान्त की व्याख्या कीजिये ।

बन्दुरा के सामाजिक शिक्षण सिद्धान्त की व्याख्या कीजिये ।  उत्तर— बन्दुरा का सामाजिक शिक्षण सिद्धान्त (Bandura ‘s Theory of Social Development)–किशोरावस्था के सामाजिक शिक्षण सिद्धान्त का प्रतिपादन अल्बर्ट बन्दुरा ने किया था। इसीलिए इनके सिद्धान्त को ‘बन्दुरा का सामाजिक शिक्षण सिद्धान्त’ नाम दिया गया । बन्दुरा का यह मानना था कि किशोरावस्था के स्वरूप की … Read more

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास को स्पष्ट कीजिये ।

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास को स्पष्ट कीजिये । उत्तर— जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास (Jean Piaget’s Theory of Cognitive Development ) — जीन पियाजे को ‘विकासात्मक मनोविज्ञान’ का प्रेरक माना जाता है। पियाजे ने संज्ञानात्मकता पर बल दिया और ‘संज्ञानवादी विकास सिद्धान्त’ का प्रतिपादन किया । उन्होंने मानसिक विकास की अवस्था को ही संज्ञानात्मक … Read more

एक शिक्षक के लिए वंशानुक्रम एवं वातावरण का ज्ञान क्यों आवश्यक है ?

एक शिक्षक के लिए वंशानुक्रम एवं वातावरण का ज्ञान क्यों आवश्यक है ? उत्तर— वंशानुक्रम एवं वातावरण के ज्ञान का शैक्षिक निहितार्थ—वंशक्रम तथा वातावरण के ज्ञान से शिक्षक को निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं— (i) वंशक्रम के कारण बालकों में शारीरिक विभिन्नताएँ होती हैं तथा उनकी जन्मजात क्षमताओं में भी अन्तर होता है । शिक्षक … Read more