बिहार में चम्पारण सत्याग्रह (1917 ) के कारणों एवं परिणामों का वर्णन कीजिए ।

बिहार में चम्पारण सत्याग्रह (1917 ) के कारणों एवं परिणामों का वर्णन कीजिए । (63वीं BPSC / 2019 ) अथवा संघर्ष की प्रवृत्ति के दृष्टिकोण से चंपारण सत्याग्रह पहले के आंदोलनों से अलग था जिसे गांधी ने प्रयोग किया था। इसकी सफलता से भावी किसान आंदोलनों के प्रवेश द्वार खुल गए। उत्तर– पूरे देश की … Read more

सन् 1857 के विद्रोह में बिहार के योगदान की विवेचना कीजिए।

सन् 1857 के विद्रोह में बिहार के योगदान की विवेचना कीजिए। ( 63वीं BPSC / 2019 ) अथवा 1857 के विद्रोह के कारणों को उद्घाटित करते हुए बिहार में बाबू कुंवर सिंह का नेतृत्व और विभिन्न क्षेत्रों में अनेक स्वतंत्रता सेनायििों द्वारा चलाए गए आंदोलनों की चर्चा करते हुए उनके योगदान का उल्लेख कीजिए । … Read more

गांधीजी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विचारों की महत्ता का वर्णन कीजिए।

गांधीजी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विचारों की महत्ता का वर्णन कीजिए। (63वीं BPSC / 2019 ) अथवा गाँधीजी के शांति और अहिंसा के मूल सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उनके सामाजिक और सांस्कृतिक विचारों का उद्घाटन कीजिए, साथ ही इस दिशा में उनके द्वारा चलाए गए प्रमुख कार्यक्रमों अथवा अभियानों की चर्चा करें। उत्तर – … Read more

नेहरू और धर्मनिरपेक्षता

नेहरू और धर्मनिरपेक्षता उत्तर- धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है सभी धार्मिक समुदायों के प्रति राज्यों द्वारा अलग-अलग विश्वास और पूर्ण तटस्थता और समानता की नीति से संबंधित नागरिकों की ओर से सहिष्णुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का दृष्टिकोण। स्वतंत्र भारत में, नेहरू को भारतीय धर्मनिरपेक्षता के शिल्पीकार के रूप में जाना जाता है। भारतीय धर्मनिरपेक्षता, जैसा कि … Read more

जाति और धार्मिक पहचान पर 1881 की जनगणना का प्रभाव

जाति और धार्मिक पहचान पर 1881 की जनगणना का प्रभाव उत्तर – जनगणना देश के लोगों की एक आधिकारिक गणना और अन्य चीजों के बीच आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, लैंगिक और साक्षरता से संबंधित आंकड़ों का एक सांख्यिकीय संकलन है। भारत में पहली जनगणना, हालांकि सीमित रूपों में 1872 में की गई थी उसके बाद पहली … Read more

मजदूर वर्ग और राष्ट्रीय आंदोलन

मजदूर वर्ग और राष्ट्रीय आंदोलन (64वीं BPSC/2019 ) उत्तर – भारतीय श्रमिक वर्ग रेलवे, कोयला, कपास और जूट उद्योगों के निर्माण के परिणामस्वरूप उभरा। भारतीय मजदूर वर्ग को दो बुनियादी विरोधी शक्तियों का सामना करना पड़ा – एक विदेशी साम्राज्यवादी राजनीतिक शासन और दूसरा – देशी पूँजीपति वर्ग, दोनों के हाथों आर्थिक शोषण । राष्ट्रीय … Read more

19वीं सदी के ब्रिटिशकालीन भारत में समुद्र पारयिता पारंगत के क्या कारण थे? बिहार के विशेष संदर्भ में इन्डेन्च पद्धति के आलोक में विवेचना कीजिए।

19वीं सदी के ब्रिटिशकालीन भारत में समुद्र पारयिता पारंगत के क्या कारण थे? बिहार के विशेष संदर्भ में इन्डेन्च पद्धति के आलोक में विवेचना कीजिए। (64वीं BPSC/2019 ) अंग्रेजों के भारत पर पूर्ण अधिकार प्राप्त कर लेने के बाद भारतीय संसाधनों के दोहन और उनका निर्गमन के लिए अधिकाधिक मजदूरों की आवश्यकता की पूर्ति हेतु … Read more

19वीं सदी के उत्तरार्ध से भारतीय राष्ट्रवाद के विकास की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए।

19वीं सदी के उत्तरार्ध से भारतीय राष्ट्रवाद के विकास की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। ( 64वीं BPSC/2019 ) अथवा ‘राष्ट्रवाद’ को परिभाषित करते हुए अंग्रेजों के भारत पर पूर्ण आधिपत्य के उपरांत उनके अत्याचार पूर्ण आर्थिक शोषण एवं दोहनवादी नीतियों के कारण भारतीयों में उत्पन्न असंतोष और विद्रोह को उद्घाटित कीजिए।  अथवा पाश्चात्य शिक्षा से भारतीयों … Read more

बिहार में दलित आन्दोलन

बिहार में दलित आन्दोलन उत्तर- अरस्तू ने कहा था- “असमानता क्रान्ति की जड़ है । ” विश्व में जितनी भी लड़ाइयाँ, विद्रोह एवं आंदोलन हुए हैं, उनमें से अधिकतर समानता और स्वतंत्रता के लिए हुए हैं। इतिहास का कोई ऐसा युग नहीं हुआ जहां जाति या वर्णव्यवस्था के विरूद्ध कोई विद्रोह अथवा आंदोलन न हुआ … Read more

जाति और धर्म पर गाँधीजी के विचार

जाति और धर्म पर गाँधीजी के विचार उत्तर– गाँधीजी के वर्ण अथवा जाति पर विचार- गाँधीजी का सत्यप्रयास विश्व मानवता के लिए था, जहाँ किसी जाति-वर्ग अथवा नस्ल के प्रति घृणा का स्थान नहीं है, सबों के लिए सत्य, प्रेम और करूणा ही आदर्श है। भारत गुलाम क्यों बना, इसके कारणों की खोज करते हुए … Read more