राम की शक्तिपूजा : कथावस्तु

राम की शक्तिपूजा : कथावस्तु राम की शक्तिपूजा : कथावस्तु ‘राम की शक्तिपूजा’ की सामग्री निराला ने वस्तुत: बंगाल के ही एक मध्युगीन कवि कृतिवास की ‘रामायण’ से ली है, जो अनुमानतः तुलसीदास के सौ वर्ष पहले हुए थे। यह कविता सन् 1936 में लिखी गई। कविता कथात्मक ढंग से शुरू होती है और इसमें … Read more

कुकुरमुत्ता : नयी काव्य दृष्टि और प्रयोगशीलता

कुकुरमुत्ता : नयी काव्य दृष्टि और प्रयोगशीलता कुकुरमुत्ता : नयी काव्य दृष्टि और प्रयोगशीलता संपूर्ण हिंदी साहित्य में निराला सर्वाधिक प्रयोगशील कवि के रूप में सामने आते हैं। वे छायावादी कविता के दौर में छायावादी कविता लिखते हुए उसका अतिक्रमण कर ‘कुकुरमुत्ता’ सदृश कविता की रचना करते हैं। डा0 दूधनाथ सिंह ने उदाहरण देकर यह … Read more

तोड़ती पत्थर : भाव पक्ष एवं संरचना शिल्प

तोड़ती पत्थर : भाव पक्ष एवं संरचना शिल्प तोड़ती पत्थर : भाव पक्ष एवं संरचना शिल्प परिमल में संकलित ‘तोड़ती पत्थर’ निराला की उत्कृष्ट प्रगीतात्मक रचना है। प्रगीत में चिलचिलाती दोपहरी में सड़क के किनारे पत्थर तोड़ती एक युवा मजदूरिन का क्रांतिकारी आशयों और संकेतों से भरा वस्तुपरक यथार्थवादी अंकन है। रेखाचित्र के विषयनिष्ठ वस्तुपरक … Read more

जागो फिर एक बार : भाव पक्ष एवं कला पक्ष

जागो फिर एक बार : भाव पक्ष एवं कला पक्ष पूर्व में छायावादी कविता पर एक आरोप यह लगाया जाता था कि जब समूचा देश आजादी की जंग में प्राण-पण से लगा हुआ था छायावादी कवि प्रकृति के रम्य वर्णन में मशगूल थे। सर्वप्रथम आलोचक प्रवर नन्द दुलारे वाजपेयी तथा बाद में प्रो0 नामवर सिंह … Read more

‘शेफालिका’ : विषय-वस्तु एवं काव्य-सौंदर्य

‘शेफालिका’ : विषय-वस्तु एवं काव्य-सौंदर्य ‘शेफालिका’ : विषय-वस्तु एवं काव्य-सौंदर्य प्रकृति के अकूत सौंदर्य का उद्घाटन छायावादी कविता का मुख्य आकर्षण है। छायावादी कवियों ने पहली बार व्यापक रूप से अपनी कविताओं में प्रकृति का मानवीकरण किया है। निराला के काव्य में प्रकृति अपने अन्तर्मन की गांठे खोलती हैं और हृदय की समग्र अनुभूतियों की … Read more

‘दीन’ कविता का भव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य

‘दीन’ कविता का भव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य ‘दीन’ कविता का भव सौंदर्य एवं शिल्प सौंदर्य परदुखकातरता निराला की कविता का मुख्य स्वर है। उनकी अनेक रचनाओं में संसार के दुखों को अपने भीतर समेट लेने की आतुरता दिखायी देती है। निराला की दृष्टि में कविता का महत्व सामाजिकता का निर्वाह करने में है। मानव … Read more

निराला की लंबी कविताओं का वैशिष्ट्य

निराला की लंबी कविताओं का वैशिष्ट्य अंग्रेजी कवि डब्लू. बी. वीट्स ने लिखा है, “जब हम अपने से बाहर संघर्ष करते हैं तो कथा साहित्य की सृष् िहोती है और अपने आप से लड़ते हैं तो गीतिकाव्य की। लेकिन एक तीसरी स्थिति भी होती है जब हम अपने आप से लड़ते हुए बाहरी स्थिति से … Read more

प्रिय छोड़कर बंधनमय छंदों की छोटी राह : निराला की काव्यगत विशेषताएं

प्रिय छोड़कर बंधनमय छंदों की छोटी राह : निराला की काव्यगत विशेषताएं प्रिय छोड़कर बंधनमय छंदों की छोटी राह : निराला की काव्यगत विशेषताएं निराला आधुनिक हिंदी कविता के इतिहास में स्वतंत्र काव्य-मार्ग की खोज करनेवाले एक ऐसे महत्वपूर्ण कवि हैं, जिनमें परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व का मार्मिक साक्ष्य मौजूद है। स्वच्छंदतावाद और यथार्थवाद … Read more

दुख ही जीवन की कथा रही (जीवन वृत्त )

दुख ही जीवन की कथा रही (जीवन वृत्त ) दुख ही जीवन की कथा रही (जीवन वृत्त ) माघ शुक्ल ।।, संवत् 1955, तद्नुसार 29 फरवरी, 1899 को महिषादल बंगाल में एक ऐसे महाकवि का जन्म हुआ जिसने हिंदी कविता को एक नयी दिशा दी। भव्य. गौर और गठीले शरीर के धनी इस महाकवि का … Read more

पारिभाषिक शब्दावली :

पारिभाषिक शब्दावली : पारिभाषिक शब्दावली : 1. पूँजीवाद उत्पादन के साधनों पर वैयक्तिक अधिक के सिद्धांत पर आधारित एवं सामन्तशाही के ध्वंस पर प्रतिष्ठित अर्थ-व्यवस्था पूँजीवाद के नाम से प्रसिद्ध है। पूँजीवाद शब्द की उद्भावना 19वीं सदी के पूर्वाद्ध में इस अर्थव्यवस्था के समाजवादी आलोचकों ने की थी। यूरोप में प्रायः औद्योगिक क्रांति (18वीं-19वीं सदी) … Read more