नयी कविता : उद्भव, विकास और प्रवृत्तियाँ

नयी कविता : उद्भव, विकास और प्रवृत्तियाँ हिंदी साहित्य कोश के अनुसार, नयी कविता मूलत: 1953 ई0 में ‘नये पत्ते’ के प्रकाशन के साथ विकसित हुई और जगदीश गुप्त तथा रामस्वरूप चतुर्वेदी के संपादन में प्रकाशित होनेवाले संकलन ‘नयी कविता (1954) में सर्वप्रथम अपने समस्त संभावित प्रतिमानों के साथ प्रकाश में आयो। इस काल की … Read more

भीष्म का पश्चाताप : समीक्षा

भीष्म का पश्चाताप : समीक्षा आधुनिक हिंदी कविता में दिनकर रचित ‘कुरूक्षेत्र’ की सार्थकता रेखांकन योग्य है। यह आशा और उत्साह, दुख और पश्चाताप, ग्लानि और क्षोभ, वीरता और बलिदान आदि नाना भावों को व्यक्त करने वाला काव्य है। यह उस प्रकार का काव्य है, जिससे पराधीन जाति को स्वतंत्रता-संघर्ष से जूझने की शक्ति प्राप्त … Read more

युधिष्ठिर की ग्लानि : कथानक एवं काव्य सौंदर्य

युधिष्ठिर की ग्लानि : कथानक एवं काव्य सौंदर्य ‘महाभारत’ रामधारी सिंह दिनकर के प्रिय विषय (ग्रंथ) रहे हैं। महाभारत को आधार बनाकर उन्होंने कई रचनाएं की हैं। इन रचनाओं में कवि ने कई समकालीन प्रश्नों और समस्याओं को विमर्श का केंद्र बनाया। ‘युधिष्ठिर की ग्लानि’ कविता दिनकर जी की महत्त्वपूर्ण रचना ‘कुरुक्षेत्र’ के द्वितीय सर्ग … Read more

हाहाकार : कथानक

हाहाकार : कथानक हाहाकार : कथानक ‘हुंकार’ काव्य-संग्रह में संकलित रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘हाहाकार’ में जनता के दुख, उसकी घोड़ा और उसके घोर अभाव का हाहाकार स्पष्ट सुनायी देता है। इस कविता में कवि का आक्रोश अपने चरम पर है। वे प्रगतिवादी कवियों की तरह शोषकों की दमन नीति को जड़ से उखाड़ … Read more

कहने लगा चांद : भावार्थ

कहने लगा चांद : भावार्थ आलोचकगण भले ही दिनकर के काव्य-वैविध्य पर प्रश्न चिहन लगाये किंतु इसमें दो राय नहीं कि उनकी कविता का पूज छोटा नहीं है। कहने लगा चांद’ दिनकर की लीक से हटकर लिखी गई कविता है। इस कविता को कवि की प्रयोगवादी रचना भी मानी जा सकती है। यह कविता उनके … Read more

गीत अगीत : एक समीक्षा

गीत अगीत : एक समीक्षा रामधारी सिंह दिनकर की कविता में यदि एक ओर वीरता का आज है तो दूसरी तरफ शृंगार का माधुर्य भी है। एक ओर ‘कुरूक्षेत्र’ में ‘हुंकार’ की रणभेड़ी बजती है तो दूसरी ओर प्रेम के लुभावने गीत गाये जाते हैं। ऐसे ही गीतों में एक गीत है, ‘गीत- अगीत’। यह … Read more

व्याल पर विजय : अर्थ एवं व्याख्या

व्याल पर विजय : अर्थ एवं व्याख्या व्याल पर विजय : अर्थ एवं व्याख्या ‘व्याल पर विजय’ कविता दिनकर की इतिवृत्तात्मक कविता है। इसमें कवि ने बालक कृष्ण के जीवन से जुड़ी एक रोचक कथा का सहारा लिया है। कृष्ण द्वारा कालिया नाग वद्य की मिथकीय कथा को कवि ने काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है। … Read more

मनुज का श्रेय : कथावस्तु एवं काव्य-सौंदर्य

मनुज का श्रेय : कथावस्तु एवं काव्य-सौंदर्य विज्ञान की सारी शक्ति और संभावनाओं से पूर्ण परिचित होने के बाबजूद दिनकर विज्ञान के समाज और साहित्य विरोधी रूप से चितित थे। दुष्यंत कुमार से हुए एक बातचीत में उन्होंने साफ कहा, “यह तय है कि अगर कविता विज्ञान का पूरा अनुकरण करेगी तो विज्ञान बच रहेगा, … Read more

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : संक्षिप्त जीवनी

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : संक्षिप्त जीवनी अपनी कविता से ‘हुंकार’ भरनेवाले कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म 23 सितम्बर 1908 को बेगूसराय जिला के अंतर्गत सिमरिया घाट नामक ग्राम में हुआ था। वे अपने पिता रवि सिंह के मंझले बेटे थे। दिनकर जब अल्प-व्यस्क थे तभी उनके ऊपर से पिता की छाया हट गयो। ज्येष्ठ … Read more

गर्म पकौडी : अर्थ एवं व्याख्या

गर्म पकौडी : अर्थ एवं व्याख्या कविता में व्यंग्य का पैनापन निराला का वैशिष्ट्य है। कबीर के बाद निराला हिंदी के बड़े व्यंग्यकार-कवि के रूप में जाने जाते हैं। समकालीन राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य पर चुभने वाली शैली में व्यंग्य उत्पन्न करने में निराला की सफलता का प्रमाण है – गर्म पकौड़ी’। कविता की संज्ञा ही पारंपरिक … Read more