भारत के लिए प्रदूषण गंभीर खतरा बन गया है। इसके कारणों की पहचान कीजिए एवं इंगित कीजिए कि शासन द्वारा कौन से अनिवार्य कदम उठाए जाने चाहिए एवं जनता द्वारा कौन-से स्वैच्छिक कदम उठाए जाने चाहिए?

भारत के लिए प्रदूषण गंभीर खतरा बन गया है। इसके कारणों की पहचान कीजिए एवं इंगित कीजिए कि शासन द्वारा कौन से अनिवार्य कदम उठाए जाने चाहिए एवं जनता द्वारा कौन-से स्वैच्छिक कदम उठाए जाने चाहिए?

अथवा
प्रदूषण को परिभाषित करते हुए प्रदूषण को बढ़ाने वाले कारकों का उल्लेख करें। सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न परियोजनाओं का विश्लेषणात्मक विवरण दें। जनभागीदारी को बढ़ाने हेतु सुझाव दें।
उत्तर – प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप है जो कृत्रिम व प्राकृतिक दोनों तरीकों से हो सकता है। प्रदूषण के लिए मुख्यतः मानवीय कारक जिम्मेदार हैं, क्योंकि प्रकृति अपने द्वारा उत्पन्न प्रदूषण को संतुलित कर लेती है। वर्तमान समय में विश्व विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से ग्रस्त है। विश्व के साथ ही भारत में भी प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर से ऊपर हो चुका है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या व आर्थिक विकास के कारण भारत में प्रदूषण के साथ-साथ कई पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से शहरीकरण, औद्योगिकरण में अनियंत्रित वृद्धि, बड़े पैमाने पर कृषि का विस्तार तथा तीव्रीकरण एवं जंगलों का तेजी से नष्ट होना है। यह अनुमान है कि 2030 तक भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव काफी बढ़ जाएगा।
भारत में प्रतिवर्ष जितने लोग आतंकवाद के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं उससे दोगुने प्रदूषण के कारण अपनी जान से ,हाथ धो बैठते हैं। प्रदूषण की इस भयावहता के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं जो निम्न प्रकार हैं
> ऊर्जा उत्पादन में कोयले का सर्वाधिक प्रयोग
> ऊर्जा के प्राथमिक स्रोतों के रूप में जलने वाली लकड़ी एवं पशुधन से प्राप्त जैव ईंधन का उपयोग
> भूमिगत संसाधनों का अत्यधिक दोहन
> संगठित कचरे एवं अपशिष्ट के उचित निस्तारण की सेवाओं में कमी
> मल-जल उपचार संचालन में कमी
> बाढ़ नियंत्रण एवं मानूसन जल निकासी की व्यवस्था में कमी
> नदियों में मल एवं कूड़ा-कचरा वाहित करना
> शादी या उत्सव के दौरान उच्च ध्वनि यंत्रों का प्रयोग, गाड़ियों के हॉर्न, पटाखों आदि का प्रयोग
> रेडियोएक्टिव रिसाव, रसायन लेपित धार्मिक मूर्तियों का नदी – सरोवरों में विसर्जन
> गाड़ियों से निकले धुएं, फैक्टरियों आदि से वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण
> हाल ही के कुछ सर्वेक्षणों से ज्ञात हुआ है कि अरब के रेगिस्तान भी भारत में प्रदूषण के कारण हैं।
• प्रदूषण रोकने के लिए शासन द्वारा उठाए जाने वाले अनिवार्य कदम 
> प्लास्टिक पर पूर्णतः प्रतिबंध
> विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों का उचित निस्तारण
> पर्यावरणीय नियमों की दृढ़तापूर्वक लागू करना एवं उल्लंघन करने वाले पर दण्ड का प्रावधान
>  ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण पर बल, सड़कों एवं रेल पटरियों के किनारे हरित पट्टियों का निर्माण
>  कम्पनियों एवं उद्योगों के अपशिष्ट निस्तारण एवं पर्यावरणीय उल्लंघन से संबंधित कड़े निर्देश
> जल की बर्बादी रोकना एवं जल संग्रहण पर कार्य
> यातायात प्रबंधन में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी पर कड़े प्रावधान एवं पब्लिक यातायात सुधार
> अक्षय ऊर्जा उत्पादन पर जोर तथा कार्बन उत्सर्जन कम करना
> पर्यावरणीय खतरों के प्रति जनता को ज्यादा से ज्यादा जागरूक बनाना
> जल संचयन तथा भूमिगत जल संचयन को बढ़ावा
• जनता द्वारा स्वैच्छिक रूप से उठाए जाने वाले कदम
> जैव कचरा एवं प्लास्टिक कचरा दोनों को अलग-अलग कूड़ेदान में डालें।
> प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग करें और कोशिश करें कि इस्तेमाल हुई प्लास्टिक को रिसाइकिल केन्द्र तक पहुंचाएं।
> ग्रीन हाउस गैस उत्पन्न करने वाले उपकरणों का कम से कम उपयोग करें।
> ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करें।
> वर्षाजल का संचयन करें व जल की बर्बादी न करें।
> निजी वाहन की जगह सार्वजनिक वाहन का प्रयोग करें।
> सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता का ध्यान रखें।
> अपने पड़ोसियों एवं सगे-संबंधियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाएं।
> शौचालयों का प्रयोग।
भारत के पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत के वायु प्रदूषण, मृदा अपरदन आदि प्रदूषणों से काफी हद तक राहत के लिए भारत के कुल भूमि के 33 प्रतिशत पर वनाच्छादन आवश्यक है। परन्तु, वर्तमान परिदृश्य में लगभग 24 प्रतिशत (भारत वन रिपोर्ट-2017) भूमि वनाच्छादित है। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने ध्वनि की तीव्रता व समय निर्धारित कर दी है। इस प्रकार के अन्य कदम सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं परन्तु वर्तमान में जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है, उसके हिसाब से सरकार द्वारा उठाए गए कदम काफी नहीं हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में जनभागीदारी की भी आवश्यकता है।
> प्रदूषण क्या है?
> प्रदूषण रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदम
> प्रदूषण के कुछ प्रमुख कारण
>  जनभागीदारी
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