मानवाधिकारों से आप क्या समझते हैं? संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948 ) पर प्रकाश डालिए | बिहार सरकार द्वारा पिछले एक दशक में इन्हें बढ़ावा देने हेतु क्या प्रमुख प्रयास किए गए ?

मानवाधिकारों से आप क्या समझते हैं? संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948 ) पर प्रकाश डालिए | बिहार सरकार द्वारा पिछले एक दशक में इन्हें बढ़ावा देने हेतु क्या प्रमुख प्रयास किए गए ?

अथवा

मानवाधिकार क्या हैं? भारत में मानवाधिकारों की स्थिति का वर्णन करें। संयुक्त राष्ट्र की सार्वभौमिक घोषणा पर संक्षिप्त टिप्पणी करें तथा बिहार सरकार द्वारा मानवाधिकारों को बढ़ावा देने हेतु उठाए गए कदम की व्याख्या करें।
उत्तर- मानवाधिकार से तात्पर्य व्यक्ति के ऐसे अधिकारों से है जो जीवन की स्वतंत्रता, समता एवं व्यक्ति की गरिमा की रक्षा हेतु तत्पर रहता हो । मानवाधिकारों की उपयुक्त परिभाषा का विश्लेषण किया जाए तो इसके निम्नलिखित सार प्राप्त होते हैं
> व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता समानता एवं गरिमा का अधिकार
>  दासता अथवा गुलामी से मुक्ति
>  कानून के समक्ष समानता
> विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
> धार्मिक स्वतंत्रता
> सम्पत्ति का अधिकार आदि
> शिक्षा का अधिकार
भारत में कुछ मौलिक मानवाधिकार को भारत के संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक दिए गए हैं। ये मौलिक अधिकार न्यायालयों द्वारा परिवर्तनीय हैं। मौलिक अधिकारों के हनन की जांच के लिए एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया है, जो मानवाधिकारों के हनन होने पर क्षतिपूर्ति की अनुशंसा कर सकती है। ये मौलिक अधिकार व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक हैं तथा अन्य मौलिक अधिकार जो अपेक्षाकृत कम आवश्यक हैं, उन्हें संविधान के भाग-4 में अनुच्छेद-36 से 51 तक नीति निदेशक तत्व के रूप में दिया गया है।
 10 दिसम्बर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस घोषणा से राष्ट्रों को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और वे इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने और क्रियान्वित करने के लिए अग्रसर हुए। राज्यों ने इन्हें अपनी विधि में प्रवर्तनीय अधिकार का दर्जा दिया। इस घोषणा को संयुक्त राष्ट्र की पांच भाषाओं अंग्रेजी, चीनी, फ्रांसीसी, रूसी और स्पेनीश में प्रकाशित किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इन अधिकारों को 30 अनुच्छेदों में प्रकाशित किया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित सार्वभौमिक घोषणापत्र के कुछ मुख्य अनुच्छेद निम्न हैं
अनु 2- सभी मनुष्यों को गौरव और अधिकारों के मामले में जन्मजात स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है।
 अनु 3- प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, स्वाधीनता और वैयक्तिक सुरक्षा का अधिकार।
अनु 4 – गुलामी या दासता से मुक्ति, गुलामों का व्यापार निषिद्ध कानून की निगाह में सभी समान हैं।
अनु 7 – कानून की निगाह में सभी समान हैं।
अनु 8 – सभी को संविधान या कानून द्वारा प्राप्त बुनियादी अधिकारों का अतिक्रमण करने वाले कार्यों के विरुद्ध समुचित कारगर सहायता पाने का अधिकार ।
अनु. 9- किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार, नजरबंद या देश से निष्कासित न किया जाए।
 अनु. 11- कोई भी व्यक्ति तब तक निरपराधी माना जाएगा, जब तक उसे कारगर कानूनी कार्यवाहियों के माध्यम से अदालत ने दोषी न पाया हो।
अनु. 13- देश की सीमाओं के भीतर स्वतंत्रता पूर्वक आने-जाने और बसने का अधिकार, दूसरे देश जाने तथा अपने देश वापस आने का अधिकार ।
अनु. 16- अंतराष्ट्रीय विवाह करने का अधिकार।
अनु. 17- संपत्ति का अधिकार।
अनु. 18- व्यक्ति को विचार, अंतरात्मा और धर्म की आजादी।
अनु. 19 – विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
अनु. 20 – शांतिपूर्वक सभा करने या समिति बनाने का अधिकार ।
अनु. 24 – विश्राम और अवकाश का अधिकार ।
अनु. 26 – शिक्षा का अधिकार ।
चूंकि मानव अधिकार मानव के चहुंमुखी विकास के लिए आवश्यक पहलू हैं, इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने अपने सार्वभौम घोषणा के बाद देशों से आग्रह किया कि यथासम्भव वे मानवाधिकारों को अपने संविधान में जगह दें तथा उनका सही ढंग से क्रियान्वयन कर अपनी जनता को उनके अधिकार सुनिश्चित करें तथा उनकी निगरानी के लिए एक एजेन्सी का भी गठन करें।
भारत में केन्द्रीय स्तर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्य स्तर पर राज्य मानवाधिकार आयोग जनता के मानवाधिकारों के हनन के मामले देखते हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में बिहार में भी बिहार मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई है। बिहार मानवाधिकार आयोग की स्थापना जनवरी, 2000 में, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया। परन्तु इसका औपचारिक गठन जून – 2008 में किया गया। बिहार मानवाधिकार आयोग बिहार की जनता के अधिकारों का हनन होने पर क्षतिपूर्ति की सिफारिश बिहार सरकार से करता है। बिहार सरकार द्वारा पिछले दशक से मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कुछ प्रमुख निम्न कदम उठाए गए हैं –
> 2008 में पहली बार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति ।
> राज्य में उनके अधिकारों के प्रति सजग करने के लिए जन-जागरूकता अभियान
> सरकारी कर्मियों द्वारा मानवाधिकारों के हनन करने पर सरकारी कर्मियों पर जुर्माना व दण्ड
> बिहार मानवाधिकार आयोग की शक्तियों में वृद्धि करते हुए इसके कार्यक्षेत्र को निजी कर्मियों तक विस्तारित करना
> मानवाधिकारों के हनन मामले में पीड़ित व्यक्ति को यथाशीघ्र तार्किक क्षतिपूर्ति
> राज्य पुलिस को तुरन्त केस दर्ज कर यथाशीघ्र आवश्यक कार्यवाही का निर्देश
>  राज्य पुलिस द्वारा मानवाधिकारों के हनन होने पर उन्हें बर्खास्त करने का आदेश
> मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यशील एनजीओ को सम्मानित करना तथा उन्हें ऐसे मामलों को उठाने के लिए प्रोत्साहित करना
मानवाधिकार व्यक्ति की गरिमा व विकास के लिए आवश्यक है जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ, केन्द्र सरकारें, राज्य सरकारें, विभिन्न एनजीओ आदि कार्यशील हैं लेकिन फिर भी जन-जागरूकता की कमी, राजनीतिकरण आदि के कारण जनता के मानवाधिकारों का काफी हनन होता रहता है। इनमें से अधिकतर व्यक्तियों को पता भी नहीं होता है कि ये उनके अधिकार भी हैं। इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाई जाए और सरकारें इसके लिए ठोस कदम उठाएं।
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