पूँजीवादी अर्थव्यवस्था क्या है ? इसके अवगुणों की विवेचना कीजिए।

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था क्या है ? इसके अवगुणों की विवेचना कीजिए। उत्तर- पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का अर्थ-  पूँजीवादी अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जिसमें उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में निजी उद्यम पाया जाता है जो निजी लाभ के लिए काम करता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के अवगुण- (i) सम्पत्ति एवं आय की असमानताएँ – आय की असमानताओं के कारण देश की सम्पत्ति … Read more

अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं ? इनके दो कार्य कौन-कौन से है ?

अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं ? इनके दो कार्य कौन-कौन से है ? उत्तर- अर्थव्यवस्था से तात्पर्य वैसी क्रियाओं का सम्पादन, जिसमें आथिर्क उत्पादन निहित होता है। आर्थर लेविस ने अर्थव्यवस्था के संबंध में कहा कि व्यवस्था का संबंध किसी राष्ट्र के संपूर्ण व्यवहार से होता है जिसके आधार मानवीय आवश्यकताओं की संतूष्टि के लिए वह … Read more

उपन्यास किसे कहते है? उपन्यास का विकास क्रम

उपन्यास किसे कहते है? उपन्यास का विकास क्रम उपन्यास किसे कहते हैं? उपन्यास का क्या अर्थ हैं  Upanyan arth paribhasha visheshta vikas;उपन्यास शब्द ‘उप’ उपसर्ग और ‘न्यास’ पद के योग से बना है। जिसका अर्थ है उप= समीप, न्याय रखना स्थापित रखना (निकट रखी हुई वस्तु)। अर्थात् वह वस्तु या कृति जिसको पढ़कर पाठक को … Read more

नाटक किसे कहते है? परिभाषा, विकास क्रम और तत्व

नाटक किसे कहते है? परिभाषा, विकास क्रम और तत्व नाटक किसे कहते है? नाटक का क्या अर्थ हैं {natak kise kahate hain} नाटक “नट” शब्द से निर्मित है जिसका आशय हैं— सात्त्विक भावों का अभिनय। नाटक दृश्य काव्य के अंतर्गत आता है  । इसका प्रदर्शन रंगमंच पर होता हैं। भारतेंदु हरिशचन्द्र ने नाटक के लक्षण … Read more

रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय

रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय (ramchandra shukla ka jivan parichay) आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म बस्ती जिले के आगोन नामक एक गांव मे सन् 1884 मे हुआ था। आचार्य रामचंद्र शुक्ल साहित्य के कालजयी समीक्षक, इतिहासकार एवं साहित्यकार थे। शुक्ल जी के पिता का नाम चंद्रबली था। जब यह … Read more

सुरकोटड़ा सभ्यता (1800 ई.पू.- 1700 ई.पू.)

सुरकोटड़ा सभ्यता (1800 ई.पू.- 1700 ई.पू.) सुरकोटदा या ‘सुरकोटडा’ गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित है। इस स्थल से हड़प्पा सभ्यता के विस्तार के प्रमाण मिले हैं। इसकी खोज 1964 में ‘जगपति जोशी’ ने की थी इस स्थल से ‘सिंधु सभ्यता के पतन’ के अवशेष परिलक्षित होते हैं। यहाँ पर एक बहुत बड़ा टीला था। यहाँ पर किये गये उत्खनन में एक दुर्ग बना मिला, जो … Read more

धोलावीरा सभ्यता (2650-2100 ई.पू.)

धोलावीरा सभ्यता (2650-2100 ई.पू.) धोलावीरा ( गुजराती; ધોળાવીરા) भारत के गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले की भचाऊ तालुका में स्थित एक पुरातत्व स्थल है। इसका नाम यहाँ से एक किमी दक्षिण में स्थित ग्राम पर पड़ा है, जो राधनपुर से 165 किमी दूर स्थित है। धोलावीरा में सिन्धु घाटी सभ्यता के अवशेष और खण्डहर मिलते हैं और यह उस सभ्यता के सबसे बड़े ज्ञात नगरों में से एक था। इस पुरातत्व … Read more

रोपड़ सभ्यता

रोपड़ सभ्यता रोपड़ सभ्यता खोजकर्ता – 1950 ई. में रोपङ की खोज बी.बी.लाल द्वारा की गयी। नदी – सतलज नदी के किनारे स्थित है, रोपङ। स्थान – रोपङ भारत में पंजाब में स्थित है। यज्ञदत्त शर्मा ने रोपङ का उत्खनन करवाया (1955-56 ई.)। रोपङ में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् सर्वप्रथम उत्खनन किया गया था। इसका वर्तमान नाम ‘रूप नगर’ है। … Read more

बनवाली सभ्यता (2600 ई.पू. से 1900 ई.पू.)

बनवाली सभ्यता (2600 ई.पू. से 1900 ई.पू.)पुरातत्व स्थल (archaeological site) ऐसे स्थान या स्थानों के समूह को बोलते हैं जहाँ इतिहास या प्रागैतिहास (प्रेईहिस्टरी) में बीती हुई घटनाओं व जीवन के चिह्न मिलें। इनका अध्ययन करना इतिहास मालूम करने के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण होता है और पुरातत्वशास्त्र (पुरातत्व स्थलों की छानबीन करना) इतिहास की एक जानीमानी शाखा है। बनवाली सभ्यता (2600 … Read more

चन्हुदडो सभ्यता (4000 से 1700 ई.)

चन्हुदडो सभ्यता (4000 से 1700 ई.) चनहुदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता के नगरीय झुकर चरण से सम्बंधित एक पुरातत्व स्थल है। यह क्षेत्र पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के मोहन जोदड़ो से 130 किलोमीटर (81 मील) दक्षिण में स्थित है। यहाँ पर 4000 से 1700 से ईशा पूर्व में बसा हुआ माना जाता है और इस स्थान को इंद्रगोप मनकों के निर्माण स्थल के रूप में जाना जाता है। चनहुदड़ो की पहली बार खुदाई मार्च 1930 में एन॰जी॰ … Read more